सीएम मोहन यादव ने किया था हेल्पलाइन का शुभारंभ
मध्यप्रदेश में किसानों की हेल्पलाइन खुद हेल्पलेस! एक पर जवाब नहीं, दूसरा नंबर बंद
Atul Dwivedi | Oct 29, 2026, 17:52 IST
मोहन सरकार की किसान हेल्पलाइन का हाल बेहाल!
हमारा मध्यप्रदेश मदद करने के मामले में हमेशा आगे रहता है। किसी भी वर्ग को कोई भी मदद चाहिए, यहां तुरंत एक हेल्पलाइन नंबर जारी हो जाता है। लेकिन ध्यान रखिए हेल्पलाइन नंबर पर हेल्प मिलेगी या नहीं, इसकी गारंटी नहीं है। वो इसलिए क्योंकि मध्यप्रदेश में मोहन सरकार ने किसानों के लिए सीएम किसान हेल्पलाइन और औषधीय पौधों की खेती के लिए हेल्पलाइन शुरू की थी।
द सूत्र ने इन्हीं दोनों हेल्पलाइन्स की पड़ताल की है। हमने पता किया कि क्या वाकई इन हेल्पलाइन्स से किसानों को फायदा हो रहा है या नहीं? क्या हेल्पलाइन नंबर चालू भी है या नहीं? सीएम मोहन यादव ने जिस हेल्पलाइन को शुरू किया था, 6 महीने बाद उसकी क्या स्थिति है? पढ़िए हमारी यह खास रिपोर्ट।
द सूत्र ने अपनी इस पड़ताल में सबसे पहले सीएम किसान हेल्पलाइन, जिसका नंबर 155253 है, पर फोन किया। फोन करते ही सेंटर पर मौजूद ऑपरेटर ने हमारा फोन उठाया। इसके बाद उसने हमसे पूछा कि हम किस जिले से बात कर रहे हैं और क्या मदद चाहते हैं? द सूत्र रिपोर्टर ने कहा कि वो भोपाल की बैरसिया तहसील से बात कर रहा है। रिपोर्टर ने सवाल पूछा कि उसे गेहूं नहीं लगाना है। गेहूं की जगह किसी और फसल को लगाना चाहता है, तो कौन-सी फसल इस मौसम में उपयुक्त होगी?
ऑपरेटर ने लगभग 2 मिनट हमें होल्ड पर रखा और सारा डेटा खंगाला। इसके बाद उसने कहा कि उसके पास फिलहाल यह जानकारी नहीं है कि कौन-सी फसल इस मौसम में लगाई जा सकती है। उसने हमसे कहा कि वो हमारे सवाल को विशेषज्ञों के पास भेजेगा, वहां से जो जवाब आएगा तब हमें बताया जाएगा। हमने यह भी पूछा कि जवाब कब तक आएगा, इसका उसने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। रिपोर्टर ने यह भी पूछा कि क्या फूल की खेती करना ठीक होगा? इसका जवाब भी अटेंडर के पास नहीं था। उसने बस यही कहा कि विशेषज्ञों से बात करने के बाद ही वो कुछ कह पाएगा।
जब इस हेल्पलाइन को शुरू किया गया था, तब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद फोन करके टेस्ट लिया था। मुख्यमंत्री ने सवाल किया था कि उन्हें गर्मी के मौसम में तीसरी फसल लेनी है, तो कौन-सी फसल लगानी चाहिए? उस वक्त भी ऑपरेटर ने यही जवाब दिया था कि उसके पास जानकारी मौजूद नहीं है।
ऐसे में सवाल उठता है कि छह महीने बीत चुके हैं, ऐसे में सीएम किसान हेल्पलाइन कर क्या रही है? जब ऑपरेटर के पास किसी सवाल का जवाब होता ही नहीं तो किसानों को फायदा कैसे होगा? जनता के पैसों से शुरू की जाने वाली यह हेल्पलाइन, जहां सैकड़ों लोग काम करते हैं, पूरा सेटअप जमाया जाता है, वो लोग कर क्या रहे हैं? क्यों जनता के पैसों को इस तरह पानी में बहाया जा रहा है?
इस हेल्पलाइन का शुभारंभ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 30 अप्रैल 2026 को किया था। भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण प्रशिक्षण एवं कार्यशाला कार्यक्रम में इसका शुभारंभ हुआ था। इसका मकसद साफ था- किसानों को खाद, बीज, फसल, मौसम, सरकारी सब्सिडी और खेती से जुड़ी दूसरी जानकारी देना।
मध्यप्रदेश सरकार ने औषधीय पौधों की खरीदारी के लिए भी हेल्पलाइन नंबर 155258 शुरू किया था। लेकिन जब द सूत्र के रिपोर्टर ने इस नंबर पर कॉल किया, तो फोन लगा ही नहीं। बार-बार कॉल करने पर भी नंबर बंद बताया गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 10वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर इस हेल्पलाइन की शुरुआत की थी। इसका मकसद किसानों, जनजातीय इलाकों और जंगलों में रहने वाले समुदायों को औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती में मदद देना था। लेकिन द सूत्र की पड़ताल में दोनों हेल्पलाइन लोगों की मदद करने में नाकाम नजर आईं।
मध्यप्रदेश में लोगों की मदद के लिए 6 अलग-अलग कैटेगरी की हेल्पलाइन चल रही हैं। यदि किसी को सरकारी विभाग से शिकायत है, तो वह सीएम हेल्पलाइन 181 पर कॉल कर सकता है। वोटर से जुड़ी जानकारी के लिए 1950 नंबर है। किसी आपात स्थिति में 112 और एंबुलेंस बुलाने के लिए 108 पर कॉल किया जा सकता है।
महिला सुरक्षा के लिए 1090 और बच्चों की मदद के लिए 1098 हेल्पलाइन है। साइबर ठगी की शिकायत 1930 पर की जा सकती है। किसानों की मदद के लिए सीएम किसान हेल्पलाइन 155253 और औषधीय पौधों की खेती की जानकारी के लिए 155258 नंबर दिया गया है। वहीं, बिजली से जुड़ी शिकायतों के लिए 1912 हेल्पलाइन है।
सीएम किसान हेल्पलाइन
ऑपरेटर ने लगभग 2 मिनट हमें होल्ड पर रखा और सारा डेटा खंगाला। इसके बाद उसने कहा कि उसके पास फिलहाल यह जानकारी नहीं है कि कौन-सी फसल इस मौसम में लगाई जा सकती है। उसने हमसे कहा कि वो हमारे सवाल को विशेषज्ञों के पास भेजेगा, वहां से जो जवाब आएगा तब हमें बताया जाएगा। हमने यह भी पूछा कि जवाब कब तक आएगा, इसका उसने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। रिपोर्टर ने यह भी पूछा कि क्या फूल की खेती करना ठीक होगा? इसका जवाब भी अटेंडर के पास नहीं था। उसने बस यही कहा कि विशेषज्ञों से बात करने के बाद ही वो कुछ कह पाएगा।
सीएम को भी नहीं दिया था जवाब
ऐसे में सवाल उठता है कि छह महीने बीत चुके हैं, ऐसे में सीएम किसान हेल्पलाइन कर क्या रही है? जब ऑपरेटर के पास किसी सवाल का जवाब होता ही नहीं तो किसानों को फायदा कैसे होगा? जनता के पैसों से शुरू की जाने वाली यह हेल्पलाइन, जहां सैकड़ों लोग काम करते हैं, पूरा सेटअप जमाया जाता है, वो लोग कर क्या रहे हैं? क्यों जनता के पैसों को इस तरह पानी में बहाया जा रहा है?
कब हुआ था शुभारंभ?
औषधीय पौधों की खेती के लिए हेल्पलाइन
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 10वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर इस हेल्पलाइन की शुरुआत की थी। इसका मकसद किसानों, जनजातीय इलाकों और जंगलों में रहने वाले समुदायों को औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती में मदद देना था। लेकिन द सूत्र की पड़ताल में दोनों हेल्पलाइन लोगों की मदद करने में नाकाम नजर आईं।
मध्यप्रदेश में कितनी तरह की हेल्पलाइन्स
महिला सुरक्षा के लिए 1090 और बच्चों की मदद के लिए 1098 हेल्पलाइन है। साइबर ठगी की शिकायत 1930 पर की जा सकती है। किसानों की मदद के लिए सीएम किसान हेल्पलाइन 155253 और औषधीय पौधों की खेती की जानकारी के लिए 155258 नंबर दिया गया है। वहीं, बिजली से जुड़ी शिकायतों के लिए 1912 हेल्पलाइन है।
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