मुरैना मनरेगा घोटाला : कागजों पर खोद डाले 29 लाख के दो तालाब, मौके पर मिला जुता हुआ खेत
समझें क्या है पूरा मामला
- मुरैना जिले की डोडरी ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है।
- यहां करीब 29 लाख रुपए की लागत से कागजों पर दो नए तालाब बना दिए गए।
- मस्टर रोल में 180 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर लाखों का भुगतान निकाल लिया गया।
- शिकायत पर जब जांच अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो तालाब की जगह जुता हुआ खेत मिला।
- सरपंच और सचिव ने जांच को झूठा बताते हुए कहा कि तालाब वहीं पर मौजूद हैं।
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से भ्रष्टाचार का एक बेहद अनोखा मामला सामने आया है। यहां के पोरसा जनपद की डोडरी ग्राम पंचायत में सरकारी पैसों की खुली लूट हुई है। अधिकारियों ने कागजों पर ही दो बड़े तालाब खोदकर तैयार कर दिए।
इस पूरे काम के लिए बकायदा बजट भी पास कराया गया था। दोनों तालाबों को बनाने की कुल लागत करीब 29 लाख रुपए तय की गई थी। इस योजना में ग्रामीणों को रोजगार देने का नाटक भी रचा गया।
फाइलों में मजदूर और जमीन पर खाली खेत
सरकारी फाइलों में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक, यहां 30 और 31 मई को मजदूरों से काम कराया गया था। इसके लिए 180 मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टर रोल भी तैयार किए गए थे।
कागजों के इस खेल के जरिए अब तक 14 लाख 10 हजार रुपए की रकम निकाली जा चुकी थी। जब असलियत सामने आई, तो हर कोई हैरान रह गया। जमीन पर तालाब का कोई नामोनिशान नहीं था।
जांच करने पहुंचीं सीईओ तो खुली पोल
मजदूरों और ग्रामीणों ने इस फर्जीवाड़े की शिकायत बड़े अधिकारियों से कर दी। शिकायत मिलते ही जनपद पंचायत की सीईओ सुनीता शर्मा खुद जांच करने गांव पहुंचीं।
जब वे तय लोकेशन पर पहुंचीं, तो वहां कोई तालाब नहीं मिला। फाइलों में जिस जगह पानी से भरा तालाब होना चाहिए था, वहां केवल एक जुता हुआ खेत नजर आया। मौके पर एक भी मजदूर काम करता हुआ नहीं मिला।
इन दो प्रोजेक्ट में हुआ सबसे बड़ा खेल
पंचायत ने पहला फर्जीवाड़ा खसरा नंबर 709 की जमीन पर किया। यहां मुकुट सिंह के खेत के पास 14 लाख 88 हजार रुपए का तालाब मंजूर हुआ था। कागजों में 24 मई से खुदाई का काम भी शुरू दिखा दिया गया।
दूसरा घोटाला खसरा नंबर 567 पर मस्जिद के पास हुआ। यहां भी करीब 14 लाख 88 हजार रुपए की लागत से दूसरा तालाब बनना तय हुआ था। दोनों ही जगह पर बिना काम किए सरकारी बजट ठिकाने लगा दिया गया।
सरपंच और सचिव ने क्या तर्क दिए
इसकी पोलपट्टी के खुलने के बाद भी पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हैं। पंचायत सचिव श्याम सुंदर शर्मा ने तो जनपद सीईओ की जांच को ही झूठा करार दे दिया।
सचिव ने कहा कि मैडम को कुछ पता नहीं है, तालाब वहीं बने हैं। वहीं डोडरी के सरपंच सुरेश सिंह तोमर ने और भी मजेदार तर्क दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण उस जगह पर खेती कर लेते हैं, इसलिए वह खेत जैसा दिख रहा है।
पूर्व अधिकारियों पर भी लगे गंभीर आरोप
गांव के शिकायतकर्ता गौरव तोमर ने इस मामले में कई बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि इस पंचायत में बहुत लंबे समय से मनरेगा का घोटाला चल रहा है।
उन्होंने पहले के अधिकारियों से भी कई बार इसकी लिखित शिकायत की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि पोरसा के पूर्व सीईओ देवेंद्र जैन का सरपंच और सचिव को खुला संरक्षण मिला हुआ था। इसी वजह से यह धांधली लगातार चलती रही।
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