एमपी में तीन महीने में उखड़ी 44 करोड़ रुपए की सड़क, विधायक राजेश वर्मा ने उठाए सवाल
News in Short
- पन्ना जिले में 44 करोड़ की सड़क निर्माण कार्य तीन महीने में उखड़ने लगी।
- निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की आशंका और अधिकारियों पर आरोप लगाए गए।
- विधायक राजेश वर्मा ने विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
- जबलपुर की जयसवाल कंपनी को ठेका मिला था, गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां आईं।
- सड़क केंद्रीय सीआरएफ फंड से स्वीकृत थी, बावजूद इसके गुणवत्ता पर सवाल उठे।
News in Detail
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सकरिया से दीघोरा तक करीब 29 किलोमीटर लंबी सड़क, जिसकी लागत 44 करोड़ रुपए से अधिक है। ये सड़क तीन महीने में उखड़ने लगी है। इस पर निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं।
निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार !
यह मामला इतना गंभीर हो गया कि गुनौर से भाजपा विधायक राजेश वर्मा को विधानसभा से लेकर लोक निर्माण मंत्रालय तक शिकायत पत्र भेजना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदार को क्लीन चिट दी। इसके साथ ही निर्माण पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया।
ठेकेदार और अधिकारियों पर आरोप
बताया जा रहा है कि जबलपुर की जयसवाल कंपनी ने इस सड़क का ठेका लिया था। निर्माण के दौरान भी विधायक और सांसद ने गुणवत्ता को लेकर कई बार आपत्ति जताई थी। दिशा बैठक में भी सांसद द्वारा अधिकारियों को फटकार लगाई गई थी। लेकिन इसके बाद केवल औपचारिक मरम्मत कर मामले को दबाने की कोशिश की गई।
विधायक का गुस्सा फूटा
एक बार फिर सड़क खराब होने पर विधायक का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों और ठेकेदार की क्लास लगाते हुए चेतावनी दी कि इस मामले को वे विधानसभा में उठा चुके हैं। अब सीधे मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोषी अधिकारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाता है।
सड़क सीआरएफ फंड से स्वीकृत
यह सड़क केंद्र सरकार के सीआरएफ (CRF) फंड से स्वीकृत हुई थी, जिसे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मंजूरी के बाद बनाया गया। सांसद विष्णु दत्त शर्मा और विधायक के प्रयासों से यह परियोजना स्वीकृत हुई थी। बावजूद इसके, निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
क्या है CRF?
केंद्रीय सड़क अवसंरचना कोष (CRIF), जिसे पहले केंद्रीय सड़क निधि (CRF) कहा जाता था, एक विशेष कोष है। यह भारत सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए उपकर से एकत्र किया जाता है। इसका उद्देश्य राज्य की सड़कों, प्रमुख जिला सड़कों और अंतर-राज्यीय सड़कों के निर्माण, सुधार और रखरखाव के लिए वित्तपोषण प्रदान करना है।
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