रसोई का बजट बिगड़ा : छत्तीसगढ़ में 30 से 40 रुपए तक महंगी हुई चावल की कई किस्में, जानें ताजा भाव

Umeshwari Baghel | Oct 29, 2026, 20:04 IST
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<br>छत्तीसगढ़ में चावल की कई किस्मों के दाम 20 से 40 रुपए प्रति किलो तक बढ़े।
छत्तीसगढ़ में चावल की कई किस्मों के दाम 20 से 40 रुपए प्रति किलो तक बढ़े।

छत्तीसगढ़ में चावल की कई लोकप्रिय किस्में 20 से 40 रुपए किलो महंगी हुई हैं। भिलाई और दुर्ग के बाजारों में इसका असर साफ दिख रहा है। कभी 70 रुपए में मिलने वाला अब्बा हुजूर चावल अब 110 रुपए किलो है। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। फिर यहां चावल इतना महंगा क्यों हो रहा है? इसकी वजह दूसरे राज्यों से आने वाली सप्लाई बताई जा रही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भिलाई और दुर्ग में चावल की कई किस्मों के दाम बढ़े हैं।
  • जीरा राइस 90 से बढ़कर 120 रुपए किलो पहुंच गया है।
  • काली मूंछ चावल अब 85 रुपए किलो बिक रहा है।
  • जय श्रीराम चावल की कीमत 62 से 100 रुपए हुई है।
  • अब्बा हुजूर चावल 70 से बढ़कर 110 रुपए किलो पहुंच गया है।

कौन सा चावल कितना महंगा हुआ

भिलाई और दुर्ग के बाजारों में चावल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। अलग-अलग किस्मों पर 20 से 40 रुपए किलो तक का असर पड़ा है। इससे बारीक चावल खरीदने वाले परिवारों का खर्च बढ़ गया है।

अब्बा हुजूर चावल 110 रुपए किलो

अब्बा हुजूर चावल पहले 70 रुपए प्रति किलो मिलता था। अब इसकी कीमत 110 रुपए किलो पहुंच गई है। यानी एक किलो पर 40 रुपए ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं।

जय श्रीराम चावल में 38 रुपए की तेजी

जय श्रीराम चावल पहले 62 रुपए किलो मिल रहा था। अब इसका भाव 100 रुपए किलो हो गया है। यानी इसकी कीमत में 38 रुपए प्रति किलो बढ़ोतरी हुई है।

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कोटा में सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील के लिए आवंटित 3213 क्विंटल गेहूं और चावल की कमी का मामला सामने आया है। इसमें 1844 क्विंटल गेहूं और 1369 क्विंटल चावल शामिल हैं। खाद्यान्न की कीमत सरकारी दर पर करीब 81 लाख रुपये और बाजार भाव के अनुसार 1.10 करोड़ रुपये तक बताई गई है।

काली मूंछ चावल भी हुआ महंगा

काली मूंछ चावल का भाव पहले 65 रुपए किलो था। अब इसके लिए 85 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं, जीरा राइस 90 से बढ़कर 120 रुपए किलो पहुंचा है। ये भाव भिलाई और दुर्ग के बाजारों से सामने आए हैं। अलग-अलग दुकानों पर कीमतें अलग हो सकती हैं।

छत्तीसगढ़ में चावल महंगा क्यों

छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है। इसके बावजूद सभी प्रकार का चावल प्रदेश में तैयार नहीं होता। यहां मोटे और मध्यम धान की खेती ज्यादा होती है।

बारीक और खुशबूदार चावल की कई किस्में दूसरे राज्यों से आती हैं। इनमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल शामिल हैं। व्यापारियों के मुताबिक, इन राज्यों से चावल की आवक प्रभावित हुई है। यही वजह है कि स्थानीय बाजारों में कीमतों का दबाव बढ़ा है।

बारिश और बाढ़ से सप्लाई प्रभावित

व्यापारियों ने बेमौसम बारिश और बाढ़ को भी कीमत बढ़ने की वजह बताया है। उनके मुताबिक, दूसरे राज्यों में धान की फसल प्रभावित हुई है। इससे बाजार में चावल की उपलब्धता कम हुई है। हालांकि, फसल के नुकसान के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। सप्लाई कितनी कम हुई है, इसकी भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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त्योहारी सीजन की शुरुआत में ही आम आदमी को महंगाई की तिहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। सितंबर में खुदरा महंगाई दर 5.54% और थोक महंगाई दर 11.39% पर पहुंच गई है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 7.74% होने से रोजमर्रा की रसोई का बजट भी बिगड़ गया है। रसोई के 42 सामानों में से 41 के दाम बीते एक साल में बहुत बढ़ चुके हैं।

परिवारों पर कितना अतिरिक्त बोझ

सोचिए एक बार। आपका परिवार हर महीने 25 किलो चावल खरीदता है। पसंदीदा चावल 30 रुपए किलो महंगा होने पर कितना खर्च बढ़ेगा?

इस स्थिति में हर महीने 750 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। सालभर में यह रकम 9 हजार रुपए हो जाएगी। यह हिसाब केवल चावल की बढ़ी कीमत पर आधारित है।

महंगा चावल बिगाड़ रहा बजट

छत्तीसगढ़ चावल की कीमत बढ़ने से रोजाना का घरेलू खर्च प्रभावित हो सकता है। खासकर उन परिवारों पर असर है, जो बारीक चावल खरीदते हैं। उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ चावल की कीमत से जुड़ी यह बढ़ोतरी स्थानीय बाजारों में दिख रही है। वहीं, भिलाई-दुर्ग के सामने आए आकड़ो में भी तेजी हैं। हालांकि, सभी प्रकार के चावल के दाम समान रूप से नहीं बढ़े हैं।

बाहर के चावल पर निर्भरता क्यों

छत्तीसगढ़ के लोगों की पसंद अलग-अलग है। कुछ परिवार बारीक चावल खाते हैं। वहीं, कुछ लोगों को खुशबूदार और मुलायम चावल पसंद है। दूसरे राज्यों से आने वाला चावल इस मांग को पूरा करता है। इसलिए स्थानीय धान उत्पादन ज्यादा होने के बावजूद बाहर से चावल मंगाना पड़ता है।


बारीक धान की खेती बढ़ाने की मांग

भिलाई के राशन दुकान संचालक विजय राठी ने स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की जरूरत बताई है। उनके मुताबिक, किसानों को बारीक और सुगंधित धान की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

इसके लिए बेहतर बीज और आधुनिक खेती की तकनीक जरूरी है। किसानों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी जरूरत बताई गई है।

स्थानीय उत्पादन बढ़ने से दूसरे राज्यों पर निर्भरता घट सकती है। परिवहन खर्च में भी कमी आ सकती है। हालांकि, कीमतों पर असर उत्पादन लागत और बाजार की स्थिति तय करेगी।

आगे चावल के दाम घटेंगे या बढ़ेंगे

भिलाई और दुर्ग के व्यापारी अब दूसरे राज्यों से आने वाली खेप पर नजर रखे हैं। आवक सामान्य होने पर कीमतों का दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर, कम सप्लाई रहने पर महंगे चावल खरीदने वालों की परेशानी बनी रह सकती है। फिलहाल कीमतें कब तक सामान्य होंगी, इसकी निश्चित जानकारी नहीं है।


यह खबर क्यों जरूरी है

छत्तीसगढ़ में चावल बड़ी आबादी के भोजन का प्रमुख हिस्सा है। भिलाई और दुर्ग में लोकप्रिय किस्मों की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर परिवारों के राशन बजट पर पड़ सकता है। हर महीने 25 किलो चावल खरीदने वाले परिवार को 750 रुपए ज्यादा देने पड़ सकते हैं। यह स्थिति स्थानीय कृषि उत्पादन की अहमियत भी बताती है। बारीक धान की खेती बढ़ाने से बाहरी राज्यों पर निर्भरता घट सकती है। हालांकि, उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत बाजार की कीमतों पर निर्भर करेगी।

FAQ

सवाल 1. छत्तीसगढ़ में चावल कितना महंगा हुआ है?

जवाब: भिलाई और दुर्ग में कई लोकप्रिय किस्में 20 से 40 रुपए किलो महंगी हुई हैं। अब्बा हुजूर चावल में सबसे ज्यादा 40 रुपए की बढ़ोतरी सामने आई है।

सवाल 2. छत्तीसगढ़ में चावल की कीमत क्यों बढ़ रही है?

जवाब: व्यापारियों ने दूसरे राज्यों से कम सप्लाई को इसकी वजह बताया है। बारिश और बाढ़ से फसल प्रभावित होने की बात भी कही गई है।

सवाल 3. क्या आने वाले दिनों में चावल सस्ता होगा?

जवाब: फिलहाल इसका निश्चित अनुमान उपलब्ध नहीं है। दूसरे राज्यों से सप्लाई सामान्य होने पर कीमतों का दबाव कम हो सकता है।
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