कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, विधायक के खिलाफ चुनाव याचिका खारिज करने से इनकार
News In Short
- हाईकोर्ट ने विधायक अभय मिश्रा की चुनाव याचिका खारिज करने की मांग ठुकराई है।
- हाईकोर्ट ने कहा आरोप सुनवाई योग्य, ट्रायल जरूरी है।
- विधायक अभय मिश्रा पर शपथ पत्र में जानकारी छिपाने के आरोप हैं।
- 4 हफ्ते में विधायक को जवाब देना होगा।
- 637 वोट से जीते चुनाव पर अब कानूनी संकट है।
News In Detail
जबलपुर हाईकोर्ट में सेमरिया विधानसभा से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने से इनकार कर दिया।
यह चुनाव याचिका पूर्व विधायक कृष्णपति त्रिपाठी ने दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता रामसखा कुशवाहा और सिद्धार्थ शर्मा पैरवी कर रहे हैं। अब इस मामले में नियमित सुनवाई होगी, जिससे उनकी विधायकी पर खतरा मंडराने लगा है।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता (भाजपा नेता केपी त्रिपाठी) की ओर से विधायक पर कई अहम जानकारियां छिपाने के आरोप लगाए गए हैं। इसमें शपथ पत्र (फॉर्म-26) में आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं लिखना, ICICI बैंक से लिए गए लाखों के लोन का खुलासा न करना और आय के स्रोतों की पूरी जानकारी न देना शामिल है। इसके अलावा एक ऐसी कंपनी से जुड़ाव का आरोप भी है, जिसका सरकार से अनुबंध था, जो कानूनी रूप से अयोग्यता का कारण बन सकता है।
विधायक की दलीलें भी कोर्ट में पेश
मामले में विधायक की ओर से यह दलील दी गई कि जिन आपराधिक मामलों का जिक्र किया जा रहा है, उनमें वे पहले ही बरी हो चुके हैं, इसलिए जानकारी देना जरूरी नहीं था।
साथ ही लोन को फर्म की देनदारी बताया गया और यह भी कहा गया कि नामांकन से पहले उन्होंने कंपनियों से इस्तीफा दे दिया था। इन आधारों पर उन्होंने याचिका खारिज करने की मांग की थी।
चार सप्ताह बाद शुरू होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने विधायक को चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की सुनवाई 18 अप्रैल 2026 को होगी। इसके बाद इस मामले में नियमित सुनवाई शुरू होगी, जिसमें गवाहों और सबूतों के आधार पर फैसला लिया जाएगा। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला उनकी विधायकी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तर पर हलचल तेज कर दी है।
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