सवा 2 साल में MP के 18 IAS-IPS पर कार्रवाई, सीएम ने लिया हर डेढ़ महीने में एक अफसर पर एक्शन
News In Short
- सीएम मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को पद संभाला, तभी से सख्त रवैया जारी है।
- सवा दो साल में उन्होंने 10 आईएएस और 8 आईपीएस अफसरों पर कार्रवाई की।
- हर 46 दिन के औसत पर एक बड़े अधिकारी को लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ी।
- ताजा मामले में गुना एसपी और सीधी कलेक्टर को हटाया गया।
- अफसरशाही को साफ संदेश है कि सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।
News In Detail
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर सख्त फैसला लिया है। गुना के एसपी अंकित सोनी और सीधी के कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को लापरवाही के आरोप में हटा दिया गया है।
यह कोई अकेला मामला नहीं है। 13 दिसंबर 2023 को शपथ लेने के बाद से सीएम मोहन यादव ने अब तक कम से कम 9 बड़े मामलों में कलेक्टर और एसपी स्तर के अफसरों पर सीधी कार्रवाई की है। कुल मिलाकर सवा दो साल में 18 बड़े अधिकारी इस एक्शन की जद में आ चुके हैं। औसत निकालें तो हर 46 दिन में एक अफसर पर गाज गिरी है।
गुना कैश कांड में एसपी हटे
22 मार्च 2026 को सबसे ताजा मामला सामने आया। गुना जिले में एक गुजराती व्यापारी से एक करोड़ रुपए जब्त किए गए थे। आरोप है कि पुलिस ने बीस लाख रुपए लेकर उसे छोड़ दिया और कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर सीएम ने एसपी अंकित सोनी को तत्काल हटा दिया। थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी भी सस्पेंड हुए।
सीधी कलेक्टर दफ्तर में नहीं, गई कुर्सी
सीधी के कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें थीं। दावा किया जा रहा था कि वे अपने दफ्तर में नाम मात्र बैठते थे। अक्सर शाम को ही कुछ देर के लिए आते थे। इससे आम लोगों और जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी थी।
यह भी सामने आया कि सीधी सांसद के एक प्रोजेक्ट पर फायर एनओसी (No Objection Certificate) रोक रखी थी। इन तमाम शिकायतों के बाद सोमवंशी को हटाने का फैसला हुआ।
अशोकनगर: ट्रस्ट विवाद में कलेक्टर हटे
24 जनवरी 2025 को अशोकनगर के कलेक्टर आईएएस आदित्य सिंह को हटाया गया। उन पर आनंदपुर साहिब ट्रस्ट के खिलाफ कार्रवाई के दौरान रिश्वत के आरोप लगे थे। हालांकि बाद में ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक शिकायत नहीं की गई। उनकी जगह 2015 बैच के आईएएस साकेत मालवीय को जिम्मेदारी सौंपी गई। सिंह ने चुनाव आयोग की एसआईआर (Special Investigation Report) कार्रवाई में प्रदेश में सबसे अच्छा काम किया था, फिर भी आरोपों के चलते उन्हें जाना पड़ा।
इंदौर में दूषित पानी से 23 मौतें
2 जनवरी 2026 को इंदौर के भागीरथपुरा में सीवर मिला पानी सप्लाई हो गया। इससे 23 लोगों की मौत हुई। सीएम ने तत्काल नगर निगम आयुक्त आईएएस दिलीप यादव और अपर आयुक्त आईएएस रोहित सिसोनिया को हटाया। अगले दिन 3 जनवरी को मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी (Managing Director) क्षितिज सिंघल को नया निगमायुक्त बनाया गया। तीन नए अपर आयुक्त भी नियुक्त किए गए।
मऊगंज हत्याकांड: 3 दिन में बदले कलेक्टर-एसपी
15 मार्च 2025 को मऊगंज के गड़रा गांव में एक आदिवासी परिवार ने युवक सनी द्विवेदी को बंधक बनाकर पीट-पीटकर मार डाला। बचाने गई पुलिस टीम पर हमला हुआ और एएसआई (Assistant Sub Inspector) रामगोविंद गौतम की जान चली गई।
तहसीलदार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए। सिर्फ तीन दिन बाद 18 मार्च को कलेक्टर आईएएस अजय श्रीवास्तव और एसपी रसना ठाकुर दोनों को हटा दिया गया। कलेक्टर की जगह 2015 बैच के आईएएस संजय कुमार जैन को भेजा गया और एसपी रसना की जगह दिलीप कुमार सोनी को नियुक्त किया गया।
सागर में दीवार गिरी, 9 बच्चे गए, 3 अफसर हटे
4 अगस्त 2024 को सागर जिले के शाहपुर में एक मकान की दीवार गिरी और 9 बच्चों की मौत हो गई। सरकार ने उसी दिन कलेक्टर दीपक आर्य, एसपी अभिषेक तिवारी और एसडीएम (Sub Divisional Magistrate) संदीप सिंह तीनों को हटा दिया। बाद में यह भी सामने आया कि एसपी तिवारी घटना से 15 दिन पहले से विदेश में थे। वे 5 महीने से तबादला मांग रहे थे लेकिन सरकार उन्हें रिलीव नहीं कर रही थी।
शाजापुर: औकात वाले वीडियो ने डुबोई नाव
2 जनवरी 2024 को ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल के बीच शाजापुर कलेक्टर किशोर कान्याल का एक वीडियो वायरल हुआ। उसमें वे एक ड्राइवर से बैठक के दौरान औकात पूछते नजर आए। वीडियो फैलते ही अगले ही दिन 3 जनवरी को उन्हें हटाकर मंत्रालय में उप सचिव पदस्थ कर दिया गया। 25 दिन बाद उन्हें वन विभाग में उप सचिव बनाकर भेजा गया।
हरदा पटाखा ब्लास्ट: 13 मौतें, एसपी-कलेक्टर दोनों गए
7 फरवरी 2024 को हरदा में एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हुआ। 13 लोगों की मौत हुई और 75 से ज्यादा घायल हुए। सीएम ने पहले एसपी संजीव कुमार कंचन और फिर कलेक्टर ऋषि गर्ग को हटाया। कारखाना निरीक्षक नवीन कुमार बरवा को निलंबित किया गया। कलेक्टर गर्ग को उप सचिव बनाया गया और एसपी कंचन को पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाकर भेजा गया।
सिवनी में गोवंश हत्या, जिला बंद
जून 2024 में सिवनी जिले के धूमा थाना क्षेत्र में 50 से ज्यादा गोवंशों की हत्या कर शव फेंक दिए गए। इससे सिवनी बंद हो गया और असर पड़ोसी जिले मंडला तक पहुंचा। 23 जून को सीएम ने सिवनी कलेक्टर आईएएस क्षितिज सिंघल और एसपी राकेश कुमार सिंह दोनों को हटाया। सिंघल को मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का प्रबंध संचालक बनाया गया। एसपी राकेश सिंह को पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया। वे अभी छिंदवाड़ा में एसपी हैं।
गुना बस आग: पहले 15 दिन में ही बड़ा एक्शन
सीएम मोहन यादव के शपथ लेने के महज 15 दिन बाद 27 दिसंबर 2023 को गुना में एक यात्री बस में आग लग गई। 13 लोगों की मौत हो गई। अगले ही दिन 28 दिसंबर को सीएम ने गुना कलेक्टर तरुण राठी, एसपी विजय कुमार खत्री और परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा को हटाया। आरटीओ (Regional Transport Officer) रवि बरेलिया और गुना के चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर बीडी कतरोलिया को सस्पेंड किया गया। पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह से परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी वापस लिया गया।
कटनी एसपी पर सीएसपी विवाद भारी पड़ा
कटनी के एसपी आईपीएस अभिजीत रंजन जिले में पदस्थ एक सीएसपी (Circle Superintendent of Police) को लेकर लंबे समय तक विवादों में रहे। सीएसपी के तहसीलदार पति और उनके परिजनों ने सीएम, डीजीपी (Director General of Police) समेत तमाम उच्च अधिकारियों से शिकायत की। जब लंबे समय तक मामला नहीं सुलझा तो जून 2025 में एसपी रंजन को पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मोहन का संदेश
यह सारी कार्रवाइयां मिलकर एक तस्वीर बनाती हैं। जनता की जान जाए, भ्रष्टाचार हो, दफ्तर में अनुपस्थिति हो या व्यवहार में अहंकार, सीएम मोहन यादव ने हर मामले में जल्द और सख्त फैसला लिया है। सवा दो साल में 18 बड़े अफसरों पर कार्रवाई का यह रिकॉर्ड मध्यप्रदेश की नौकरशाही के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है।
FAQ
- सीएम मोहन यादव ने अब तक कितने आईएएस-आईपीएस अफसरों पर कार्रवाई की है?
13 दिसंबर 2023 से लेकर मार्च 2026 तक यानी सवा दो साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 10 आईएएस और 8 आईपीएस समेत कुल 18 बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की है। इसका औसत निकालें तो हर 46 दिन में एक अफसर पर एक्शन हुआ है। इनमें कलेक्टर, एसपी, निगमायुक्त और परिवहन आयुक्त जैसे वरिष्ठ पद शामिल हैं।
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