MP में 10 साल बाद खुला प्रमोशन का रास्ता, 15 जुलाई तक DPC, 31 तक पदोन्नति आदेश
Sanjay Dhiman | Jul 01, 2026, 17:45 IST
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मध्य प्रदेश। कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने सरकारी विभागों में सालों से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया को अब हरी झंडी दे दी है। 31 जुलाई तक प्रमोशन आदेश जारी होंगे।
मध्यप्रदेश में दस साल बाद पदोन्नति प्रक्रिया फिर शुरू हुई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने डीपीसी की पहली बैठक बुला ली है। सरकार ने 31 जुलाई तक प्रमोशन आदेश जारी करने का लक्ष्य रखा है। महाधिवक्ता की राय के बाद विभागों को निर्देश भेजे गए हैं। सात जुलाई को हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होगी।
मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया अब आगे बढ़ने लगी है। जीएडी समेत कई विभागों ने डीपीसी की बैठकें शुरू कर दी हैं। सरकार चाहती है कि हर विभाग समय पर काम पूरा करे।
सामान्य प्रशासन विभाग ने सोमवार को डीपीसी की बैठक बुलाई। इसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को फ्लोर सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति देने पर विचार हुआ। जमादार पद के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। यह कार्यवाही पूरे दस साल बाद शुरू हुई है।
इतने लंबे इंतजार के बाद कर्मचारियों में उम्मीद जगी है। कई कर्मचारी वर्षों से अपनी पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे। अब यह प्रक्रिया धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है।
एमपी लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत यह बैठक बुलाई गई है। इसके लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है। अपर सचिव सामान्य प्रशासन सुभाष द्विवेदी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
उपसचिव शैलेंद्र कुमार हनोतिया को स्थापना प्रतिनिधि सदस्य बनाया गया है। सचिन्द्र राव अवर सचिव जीएडी अनुसूचित जनजाति प्रतिनिधि होंगे। मनोज श्रीवास्तव अवर सचिव अधीक्षण जीएडी को संयोजक सदस्य की जिम्मेदारी मिली है। यह समिति पात्र कर्मचारियों के नामों पर विचार करेगी। मंजूरी के बाद ही पदोन्नति आदेश जारी होंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिवों को पत्र भेजा है। विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को भी यही निर्देश मिला है। सभी को प्रमोशन प्रक्रिया जल्द शुरू करने को कहा गया है।
यह निर्देश महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर दिया गया है। सरकार ने यह कदम एक अहम न्यायिक प्रक्रिया के बीच उठाया है। एमपी लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने अपनी राय भेजी है। उनके अनुसार हाईकोर्ट ने पदोन्नति नियम-2025 पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। पहले सुनवाई के दौरान सरकार ने पदोन्नति न करने का आश्वासन दिया था।
लेकिन यह आश्वासन कोर्ट के आदेश का हिस्सा नहीं बना। न ही यह न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। अब मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए जा रहा है। इसलिए सरकार अपने अधिकारों का उपयोग कर सकती है।
सरकार ने सभी विभागों को साफ समयसीमा दी है। 15 जुलाई तक डीपीसी की बैठकें पूरी करनी होंगी। इसके बाद पदोन्नति सूची तैयार की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि 31 जुलाई तक आदेश जारी हो जाएं। इससे हजारों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिल सकता है। हालांकि अंतिम फैसला हाईकोर्ट की सुनवाई पर भी निर्भर करेगा।
सामान्य पिछड़ा वर्ग अधिकारी कर्मचारी संगठन यानी स्पीक (SPEAK) ने सवाल उठाए हैं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. केएस तोमर ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। तोमर का कहना है कि सरकार ने पदोन्नति न देने की अंडरटेकिंग दी थी। इसके बाद वकील से यह लिखवा लिया गया कि अब कोई रोक नहीं है। उन्होंने एक तीखा सवाल भी उठाया। अगर रोक नहीं थी, तो 2016 से 2025 तक कर्मचारी रिटायर क्यों होते रहे। इन्हें पदोन्नति क्यों नहीं दी गई।
तोमर ने चेतावनी दी है कि सुनवाई शुरू होते ही स्टे मांगा जाएगा। इसे कोर्ट की अवमानना बताते हुए विरोध दर्ज कराया जाएगा। संगठन ने आज मुख्य सचिव को ज्ञापन भी सौंपा है।
प्रमोशन में आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर सात जुलाई से नई सुनवाई शुरू होगी। हाईकोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस की बैंच इसे सुनेगी। यह इस मामले की पहली सुनवाई होगी।
डॉ. तोमर ने कहा कि इस दिन फैसले का पुरजोर विरोध किया जाएगा। स्पीक की मांग है कि फैसला आने तक पदोन्नति आदेशों पर रोक लगे। अब सबकी नजर सात जुलाई की सुनवाई पर टिकी है।
आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। पदोन्नति का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों की निगाहें अब कोर्ट पर हैं।
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मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया अब आगे बढ़ने लगी है। जीएडी समेत कई विभागों ने डीपीसी की बैठकें शुरू कर दी हैं। सरकार चाहती है कि हर विभाग समय पर काम पूरा करे।
दस साल बाद शुरुआत
इतने लंबे इंतजार के बाद कर्मचारियों में उम्मीद जगी है। कई कर्मचारी वर्षों से अपनी पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे। अब यह प्रक्रिया धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है।
डीपीसी समिति गठित
उपसचिव शैलेंद्र कुमार हनोतिया को स्थापना प्रतिनिधि सदस्य बनाया गया है। सचिन्द्र राव अवर सचिव जीएडी अनुसूचित जनजाति प्रतिनिधि होंगे। मनोज श्रीवास्तव अवर सचिव अधीक्षण जीएडी को संयोजक सदस्य की जिम्मेदारी मिली है। यह समिति पात्र कर्मचारियों के नामों पर विचार करेगी। मंजूरी के बाद ही पदोन्नति आदेश जारी होंगे।
सभी विभागों को निर्देश
यह निर्देश महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर दिया गया है। सरकार ने यह कदम एक अहम न्यायिक प्रक्रिया के बीच उठाया है। एमपी लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा है।
महाधिवक्ता की राय
लेकिन यह आश्वासन कोर्ट के आदेश का हिस्सा नहीं बना। न ही यह न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। अब मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए जा रहा है। इसलिए सरकार अपने अधिकारों का उपयोग कर सकती है।
31 जुलाई का लक्ष्य
स्पीक के सवाल
तोमर ने चेतावनी दी है कि सुनवाई शुरू होते ही स्टे मांगा जाएगा। इसे कोर्ट की अवमानना बताते हुए विरोध दर्ज कराया जाएगा। संगठन ने आज मुख्य सचिव को ज्ञापन भी सौंपा है।
7 जुलाई को सुनवाई
डॉ. तोमर ने कहा कि इस दिन फैसले का पुरजोर विरोध किया जाएगा। स्पीक की मांग है कि फैसला आने तक पदोन्नति आदेशों पर रोक लगे। अब सबकी नजर सात जुलाई की सुनवाई पर टिकी है।
आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। पदोन्नति का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों की निगाहें अब कोर्ट पर हैं।
FAQ
- मध्यप्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया कब शुरू हुई है?
दस साल बाद यह प्रक्रिया फिर शुरू हुई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने डीपीसी की पहली बैठक बुलाई है। सरकार 31 जुलाई तक आदेश जारी करना चाहती है। - पदोन्नति आदेश कब तक जारी हो सकते हैं?
सरकार ने 31 जुलाई तक की समयसीमा तय की है। इससे पहले 15 जुलाई तक सभी डीपीसी बैठकें पूरी करनी होंगी। इसके बाद पदोन्नति सूची तैयार होगी। - हाईकोर्ट में इस मामले पर कब सुनवाई होगी?
सात जुलाई को हाईकोर्ट में सुनवाई तय है। कार्यकारी चीफ जस्टिस की बैंच इसे सुनेगी। स्पीक संगठन इसमें विरोध दर्ज कराएगा।
MP प्रमोशन: हाई कोर्ट में केस चलते हुए भी सशर्त मिल सकती है पदोन्नति!
प्रमोशन में आरक्षण : एक्टिंग चीफ जस्टिस की बेंच ने मेंशनिंग स्वीकार की, दोबारा शुरू होगी सुनवाई
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