एमपी में मंत्रियों से वन-टू-वन के बाद फाइल पहुंची दिल्ली, जानें कौन-कौन से मंत्री रहे विवादों में...

Amresh Kushwaha | May 19, 2026, 14:41 IST
minister sampatiya uike missing liquor business controversy
मध्यप्रदेश में मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई के शराब कारोबार पर सवाल उठाने के बाद मंत्री संपतिया उइके अज्ञातवास में चली गई हैं। भोपाल से दिल्ली तक हड़कंप मचा है। संगठन ने 10 बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। वहीं, अब फाइल दिल्ली पहुंच गई है...

शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में मंत्री संपतिया उइके ने मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई के शराब कारोबार पर सवाल उठाए हैं।
  • इसके बाद से मंत्री संपतिया उइके अचानक अज्ञातवास में चली गई हैं।
  • संगठन ने उनसे 10 बार से ज्यादा फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं आ रहा है।
  • प्रभारी मंत्री शिवप्रकाश और जामवाल वन-टू-वन बातचीत के बाद रिपोर्ट लेकर दिल्ली रवाना हो गए हैं।
  • मंत्री संपतिया का कहना है कि उनके खिलाफ षड़यंत्र हो रहा है।

क्या है पूरा विवाद?

मध्यप्रदेश में सत्ता और संगठन की लाख हिदायतों के बावजूद मंत्रियों के विवाद थम नहीं रहे हैं। कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके और मंत्री नागर सिंह चौहान के बीच एक नया टकराव सामने आया है।



दावा है कि संपतिया उइके ने विधानसभा में यह सवाल उठाया कि नागर सिंह चौहान का शराब का कारोबार है, इसलिए समन्वय का सवाल ही नहीं उठता है। यह बात भोपाल से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचाने के लिए काफी थी।



वन-टू-वन के बाद अज्ञातवास

बीजेपी संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल सोमवार, 18 मई की दोपहर एक बजे दिल्ली रवाना हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने जनपद सीईओ के साथ विवाद की रिपोर्ट करने वाले मंत्रियों से वन-टू-वन बातचीत की।



सूत्रों के मुताबिक, बातचीत से ठीक पहले मंत्री संपतिया उइके ने भाई के बारे में खुद को अलग बताया था। वहीं, इसके बाद से वह बेखबर हो गईं हैं।



संगठन की तरफ से 10 से 10 बार उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपतिया उइके ने कोई जवाब नहीं दिया।



मंत्री बोलीं, षड़यंत्र हो रहा है

मंत्री संपतिया उइके ने संगठन को गंभीर रूप से शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उनके खिलाफ षड़यंत्र किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके हवाले से जो प्रचार-प्रसार हो रहा है, उसका खंडन किया जाए।



संगठन ने इस पर कहा कि बात लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग देने और कार्ड पेश करने की सामने आ चुकी है। इस पूरे विवाद में मंत्री संपतिया उइके ने कॉल रिसीव करना बंद कर दिया है।



प्रदेश में विवादों से घिरे मंत्रियों की लंबी सूची

यह कोई पहला मामला नहीं है। प्रदेश में कई मंत्री अलग-अलग विवादों में घिरे हैं। सरकार ने किसी पर भी अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है।



कफ सिरप विवाद

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल : कफ सिरप से लोगों की मौत होने के दौरान राजेंद्र शुक्ल विवादों में घिरे थे। मौतों के बाद उन्होंने लंबे समय तक छिंदवाड़ा जाने से दूरी बना ली थी। बाद में क्लीनचिट मिल गई थी।



कर्नल सोफिया पर अनर्गल टिप्पणी

मंत्री विजय शाह : ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया पर मंत्री विजय शाह ने तंज कसा था। मामला कोर्ट तक गया, लेकिन सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे पहले एक कद्दावर नेता की पत्नी पर भी तंज किया था, तब ही मंत्री पद गंवाना पड़ा था।



भागीरथपुरा दूषित जल कांड

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय : इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड में मीडिया के सवालों पर उन्होंने विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया था।



इतिहास को लेकर विवाद

मंत्री इंदर सिंह परमार : समाज सुधारक राजा राममोहन राय को नवंबर 2025 में अंग्रेजों का दलाल बता दिया था। मामला विवादों में आने के बाद मंत्री ने खेद भी जताया था।



पेट माफिया वाले बयान

मंत्री एदल सिंह कंषाना : मुरैना में अवैध रेत खनन पर मंत्री ने रेत माफिया को पेट माफिया बताया था। मंत्री कंषाना ने कहा था कि वहां कोई रेत माफिया नहीं है। वो अपना पेट भरते हैं।



जाति विवाद

राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी : जाति को लेकर विवाद में हैं। कांग्रेस की याचिका की कोर्ट में सुनवाई चल रही है।



स्कूल और बेटे के विवाद

राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल : स्कूल की मान्यता निरस्त करने और ग्वालियर में होटल कर्मियों से विवाद के कारण चर्चा में आए। बेटे पर हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार को घेरा गया था।



माना जा रहा है यह वजह

संगठन के जानकारों का मानना है कि मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई न होने की एक बड़ी वजह जातीय समीकरण और क्षेत्रीय प्रभाव है। जिन मंत्रियों को हटाने से जातीय या क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने का खतरा हो, उन पर सरकार आंख मूंद लेती है।



दिल्ली में क्या होगा?

प्रभारी अधिकारी मंत्रियों की रिपोर्ट लेकर दिल्ली पहुंच चुके हैं। अब देखना होगा कि केंद्रीय नेतृत्व इस पर क्या रुख अपनाता है। संपतिया उइके अभी भी पहुंच से बाहर हैं।



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