सूरजपुर पुलिस परिवार हत्याकांड: दोषियों को फांसी दो, मुझे बनाओ जल्लाद... संघ अध्यक्ष का सीएम-गृहमंत्री को पत्र
Umeshwari Baghel | Oct 29, 2026, 18:49 IST
सूरजपुर हत्याकांड में फांसी की मांग, पुलिस संघ अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान ने बिना पैसे जल्लाद बनने का प्रस्ताव दिया।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर हत्याकांड में पुलिस संघ अध्यक्ष ने फांसी की मांग की है। उन्होंने तीन लोगों को मृत्युदंड देने के लिए सरकार को पत्र लिखा है। संघ अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान ने खुद जल्लाद बनने की इच्छा भी जताई है। दीवान ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र भेजकर यह प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि वह इस काम के बदले कोई पैसा नहीं लेंगे।
हालांकि, उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत ही जिम्मेदारी निभाने की बात कही है।
सूरजपुर पुलिस परिवार हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस बार चर्चा पुलिस संघ अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान के पत्र को लेकर है। उन्होंने इस मामले में तीन लोगों को फांसी देने की मांग की है।
दीवान संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष हैं। उन्होंने पत्र में पुलिसकर्मियों के परिवारों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार को कानून के अनुसार न्याय मिलना चाहिए।
संघ अध्यक्ष ने अपने पत्र में तीन लोगों का नाम लिया है। इनमें कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू विश्वकर्मा शामिल हैं। दीवान ने तीनों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी लगातार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं। वे लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी ड्यूटी करते हैं। इसलिए उनके परिवारों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।
दीवान के मुताबिक, पुलिस परिवारों के खिलाफ गंभीर अपराधों में न्याय मिलना जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मामले में आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।
सूरजपुर हत्याकांड में उज्ज्वल दीवान का एक प्रस्ताव चर्चा का विषय बना है। उन्होंने फांसी की सजा लागू कराने के लिए खुद जल्लाद बनने की इच्छा जताई है।
दीवान ने साफ किया कि वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे। सक्षम अधिकारी जिम्मेदारी सौंपेंगे, तभी वह यह काम करना चाहेंगे। इसके बदले वह कोई पारिश्रमिक भी नहीं लेंगे। इस तरह उन्होंने बिना पैसे जल्लाद बनने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है।
दीवान का प्रस्ताव किसी भी व्यक्ति को सीधे फांसी देने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने खुद भी इस जिम्मेदारी के लिए कानूनी मंजूरी की शर्त रखी है।
किसी मृत्युदंड पर अमल करने के लिए निर्धारित नियम होते हैं। संबंधित अधिकारियों को इन नियमों का पालन करना पड़ता है। केवल इच्छा जताने से किसी व्यक्ति को जल्लाद नहीं बनाया जा सकता।
उज्ज्वल दीवान ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर अपनी मांग रखी है। उन्होंने सूरजपुर पुलिस परिवार हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने की अपील की है।
पत्र में मृत्युदंड की मांग के साथ उनका व्यक्तिगत प्रस्ताव भी शामिल है। उन्होंने कहा कि अनुमति मिलने पर वह बिना पारिश्रमिक काम करेंगे।
फिलहाल सरकार की ओर से इस पत्र पर कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि दीवान के प्रस्ताव पर कोई निर्णय हुआ है।
दीवान ने पत्र में पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने पुलिस विभाग के कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा पर जोर दिया है।
उनका कहना है कि पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान अनेक चुनौतियों का सामना करते हैं। लोगों की सुरक्षा करते समय उन्हें कई कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।
इसी वजह से उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान भी महत्वपूर्ण है। दीवान ने सरकार से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
किसी व्यक्ति को मृत्युदंड देने का फैसला अदालत की कानूनी प्रक्रिया से होता है। सरकार को भेजा गया पत्र अपने आप किसी व्यक्ति की सजा तय नहीं करता।
मृत्युदंड पर अमल करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। इसके बाद संबंधित जेल नियमों और अधिकृत व्यवस्था का पालन किया जाता है।
जल्लाद की जिम्मेदारी किसी व्यक्ति को केवल उसके प्रस्ताव के आधार पर नहीं मिलती। इसके लिए संबंधित नियमों के अनुसार अनुमति और अधिकृत नियुक्ति जरूरी है। उज्ज्वल दीवान ने भी अपने प्रस्ताव को इसी कानूनी प्रक्रिया से जोड़ा है। उन्होंने बिना अनुमति कोई जिम्मेदारी निभाने की बात नहीं कही है।
सूरजपुर हत्याकांड में उज्ज्वल दीवान का पत्र चर्चा का विषय बना है। छत्तीसगढ़ पुलिस से जुड़े इस घटनाक्रम में फांसी की मांग प्रमुख है।अब सवाल है कि सरकार उनके पत्र पर क्या फैसला लेगी। क्या उनके जल्लाद बनने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाएगा?
फिलहाल दोनों सवालों पर कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। दीवान ने अपनी मांग और प्रस्ताव सरकार के सामने रख दिए हैं। आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और सक्षम अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगी।
सूरजपुर पुलिस परिवार हत्याकांड में उठी यह मांग दो महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ी है। पहला मुद्दा पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा का है। दूसरा मुद्दा अपराध के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के पालन का है। भारतीय संविधान में जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण महत्वपूर्ण अधिकार है। मृत्युदंड जैसा फैसला केवल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से ही लागू किया जा सकता है। उज्ज्वल दीवान का पत्र इसी कानूनी व्यवस्था और पुलिस परिवारों की सुरक्षा पर चर्चा का कारण बना है।
सवाल 1. सूरजपुर हत्याकांड में फांसी की मांग किसने की है?
जवाब: संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान ने मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र भेजा है।
सवाल 2. उज्ज्वल दीवान ने जल्लाद बनने का प्रस्ताव क्यों दिया है?
जवाब: दीवान ने मृत्युदंड पर कानूनी तरीके से अमल कराने के लिए प्रस्ताव रखा है। उन्होंने बिना पारिश्रमिक यह जिम्मेदारी निभाने की इच्छा जताई है।
सवाल 3. क्या उज्ज्वल दीवान को जल्लाद बनाया जा सकता है?
जवाब: इसके लिए कानूनी नियमों के तहत अनुमति और अधिकृत नियुक्ति आवश्यक होगी। केवल इच्छा जताने से किसी व्यक्ति को यह जिम्मेदारी नहीं मिलती।
सूरजपुर हत्याकांड में फांसी की मांग
दीवान संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष हैं। उन्होंने पत्र में पुलिसकर्मियों के परिवारों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार को कानून के अनुसार न्याय मिलना चाहिए।
समझें क्या है पूरा मामला
- छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में पुलिस परिवार हत्याकांड हुआ था।
- इस मामले में तीन लोगों के नाम सामने आए हैं।
- उज्ज्वल दीवान ने तीनों को मृत्युदंड देने की मांग की है।
- उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र भेजा है।
- दीवान ने बिना पैसे जल्लाद बनने का प्रस्ताव भी रखा है।
तीन लोगों के नाम लेकर रखी मांग
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी लगातार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं। वे लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी ड्यूटी करते हैं। इसलिए उनके परिवारों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।
दीवान के मुताबिक, पुलिस परिवारों के खिलाफ गंभीर अपराधों में न्याय मिलना जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मामले में आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।
उज्ज्वल दीवान ने दिया अनोखा प्रस्ताव
दीवान ने साफ किया कि वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे। सक्षम अधिकारी जिम्मेदारी सौंपेंगे, तभी वह यह काम करना चाहेंगे। इसके बदले वह कोई पारिश्रमिक भी नहीं लेंगे। इस तरह उन्होंने बिना पैसे जल्लाद बनने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है।
कानूनी अनुमति मिलने पर ही करेंगे काम
किसी मृत्युदंड पर अमल करने के लिए निर्धारित नियम होते हैं। संबंधित अधिकारियों को इन नियमों का पालन करना पड़ता है। केवल इच्छा जताने से किसी व्यक्ति को जल्लाद नहीं बनाया जा सकता।
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र
पत्र में मृत्युदंड की मांग के साथ उनका व्यक्तिगत प्रस्ताव भी शामिल है। उन्होंने कहा कि अनुमति मिलने पर वह बिना पारिश्रमिक काम करेंगे।
फिलहाल सरकार की ओर से इस पत्र पर कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि दीवान के प्रस्ताव पर कोई निर्णय हुआ है।
पुलिस परिवारों की सुरक्षा का मुद्दा
उनका कहना है कि पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान अनेक चुनौतियों का सामना करते हैं। लोगों की सुरक्षा करते समय उन्हें कई कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।
इसी वजह से उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान भी महत्वपूर्ण है। दीवान ने सरकार से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
फांसी देने का फैसला कौन करेगा?
मृत्युदंड पर अमल करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। इसके बाद संबंधित जेल नियमों और अधिकृत व्यवस्था का पालन किया जाता है।
जल्लाद बनने के लिए क्या जरूरी है?
अब सरकार के जवाब का इंतजार
फिलहाल दोनों सवालों पर कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। दीवान ने अपनी मांग और प्रस्ताव सरकार के सामने रख दिए हैं। आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और सक्षम अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगी।
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQ
जवाब: संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान ने मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र भेजा है।
सवाल 2. उज्ज्वल दीवान ने जल्लाद बनने का प्रस्ताव क्यों दिया है?
जवाब: दीवान ने मृत्युदंड पर कानूनी तरीके से अमल कराने के लिए प्रस्ताव रखा है। उन्होंने बिना पारिश्रमिक यह जिम्मेदारी निभाने की इच्छा जताई है।
सवाल 3. क्या उज्ज्वल दीवान को जल्लाद बनाया जा सकता है?
जवाब: इसके लिए कानूनी नियमों के तहत अनुमति और अधिकृत नियुक्ति आवश्यक होगी। केवल इच्छा जताने से किसी व्यक्ति को यह जिम्मेदारी नहीं मिलती।
नियद नेल्ला नार योजना 2.0: बस्तर के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से मिल रही आत्मनिर्भरता की नई राह
By The Sootr
पन्ना में सरकारी जमीन पर 74 प्लॉट काटने का आरोप, पूर्व कमिश्नर मुकेश शुक्ला ने पलटा था कलेक्टर का आदेश, मामला हाईकोर्ट में
By Neel Tiwari
जयपुर की 112 ग्राम पंचायतों में चुनाव कल, 413 बूथों पर होगा मतदान, नामांकन की प्रक्रिया आज हुई पूरी
By Ashish Bhardwaj
सब इंस्पेक्टर भर्ती 2016 पर हाई कोर्ट सख्त, कहा- 50 फीसदी आरक्षण सीमा का सख्ती से पालन करे सरकार
By Mukesh Sharma
मध्यप्रदेश में किसानों की हेल्पलाइन खुद हेल्पलेस! एक पर जवाब नहीं, दूसरा नंबर बंद
By Atul Dwivedi
छत्तीसगढ़ में 116 नेताओं की सुरक्षा घटाने की तैयारी, केदार कश्यप और दीपक बैज समेत कई बड़े नाम शामिल
By Umeshwari Baghel
जयपुर नगर निगम में एक पद पर दो अधिकारी, हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के 14 दिन बाद भी नहीं सुलझा विवाद
By Raghvendra Singh Rathore