27 फीसदी OBC आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची मध्य प्रदेश सरकार, स्पेशल लीव पिटिशन दायर

Sumit Kumar | Oct 16, 2026, 21:38 IST
मध्य प्रदेश सरकार ने 27% OBC आरक्षण से जुड़े आशिता दुबे मामले में सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की है।
मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को OBC महासभा के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद यह कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार मामले को टालने के बजाय उसका समाधान निकालने के लिए काम कर रही है।
Madhya Pradesh government filed special leave petition Supreme Court 27% OBC reservation case.

आशिता दुबे मामले में सरकार ने दी चुनौती

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 9 अक्टूबर 2026 के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, महाधिवक्ता कार्यालय ने शुक्रवार शाम ‘स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश विरुद्ध आशिता दुबे एवं अन्य’ मामले में स्पेशल लीव पिटिशन यानी SLP दाखिल की।



याचिका का डायरी नंबर 65767/2026 है। यह 16 अक्टूबर को शाम 5:45 बजे सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज हुई। फिलहाल सुनवाई की तारीख और बेंच तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है।



सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार बनाम आशिता दुबे मामले में दायर SLP का विवरण।

मुख्यमंत्री बोले- मुद्दा टालना नहीं, समाधान निकालना उद्देश्य

शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में OBC महासभा के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का विषय महत्वपूर्ण है और सरकार इस वर्ग के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार न्यायसंगत और तार्किक व्यवस्था बनाने के लिए प्रयास कर रही है। उनके मुताबिक, सरकार इस विषय को टालने के लिए काम नहीं कर रही है। उसका उद्देश्य उचित समाधान निकालना है। उन्होंने OBC आरक्षण को लेकर सरकार की नीति और नीयत स्पष्ट होने की बात भी कही।



सर्वदलीय बैठक और संगठनों से बातचीत के बाद लिया गया फैसला

मुख्यमंत्री ने बताया कि आरक्षण के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई थी। OBC संगठनों से भी बातचीत की गई और हाई कोर्ट में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा गया था।



उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद उसका बिंदुवार अध्ययन करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष प्रभावी तरीके से रखने को कहा गया था। इसी क्रम में अब याचिका दाखिल की गई है।



आंकड़ों के आधार पर समाधान की मांग

OBC महासभा के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर हाई कोर्ट के फैसले से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने अद्यतन आंकड़ों के आधार पर संवैधानिक समाधान निकालने और OBC अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने की मांग की।



बैठक में दिल्ली और ग्वालियर से आए प्रतिनिधिमंडलों ने अपने-अपने पक्ष रखे। OBC महासभा दिल्ली के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एडवोकेट वैभव सिंह और इंजीनियर महेंद्र सिंह लोधी ने किया।



ग्वालियर के प्रतिनिधिमंडल में महासभा के संस्थापक विजय कुमार, प्रदेश प्रभारी जीतू लोधी और प्रदेशाध्यक्ष गिरिराज धाकड़ के नेतृत्व में प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी।



क्या होती है विशेष अनुमति याचिका?

स्पेशल लीव पिटिशन को हिंदी में विशेष अनुमति याचिका कहते हैं। इसके जरिए किसी अदालत या न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की विशेष अनुमति मांगी जाती है।



संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत यह अनुमति देना सुप्रीम कोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है। अनुमति मिलने के बाद SLP अपील में बदलती है। इसलिए याचिका दाखिल होने और अपील की अनुमति मिलने में अंतर है।



अब सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्यवाही पर नजर

याचिका दाखिल होने के बाद अब मामले के सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने का इंतजार है। कॉज लिस्ट से सुनवाई की तारीख और संबंधित बेंच की जानकारी स्पष्ट होगी।



फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी अंतरिम राहत या स्थगन आदेश की पुष्टि नहीं है। सरकार ने याचिका में किन आधारों पर फैसले को चुनौती दी है और क्या राहत मांगी है, इसका विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है।

Tags:
  • MP OBC Reservation
  • Supreme Court
  • Special Leave Petition
  • MP Government SLP
  • Ashita Dubey Case
  • ओबीसी
  • सुप्रीम कोर्ट
  • OBC आरक्षण