पन्ना में सरकारी जमीन पर 74 प्लॉट काटने का आरोप
पन्ना में सरकारी जमीन पर 74 प्लॉट काटने का आरोप, पूर्व कमिश्नर मुकेश शुक्ला ने पलटा था कलेक्टर का आदेश, मामला हाईकोर्ट में
Neel Tiwari | Oct 29, 2026, 18:10 IST
पन्ना में 5.10 एकड़ सरकारी जमीन पर 74 प्लॉट काटने का आरोप, मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
पन्ना में 5.10 एकड़ सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है। इस जमीन पर करीब 74 प्लॉट काटने का आरोप है। दोबारा जांच के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ। तत्कालीन कमिश्नर मुकेश शुक्ला ने कलेक्टर का आदेश पलट दिया। राजस्व बोर्ड ने भी आदेश की समीक्षा की अनुमति नहीं दी। अब हाई कोर्ट ने विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
हाई कोर्ट पहुंचा प्लॉट का मामला
अब शिकायतकर्ता योगेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। हाई कोर्ट ने विवादित जमीन और प्लॉटों पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास महावर ने पक्ष रखा।
सबसे पहले समझिए, जमीन का विवाद आखिर है क्या?
इस मामले में कॉलोनाइजर अब्दुल सलीम पर नियमों के उल्लंघन का आरोप है। अब्दुल सलीम के पिता का नाम अब्दुल वहीद है। आरोप है कि उन्होंने इस जमीन पर अवैध कॉलोनी विकसित की। यहां करीब 74 से 75 आवासीय प्लॉट काटकर बेचने का आरोप है।
जांच संबंधी विवरण के अनुसार, जमीन मूल रूप से शासकीय पट्टे पर दी गई थी। बाद में यह मध्यप्रदेश सरकार के नाम दर्ज थी। आरोप है कि अब्दुल सलीम ने बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति जमीन खरीदी। इसके लिए दो अलग-अलग विक्रय पत्रों और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। इनमें 0.519, 1.557 और 0.621 हेक्टेयर जैसे भूमि क्षेत्र शामिल बताए गए हैं। आरोप है कि इनकी खरीद के लिए कलेक्टर की अनुमति भी नहीं ली गई।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, कॉलोनी विकसित करने में संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं हुआ। इनमें नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के प्रावधान शामिल हैं। मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 सी और 339 डी भी संबंधित हैं। भू-राजस्व संहिता की धारा 165(7-ख) और कॉलोनाइजर एक्ट के उल्लंघन का भी आरोप है।
पन्ना जमीन विवाद
कलेक्टर ने जांच के बाद आवंटन और नामांतरण रद्द किया
कलेक्टर ने पूरी जमीन मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज करने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों को कॉलोनाइजर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए भी कहा गया। इसके बाद पन्ना कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई। याचिका के मुताबिक, जांच में जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण और नामांतरण की जानकारी सामने आई। हालांकि, कॉलोनाइजर ने कलेक्टर के फैसले को चुनौती दे दी।
तत्कालीन कमिश्नर मुकेश शुक्ला ने पलटा कलेक्टर का फैसला
आरोप है कि जरूरी राजस्व रिकॉर्ड की पर्याप्त जांच किए बिना फैसला लिया गया। प्रभावित पक्षों को भी सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं देने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों और कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कॉलोनाइजर को राहत मिली। अब कमिश्नर के इसी आदेश की वैधता को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
शिकायत पर दोबारा जांच, पुराने रिकॉर्ड पर फिर सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, जांच में जमीन के पट्टे और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल हुई। संबंधित दावों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले। इसके बाद कमिश्नर के पुराने फैसले पर फिर सवाल उठने लगे। शिकायतकर्ता ने पूछा कि बिना स्पष्ट रिकॉर्ड के कलेक्टर का आदेश कैसे पलटा गया।
कलेक्टर ने कमिश्नर से आदेश की समीक्षा करने को कहा
राजस्व बोर्ड ने समीक्षा की अनुमति नहीं दी
हाई कोर्ट ने शासन को कार्रवाई के लिए दिया था समय
अब हाई कोर्ट ने लगाया स्टे
मामले का यह है सबसे बड़ा सवाल
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