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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- मध्य प्रदेश में मनरेगा का 704 करोड़ रुपए बकाया है, भुगतान का इंतजार है।
- प्रधानमंत्री आवास योजना और ग्राम सड़क योजना का फंड खत्म हो चुका है।
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम में 94.92 करोड़ की राशि अतिशेष है।
- केंद्र से अतिरिक्त फंड की आवश्यकता, मनरेगा के मजदूरी भुगतान में देरी हो सकती है।
- पिछले वर्षों में मध्य प्रदेश को मनरेगा के लिए 6252.03 करोड़ रुपए मिले थे।
NEWS IN DETAIL
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय से ग्रामीण योजनाओं के फंड में भारी कमी आई है। प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य का पूरा फंड खर्च हो चुका है। इसके बावजूद राज्य में कई योजनाओं का काम आधे-अधूरे तरीके से चल रहा है।
केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के 704.64 करोड़ रुपए बकाया हैं। यह राशि मनरेगा (वीबी जीराम जी) में मजदूरी और सामग्री के लिए बकाया है। पिछले वर्ष 2024-25 में राज्य को केंद्र से 6252.03 करोड़ रुपए मिले थे, लेकिन इस बार यह राशि खत्म हो चुकी है।
यह पूरी जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यसभा में दी है। इन आंकड़ों से साफ है कि एमपी में केंद्र के बजट का योजनाओं के क्रियांवयन में खूब इस्तेमाल किया गया है। लेकिन मनरेगा का बजट खत्म होना चिंता का कारण बन सकता है।
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मनरेगा में बजट का संकट
मनरेगा, जो ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजना मानी जाती है, इस साल 704 करोड़ रुपए के बकाए का शिकार हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि इस रकम का भुगतान करने के लिए केंद्र से तुरंत अतिरिक्त फंड की जरूरत है। केंद्र से मनरेगा के तहत मजदूरी का 100% खर्च उठाया जाता है, लेकिन सामग्री का 25% हिस्सा राज्य को देना होता है।
राज्य में मनरेगा के स्टेट नोडल अकाउंट में शून्य राशि शेष है, जो यह दर्शाता है कि राज्य के पास फंड खत्म हो चुके हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले मजदूरों का भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है।
प्रधानमंत्री आवास और सड़क योजना की स्थिति
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत भी मध्य प्रदेश के पास कोई फंड नहीं बचा है। दोनों योजनाओं में राज्यों को केंद्र से किस्त मिलती है, जो अब पूरी तरह से खर्च हो चुकी है। यह इस बात का संकेत है कि राज्य ने इन योजनाओं का पूरा इस्तेमाल किया है और सभी लाभार्थियों के खातों में धन हस्तांतरित कर दिया गया है।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में उलझन
वहीं, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत मध्य प्रदेश में 9,492.49 लाख (लगभग 94.92 करोड़ रुपए) की राशि बची हुई है। यह राशि बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की पेंशन के लिए है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह राशि अभी तक अव्ययित पड़ी है और इसका सही उपयोग नहीं हो पाया है।
फंड का उपयोग और केंद्र-राज्य हिस्सेदारी
मध्य प्रदेश में फंड के उपयोग में तेजी से काम हो रहा है, लेकिन मनरेगा के ₹704 करोड़ के बकाए से ग्रामीण क्षेत्रों में समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। अगर केंद्र सरकार ने जल्द ही फंड जारी नहीं किया, तो मजदूरी भुगतान में देरी हो सकती है।
मध्य प्रदेश में पिछले 3 वर्षों में केंद्र से जारी मनरेगा का फंड निम्नलिखित रहा:
2024-25: ₹6,252.03 करोड़
2023-24: ₹5,891.65 करोड़
2022-23: ₹5,711.77 करोड़
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मध्य प्रदेश में योजनाओं का महत्व
इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि मध्य प्रदेश में योजनाओं के कार्य में कोई कमी नहीं है, लेकिन फंड की कमी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
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