मध्य प्रदेश में एक साथ 190 अधिकारियों का प्रमोशन, बने डिप्टी कलेक्टर
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में 190 अधिकारियों को डिप्टी कलेक्टर (Deputy Collector) बनाया गया है।
- सभी पहले तहसीलदार या प्रभारी डिप्टी कलेक्टर के पद पर थे।
- सामान्य प्रशासन विभाग ने 7 जुलाई को आदेश जारी किया।
- सभी की जिलेवार नई पदस्थापना भी तय कर दी गई है।
- यह पदोन्नति दो साल की परिवीक्षा अवधि के लिए होगी।
मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। विभाग ने राज्य के 190 तहसीलदारों और प्रभारी डिप्टी कलेक्टरों को पदोन्नति दी है। सभी अधिकारियों को राज्य प्रशासनिक सेवा की कनिष्ठ श्रेणी में पदोन्नत किया गया है।
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नया वेतनमान और ग्रेड
पदोन्नत अधिकारियों (MP GAD) को नया वेतनमान भी तय किया गया है। इसमें पे बैंड-3 यानी पीबी-3 (Pay Band-3) लागू होगा। वेतन सीमा 15600 से 39100 रुपए तय की गई है। साथ में 5400 रुपए ग्रेड पे भी जुड़ेगा। मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अनुसार यह पे-मैट्रिक्स लेवल-12 में आएगा। यानी पदोन्नति के साथ वेतन में भी बढ़ोतरी होगी।
कई जिलों में मिली नई जिम्मेदारी
अधिकतर अधिकारियों को उनके मौजूदा जिले में ही डिप्टी कलेक्टर बनाया गया है। जैसे विदिशा के तहसीलदार अजय पाठक अब वहीं डिप्टी कलेक्टर होंगे। शाजापुर के जगदीश वर्मा को भी अपने जिले में यही पद मिला है।
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में भी कई अफसर पदोन्नत हुए हैं। सागर, रतलाम, रीवा, सतना, खरगौन और बड़वानी के अधिकारी भी सूची में शामिल हैं। कुछ अधिकारियों को नए जिले में भी भेजा गया है।
मंत्रालय और सीएम कार्यालय में भी तैनाती
कुछ अधिकारी विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के तौर पर पहले से तैनात थे। इनमें से कई अब मुख्यमंत्री कार्यालय में भी यही जिम्मेदारी संभालेंगे। कुछ अधिकारी मंत्रियों के विशेष सहायक के पद पर भी काम कर रहे थे। इनकी पदस्थापना संबंधित मंत्री कार्यालय में बरकरार रखी गई है। जैसे किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग और पशुपालन विभाग में विशेष सहायक तैनात हैं। खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता विभाग में भी एक अधिकारी विशेष सहायक बने रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के मामले से जुड़ी शर्त
इस पदोन्नति के साथ एक अहम शर्त भी जोड़ी गई है। सभी पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक याचिका के अधीन रहेंगी। आदेश में कहा गया है कि भविष्य में कोर्ट का फैसला मान्य होगा। यानी अगर कोर्ट कोई नया निर्देश देता है तो उसका पालन जरूरी होगा। इसके अलावा उच्च न्यायालय के आदेशों का भी पालन करना होगा।
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