साफ दिखने वाला पानी भी कम खतरनाक नहीं, MP के 39 जिलों के जल में जहर

The Sootr | Jan 08, 2026, 16:07 IST
mp 39 districts water
एमपी में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ने से पीने का पानी सुरक्षित नहीं रहा। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, 39 जिलों में नाइट्रेट स्तर मानक से अधिक पाया गया है।

BHOPAL. साफ दिखने वाला पानी भी खतरनाक हो सकता है। जी हां, सही पढ़ा है आपने। प्रदेश का भूजल यूं तो साफ दिखता है, लेकिन इसमें नाइट्रेट की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। यह स्थिति आने वाले समय में बड़े जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। केंद्र सरकार की एक स्टडी ने साफ कर दिया है कि मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पीने का पानी सुरक्षित नहीं रह गया है।



केंद्र सरकार के इस अध्ययन के अनुसार, मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से 39 जिलों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा तय मानक से ज्यादा पाई गई है। इस लिस्ट में इंदौर भी शामिल है, जहां हाल ही में गंदे पानी की वजह से 20 लोगों की मौत हुई है।



रिपोर्ट के मुताबिक, भूजल में नाइट्रेट की अधिकता के मामले में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश के बाद पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। यह आंकड़ा अपने आप में चिंताजनक है। यह रिपोर्ट अगस्त 2025 में केंद्र सरकार ने साझा की थी। अध्ययन का आधार वार्षिक ग्राउंड वॉटर क्वालिटी रिपोर्ट 2024 है, जिसमें राज्यवार भूजल में मौजूद प्रमुख प्रदूषकों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि जिन इलाकों में पीने के पानी में नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है, वहां इंसानों के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। इसका सबसे गंभीर असर नवजात और छोटे बच्चों पर पड़ता है, जिनकी जान तक खतरे में आ सकती है।



ये भी पढ़ें...भागीरथपुरा में स्वास्थ्य सर्वे की जमीनी हकीकत, हजारों घरों के सर्वे का दावा, जहां 20 से अधिक मरीज वहां पर ही नहीं पहुंची टीम



MP के इन जिलों में स्थिति खराब

रिपोर्ट के अनुसार जिन 39 जिलों में एक या अधिक स्थानों पर नाइट्रेट का स्तर खतरनाक पाया गया है, उनमें इंदौर, आगर मालवा, अनूपपुर, बालाघाट, बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, दतिया, देवास, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, जबलपुर, झाबुआ, कटनी, खंडवा, खरगोन, मंडला, मंदसौर, मुरैना, नरसिंहपुर, नीमच, पन्ना, राजगढ़, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, शहडोल, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, सीधी, टीकमगढ़, उज्जैन और उमरिया जिला शामिल हैं।



ये भी पढ़ें...इंदौर भागीरथपुरा कांड: मौतों पर बोले सीएम, सरकार हर परिवार के साथ



सीवेज पहुंच रहा जमीन में

रिपोर्ट में साफ किया गया है कि कई इलाकों में खराब सीवेज निपटान व्यवस्था और सेप्टिक टैंकों से हो रहा रिसाव जमीन में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ा रहा है। इसके साथ ही तेजी से बढ़ता शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन भूजल के पुनर्भरण को कम कर रहा है। जब भूजल का स्तर ठीक से नहीं भर पाता तो नाइट्रेट की सांद्रता और ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे हालात और गंभीर हो जाते हैं।



खेती भी इस समस्या की बड़ी वजह बन रही है। स्टडी के अनुसार धान और गेहूं जैसी फसलों में लंबे समय से रासायनिक उर्वरकों का भारी उपयोग किया जा रहा है। ये उर्वरक धीरे-धीरे जमीन के रास्ते भूजल में पहुंचकर नाइट्रेट की मात्रा बढ़ा देते हैं। वर्षों से चल रही यह प्रक्रिया अब खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है।



इंदौर की दर्दनाक घटना के बाद यह रिपोर्ट मध्यप्रदेश के लिए साफ चेतावनी है। अगर समय रहते भूजल की गुणवत्ता सुधारने, सीवेज प्रबंधन दुरुस्त करने और खेती में रसायनों के संतुलित उपयोग पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट आने वाले दिनों में कई जिलों में आम लोगों की सेहत और जिंदगी पर सीधा असर डाल सकता है।



ये भी पढ़ें...भागीरथपुरा कांड-दूषित पानी से और दो लोगों की मौत, मृतक संख्या हुई 20



पानी में ज्यादा नाइट्रेट कितना नुकसानदेह

पानी में नाइट्रेट की मात्रा तय सीमा से ज्यादा होना स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पीने के पानी में नाइट्रेट की सुरक्षित सीमा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर मानी जाती है। इससे अधिक मात्रा लंबे समय तक शरीर को नुकसान पहुंचाती है।



शरीर पर असर कैसे होता है?

नाइट्रेट शरीर में पहुंचकर नाइट्राइट में बदल जाता है। यह खून में मौजूद हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम कर देता है। नतीजा यह होता है कि शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।



बड़ा खतरा बच्चों के लिए

नवजात और छोटे बच्चों में ज्यादा नाइट्रेट से ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ हो सकता है। इसमें बच्चे की त्वचा नीली पड़ने लगती है, सांस लेने में दिक्कत होती है और समय पर इलाज न मिले तो जान भी जा सकती है।



ये भी पढ़ें...भागीरथपुरा कांड में हाईकोर्ट ने CS से मांगा जवाब, याचिकाकर्ता बोले- नए IAS आ रहे, जो इंदौर को समझ रहे चारागाह



बड़ों में दिखने वाले नुकसान

लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द, सांस फूलना और दिल-दिमाग तक ऑक्सीजन की कमी इसके आम लक्षण हैं। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से पाचन तंत्र भी प्रभावित हो सकता है।



गर्भवतियों के लिए खतरा

ज्यादा नाइट्रेट वाला पानी गर्भ में पल रहे बच्चे तक ऑक्सीजन की सप्लाई को प्रभावित कर सकता है। इससे समय से पहले प्रसव और कम वजन के बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ जाता है।



लंबे समय के खतरे

विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक नाइट्रेट युक्त पानी पीने से कुछ कैंसरकारी तत्व बनने का खतरा भी बढ़ सकता है। साथ ही लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।



खुद को कैसे सुरक्षित रखें

पीने के पानी की नियमित जांच कराएं। नाइट्रेट ज्यादा होने पर आरओ या नाइट्रेट रिमूवल फिल्टर का इस्तेमाल करें। नवजात बच्चों के लिए संदिग्ध पानी से बना दूध या फॉर्मूला न दें और सरकारी या प्रमाणित जल स्रोतों को प्राथमिकता दें।





Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • केंद्र सरकार
  • उत्तरप्रदेश
  • दूषित पानी
  • भागीरथपुरा
  • भागीरथपुरा कांड