भागीरथपुरा कांड में हाईकोर्ट ने CS से मांगा जवाब, याचिकाकर्ता बोले- नए IAS आ रहे, जो इंदौर को समझ रहे चारागाह

भागीरथपुरा में गंदे पानी से 17 लोगों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने 6 जनवरी को सुनवाई की है। मामले में एचसी ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा है।

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Sanjay Gupta
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INDORE: भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई 17 मौतों को लेकर इंदौर हाईकोर्ट की बेंच ने मंगलवार 6 जनवरी को 40 मिनट तक सुनवाई की। सुनवाई कई याचिकाओं पर हुई है। इस सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मुख्य सचिव अनुराग जैन से कई सवाल पूछे हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि साफ पानी हर इंसान का मौलिक अधिकार है। यह सिर्फ इंदौर का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का है।

हाईकोर्ट ने यह दिए अंतरिम आदेश

हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने आदेश दिया कि प्रभावित इलाके में साफ पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाए। दूषित पानी को रोका जाए और जो लोग प्रभावित हुए हैं उनका बेहतर इलाज (भागीरथपुरा कांड) किया जाए। इसके अलावा, अगली सुनवाई पर मौतों के सही आंकड़े भी पूछे गए हैं और एक विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।

जांच कमेटी बनाने पर विचार करेगी हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं पर बहस कर रहे वरिष्ठ वकीलों जैसे अजय बागड़िया, रितेष ईनानी, मनीष यादव, अभिनव धनोतकर, विभोर खंडेलवाल और अन्य को सुना। इस दौरान कई गंभीर मुद्दे उठाए गए। इसके बाद हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव अनुराग जैन से पूरे प्रदेश में साफ पानी से जुड़ी योजनाओं, भागीरथपुरा की स्थिति रिपोर्ट, दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल केस और अन्य मुद्दों पर जवाब मांगा है।

इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी, और सीएस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी बात रखेंगे। बेंच ने कहा कि शासन का पक्ष सुनने के बाद इस मामले में उच्च स्तर पर कमेटी बनाने की मांग पर फैसला लिया जाएगा। वकील धनोतकर ने रिटायर जस्टिस की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की मांग की है।

नए IAS नियुक्ति से लेकर टेंडर रुकने का मामला

  • बागड़िया ने इसमें गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शासन नए नवेले आईएएस को इंदौर में भेज रही है। यह इंदौर को चारागाह समझते हैं और अपना हिस्सा लेकर चले जाते हैं।
  • अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। भागीरथपुरा में पानी लाइन डालने का 2.38 करोड़ का काम नवंबर 2022 में प्रस्ताव पास हो चुका था। लेकिन यह फाइल आईएएस के पास रुकी रही। टेंडर नहीं खोले गए। इसके चलते यह हादसा हुआ। हालत यह है कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव को कहना पड़ रहा कि अधिकारी सुनते नहीं हैं।
  • साल 2017-18 में पानी के सैंपल की रिपोर्ट पूरे इंदौर की प्रदूषण बोर्ड ने दी थी। इसमें 60 में 59 सैंपल इंदौर के फेल हुए थे। तब बोर्ड ने इंदौर नगर निगम को चेताया था लेकिन कुछ नहीं किया गया।
  • सीएम और मेयर हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों को क्लोज एंड कंप्लेंट बताया गया।
  • अधिवक्ता यादव और धनोतकर ने कहा कि अधिकारियों पर क्रिमिनल एक्शन होना चाहिए, केवल सस्पेंड करने से क्या होगा। यह सिलसिला इसी तरह चलता रहेगा।
  • यादव ने कहा कि निगम की वाटर सैंपल लैब है लेकिन यहां कोई काम नहीं होता और हर माह 10 लाख रुपए का खर्च है।

मौतों का सही आंकड़ा क्यों नहीं आ रहा

अधिवक्ताओं ने यह बात भी उठाई कि अभी तक मौतों का सही आंकड़ा नहीं बताया गया है। वहीं पार्षद कमल वाघेला खुद 15 मौत बोल चुके हैं। उधर न्यूज में 17 मौतें हैं। इस पर भी हाईकोर्ट ने आपत्ति ली।

वहीं मांग की गई कि कोविड बुलेटिन की तरह इसकी भी जानकारी जारी की जाए। वहीं अधिवक्ता खंडेलवाल ने कहा कि फेक न्यूज चल रही है इसे रोका जाए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि कलेक्टर शिवम वर्मा इस संबंध में संज्ञान लें कि फेक न्यूज नहीं हो।

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