मध्यप्रदेश में मंत्रियों का बदलेगा प्रभार! दिसंबर में जिलों की अदला-बदली, मंत्रिमंडल विस्तार के लिए करना होगा इंतजार

Aman Vaishnav | Oct 29, 2026, 09:22 IST
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MP Politics: मंत्रियों के प्रभार वाले जिले बदलने की तैयारी, मंत्रिमंडल विस्तार पर नए साल में फैसला
MP Politics: मंत्रियों के प्रभार वाले जिले बदलने की तैयारी, मंत्रिमंडल विस्तार पर नए साल में फैसला

मध्यप्रदेश में कई मंत्रियों को प्रभार वाले जिलों तक पहुंचने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। अब सरकार इस दूरी को कम करने की तैयारी में है। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर के पहले पखवाड़े तक नई व्यवस्था लागू हो सकती है। वहीं मंत्रिमंडल विस्तार पर नए साल में चर्चा होगी।

तीन प्रस्ताव भेजे, एक को मिली मंजूरी

मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्रीय संगठन को तीन प्रस्ताव भेजे थे। इनमें मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) मंत्रियों के विभागों में बदलाव और प्रभार वाले जिलों को बदलने का प्रस्ताव शामिल था।

फिलहाल केंद्रीय संगठन से सिर्फ प्रभार वाले जिलों में बदलाव को हरी झंडी मिली है। विभागों में फेरबदल और मंत्रिमंडल विस्तार पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

किन मंत्रियों के बदल सकते हैं जिले?

सूत्रों के मुताबिक जिन मंत्रियों के प्रभार वाले जिले उनके गृह जिले से काफी दूर हैं, उनके जिलों में बदलाव किया जा सकता है। पार्टी संगठन इसको लेकर पहले ही तैयारी कर चुका है। मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) के पास भी मंत्रियों के पिछले एक साल के कामकाज की रिपोर्ट है। ऐसे में प्रभार वाले जिलों का फेरबदल इस रिपोर्ट और दूरी को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।

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मध्यप्रदेश की खाली राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार को लेकर लंबे समय से बना सस्पेंस अब खत्म हो गया है। बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को इस सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने उनके नाम का ऐलान किया है। बता दें कि 13 अक्टूबर को एल. मुरुगन ने इस सीट से इस्तीफा दे दिया था।
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मंत्रियों की शिकायत संगठन तक पहुंची

प्रभार वाले जिलों में बदलाव के पीछे एक और वजह सामने आई है। हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक शिकायत पहुंची है कि कई मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में नियमित दौरे नहीं कर रहे हैं। कुछ मंत्री जिलों में रात भी नहीं रुकते। स्थानीय कार्यकर्ताओं के घर भोजन करने जैसी गतिविधियां भी कम हो गई हैं। इससे जिला स्तर के पार्टी पदाधिकारियों में नाराजगी है।

इसकी जानकारी प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी को भी दी गई है।

कौन सा मंत्री अपने प्रभार वाले जिले से कितना दूर?

मंत्रियों के गृह जिलों और प्रभार वाले जिलों की दूरी देखें तो कई मंत्रियों को लंबा सफर करना पड़ता है।

कैलाश विजयवर्गीय: इनके पास धार और सतना जिलों का प्रभार है। गृह जिला इंदौर से सतना की दूरी करीब 650 किलोमीटर है।

संपतिया उइके: इनके प्रभार में आलीराजपुर और सिंगरौली जिले हैं। मंडला से आलीराजपुर की दूरी करीब 761 किलोमीटर है।

करण सिंह वर्मा: इन्हें मुरैना और सिवनी का प्रभार मिला है। सीहोर से मुरैना 452 किलोमीटर और सिवनी 416 किलोमीटर दूर है।

नागर सिंह चौहान: इनके पास उमरिया और आगर मालवा जिलों की जिम्मेदारी है। आलीराजपुर से उमरिया की दूरी करीब 887 किलोमीटर है।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर: ये पांढुर्ना और शिवपुरी के प्रभारी मंत्री हैं। ग्वालियर से पांढुर्ना की दूरी करीब 675 किलोमीटर है।

प्रहलाद पटेल: इनके पास भिंड और रीवा जिलों का प्रभार है। नरसिंहपुर से भिंड 527 किलोमीटर और रीवा 280 किलोमीटर दूर है। दोनों जिले अलग-अलग दिशाओं में हैं।

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला: ये सागर और शहडोल के प्रभारी मंत्री हैं। रीवा से सागर की दूरी करीब 335 किलोमीटर है।

डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा: इनके पास देवास और जबलपुर जिलों का प्रभार है। मंदसौर से जबलपुर की दूरी करीब 650 किलोमीटर है।

नए साल में हो सकती है मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा

फिलहाल सरकार की प्राथमिकता मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव करना है। सूत्रों के अनुसार यह प्रक्रिया दिसंबर के पहले 15 दिनों में पूरी की जा सकती है। इसके बाद नए साल में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बदलाव पर चर्चा होगी। हालांकि किन मंत्रियों को कौन से नए जिले मिलेंगे इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

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