MP में आदिवासी वोटों को लेकर सियासी हलचल तेज! BJP का 66 और कांग्रेस का 90 सीटों पर फोकस

Ramanand Tiwari | Oct 29, 2026, 21:19 IST
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आदिवासी वोटों के लिए MP में BJP-कांग्रेस की नई रणनीति।
आदिवासी वोटों के लिए MP में BJP-कांग्रेस की नई रणनीति।

मध्यप्रदेश में आदिवासी वोटों को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने नई तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव में हारी हुई 66 सीटों पर संगठन मजबूत करना चाहती है। वहीं, कांग्रेस ने आदिवासी प्रभाव वाली 90 सीटों पर अलग रणनीति बनाई है। दोनों दल मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी में हैं। इस बीच जल, जंगल, जमीन, रोजगार और वन अधिकार जैसे मुद्दे भी अहम बने हुए हैं।

आदिवासी वोटों पर भाजपा-कांग्रेस का फोकस

मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। इनमें 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। हालांकि, आदिवासी मतदाताओं का असर केवल इन सीटों तक सीमित नहीं है। कई सामान्य सीटों पर भी आदिवासी वोट चुनाव नतीजों को प्रभावित करते हैं।

भाजपा ने उन इलाकों पर ध्यान देना शुरू किया है, जहां पिछले चुनाव में उसे हार मिली थी। पार्टी कमजोर बूथों की पहचान कर रही है। वहीं, कांग्रेस आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के जरिए मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने की योजना बना रही है।

2023 के चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 230 में से 163 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 66 सीटें मिली थीं। सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।

आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीटों में भाजपा को 24 और कांग्रेस को 22 सीटें मिली थीं। एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई थी।

इन नतीजों से पता चलता है कि प्रदेश में बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद भाजपा को सभी आदिवासी सीटों पर सफलता नहीं मिली थी। दूसरी ओर कांग्रेस भी 2018 के चुनाव में मिली बढ़त कायम नहीं रख सकी थी।

भाजपा की नजर कांग्रेस की जीती हुई 66 सीटों पर

भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते में गई 66 सीटों की समीक्षा शुरू की है। इनमें 35 सामान्य, 22 अनुसूचित जनजाति और नौ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें शामिल हैं।

पार्टी इन क्षेत्रों में अपनी हार के कारणों और संगठन की कमजोरियों को समझने की कोशिश कर रही है। इसके लिए Booth Management और स्थानीय स्तर पर मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

2023 में कांग्रेस ने जीती थीं ये 35 सामान्य सीटें

मध्यप्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 35 सामान्य सीटों पर जीत हासिल की थी। इनमें सुसनेर, बालाघाट, परसवाड़ा, वारासिवनी, अटेर, भोपाल मध्य, भोपाल उत्तर, मलहरा, छिंदवाड़ा, चौरई, सौंसर, दतिया, बदनावर, बमोरी, राघौगढ़, ग्वालियर पूर्व और ग्वालियर ग्रामीण शामिल हैं।

इसके अलावा कांग्रेस ने हरदा, कसरावद, मंदसौर, जौरा, मुरैना, सिलवानी, सेमरिया, अमरपाटन, सतना, केवलारी, श्योपुर, विजयपुर, पोहरी, चुरहट, खरगापुर, पृथ्वीपुर, टीकमगढ़ और महिदपुर सीटों पर भी जीत दर्ज की थी।

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मध्यप्रदेश विधानसभा में अब कागजों की जगह डिजिटल सिस्टम से काम करने की तैयारी है। इसके लिए विधायकों को डिजिटल ट्रेनिंग दी जा रही है। लेकिन दो दिनों में विधायकों से ज्यादा उनके निजी सहायक (PA) ट्रेनिंग लेने पहुंचे हैं। अब तक 59 विधायकों और 89 निजी सहायकों ने ट्रेनिंग ली है। तीन दिन की इस कार्यशाला का आखिरी दिन 30 अक्टूबर है।
मध्यप्रदेश विधानसभा में अब कागजों की जगह डिजिटल सिस्टम से काम करने की तैयारी है। इसके लिए विधायकों को डिजिटल ट्रेनिंग दी जा रही है। लेकिन दो दिनों में विधायकों से ज्यादा उनके निजी सहायक (PA) ट्रेनिंग लेने पहुंचे हैं। अब तक 59 विधायकों और 89 निजी सहायकों ने ट्रेनिंग ली है। तीन दिन की इस कार्यशाला का आखिरी दिन 30 अक्टूबर है।

अनुसूचित जनजाति की इन 22 सीटों पर जीती थी कांग्रेस

मध्यप्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जीत हासिल की थी। इनमें जोबट, पुष्पराजगढ़, बड़वानी, राजपुर, सेंधवा, अमरवाड़ा, जुन्नारदेव, पांढुर्णा, गंधवानी, कुक्षी, मनावर और सरदारपुर शामिल हैं।

इसके अलावा कांग्रेस ने डिंडोरी, टिमरनी, झाबुआ, थांदला, भगवानपुरा, भीकनगांव, बिछिया, निवास, लखनादौन और बैहर सीटों पर भी जीत दर्ज की थी।

अनुसूचित जाति की इन नौ सीटों पर मिली थी जीत

मध्यप्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित 9 सीटों पर जीत हासिल की थी। इनमें अशोकनगर, गोहद, परासिया, भांडेर, डबरा, जबलपुर पूर्व, अंबाह, बीना और तराना शामिल हैं।

हालांकि, ये आंकड़े 2023 के विधानसभा चुनाव के हैं। इसके बाद कुछ सीटों पर स्थिति बदल चुकी है। उदाहरण के लिए, अमरवाड़ा सीट पर 2023 में कांग्रेस जीती थी, लेकिन 2024 के उपचुनाव में भाजपा ने यह सीट जीत ली। इसलिए इस सूची को मौजूदा विधायकों की स्थिति नहीं माना जा सकता।

भाजपा कमजोर बूथों पर बढ़ाएगी सक्रियता

भाजपा की Election Strategy में बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करना प्रमुख है। पार्टी उन क्षेत्रों में ज्यादा सक्रियता बढ़ाना चाहती है, जहां पिछले चुनाव में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा था।

हालांकि, आदिवासी क्षेत्रों में केवल चुनावी संपर्क ही मुद्दा नहीं है। सड़क, पीने का पानी, स्कूल, अस्पताल और वन अधिकार जैसी समस्याएं भी महत्वपूर्ण हैं। भाजपा सत्ता में है। ऐसे में इन क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों का असर भी उसके लिए महत्वपूर्ण होगा।

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कांग्रेस ने आदिवासी प्रभाव वाली 90 सीटें चुनीं

कांग्रेस ने आदिवासी मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए 90 विधानसभा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। इनमें 47 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें और 43 अन्य आदिवासी प्रभाव वाली सीटें शामिल हैं। इस योजना की रूपरेखा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अध्यक्षता वाली समिति ने तैयार की है।

कांग्रेस इन सीटों पर मंडलम, सेक्टर और बूथ स्तर के पदाधिकारियों को सक्रिय करेगी। इसके लिए कार्यशालाएं आयोजित करने और गांवों में चौपाल लगाने की तैयारी है।

पार्टी जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों को प्रमुख मुद्दा बनाने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि, इन मुद्दों पर कांग्रेस के पिछले काम और स्थानीय लोगों की शिकायतों का समाधान भी महत्वपूर्ण होगा।

कांग्रेस की चुनी 90 सीटों पर भाजपा ने जीती थीं 59 सीटें

कांग्रेस ने जिन 90 विधानसभा क्षेत्रों को अपनी रणनीति में शामिल किया है, वहां 2023 के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा था। इन 90 सीटों में भाजपा ने 59, कांग्रेस ने 30 और भारत आदिवासी पार्टी ने एक सीट जीती थी।

ऐसे में कांग्रेस के सामने इन क्षेत्रों में अपना संगठन मजबूत करने और भाजपा के मतदाताओं तक पहुंच बनाने की चुनौती है। कांग्रेस ने इन सीटों के लिए अलग Political Strategy तैयार की है। इसमें स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

भाजपा की 66 और कांग्रेस की 90 सीटों में क्या अंतर है?

दोनों पार्टियों की रणनीति में सीटों की संख्या अलग होने के साथ उनका आधार भी अलग है। भाजपा की 66 सीटें वे हैं, जहां 2023 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इनमें सामान्य, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीटें शामिल हैं।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने 90 सीटों का चयन आदिवासी मतदाताओं के प्रभाव के आधार पर किया है। इनमें 47 आरक्षित और 43 अन्य सीटें हैं। यानी भाजपा पिछली हार वाली सीटों पर ध्यान दे रही है, जबकि कांग्रेस ने आदिवासी मतदाताओं को ध्यान में रखकर अपने चुनावी क्षेत्र चुने हैं।

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आदिवासी क्षेत्रों में दोनों दलों के सामने चुनौती

मध्यप्रदेश में आदिवासी मतदाता भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। दोनों पार्टियां संगठन मजबूत करने के साथ गांवों में अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। लेकिन आदिवासी क्षेत्रों में वन अधिकार, जमीन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं भी हैं।

भाजपा को अपनी सरकार के कामकाज और योजनाओं का हिसाब देना होगा। वहीं, कांग्रेस को बताना होगा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए उसकी क्या योजना है। आने वाले विधानसभा चुनाव में दोनों दलों की तैयारी के साथ इन मुद्दों पर उनका काम भी महत्वपूर्ण होगा।
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