एमपी के पांच हजार प्राइमरी टीचर की नौकरी खतरे में, प्लेन बीएड ने डाल दिया पंगा
मध्य प्रदेश के करीब 5 हजार प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बीएड आधार से भर्ती इन शिक्षकों को एनआईओएस का छह माह का ब्रिज कोर्स करना होगा। तय समय में कोर्स और परीक्षा पास नहीं की तो सेवाएं समाप्त हो सकती हैं।
एमपी में कहां से शुरू हुआ पूरा मामला
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, क्यों बदला नियम
11 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश दिया था। इसमें साफ किया गया कि प्राइमरी में पढ़ाने के लिए अलग पात्रता जरूरी है। अदालत ने कहा कि इस तारीख के बाद प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ बीएड के आधार पर भर्ती मान्य नहीं होगी। यानी, जिन्होंने बीएड से जॉब ली है, उन्हें अब अतिरिक्त योग्यता भी साबित करनी होगी।
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पहले 5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
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अब ब्रिज कोर्स क्यों, कौन कराएगा
लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों को नए निर्देश भेजे हैं। इसके तहत संबंधित शिक्षकों को एनआईओएस के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग ही यह ब्रिज कोर्स कराएगा। कोर्स की अवधि छह माह तय की गई है, जो पूरी तरह प्राइमरी शिक्षण पर आधारित होगी।
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रजिस्ट्रेशन से सर्टिफिकेट तक पूरी टाइमलाइन
जिलों को तय समय में ऐसे सभी शिक्षकों का डेटा तैयार कर अपलोड करना है। एनआईओएस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 25 दिसंबर रखी गई है। शिक्षकों को छह माह में कोर्स पूरा कर परीक्षा देनी होगी। इसके बाद एक साल के भीतर पासिंग सर्टिफिकेट जमा कराना अनिवार्य है।
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पास नहीं हुए तो क्या सीधे जाएगी नौकरी
लोक शिक्षण के संचालक स्तर से साफ संदेश गया है। समय पर कोर्स पूरा न करने या परीक्षा में फेल होने पर सेवा समाप्त की जा सकती है। बीएड के आधार पर भर्ती प्राइमरी शिक्षकों को अब खुद अपनी नौकरी बचानी होगी। सरकार इसे गुणवत्ता सुधार और कोर्ट आदेश पालन के रूप में देख रही है।
5 हजार टीचरों पर सीधा असर
जो शिक्षक सालों से प्राइमरी में पढ़ा रहे हैं, उन्हें अब फिर से किताबें उठानी होंगी। कई के लिए यह मौका स्किल अपग्रेड जैसा होगा, पर दबाव भी रहेगा। शालाओं में बच्चों पर सीधा असर न पड़े, इसके लिए विभाग को प्लान बनाना होगा। कोर्स, ट्रेनिंग और क्लासरूम ड्यूटी में संतुलन बड़ा मुद्दा बनेगा।
जिलों को क्या-क्या करने हैं काम
हर जिले में लोक शिक्षण अधिकारी को पूरी सूची तैयार करनी है। किस स्कूल में कितने बीएड आधार वाले प्राइमरी शिक्षक हैं, यह डेटा जरूरी है। उन्हें रजिस्ट्रेशन, प्रशिक्षण शेड्यूल और परीक्षा की जानकारी समय पर देनी होगी। वरना आखिरी दिनों में तकनीकी और व्यवस्थागत दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
शिक्षकों की चिंता बढ़ी
कई शिक्षक मानते हैं कि अचानक नियम बदलने से मानसिक दबाव बढ़ा है। नौकरी जाने का डर उनके परिवार तक महसूस कर रहा है। दूसरी तरफ सिस्टम का तर्क है कि प्राइमरी स्तर पर मजबूत नींव के लिए यह जरूरी कदम है। कोर्ट आदेश का पालन न करने पर सरकार खुद मुश्किल में आ सकती है।
क्या यह पूरा मामला सिर्फ एमपी तक सीमित है
सुप्रीम कोर्ट का आदेश राष्ट्रीय स्तर का है, इसलिए असर कई राज्यों पर है। हालांकि अमल और संख्या हर प्रदेश में अलग-अलग हो सकती है। मध्य प्रदेश में फिलहाल फोकस उन 5 हजार के आसपास शिक्षकों पर है। आगे चलकर नई भर्ती प्रक्रिया भी इसी आधार पर बदली रहेगी।
आगे क्या, शिक्षकों के लिए सेफ साइड क्या हो सकती है
जो शिक्षक इस दायरे में आते हैं, उन्हें जल्द रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। कोर्स को हल्के में लेने के बजाय नियमित तैयारी करना ही सुरक्षित राह होगी। यूनियन और संगठन भी पॉइंट बेस्ड डिमांड रख सकते हैं। जैसे पहली बार फेल होने पर ग्रेस, या अतिरिक्त मौका जैसे विकल्प।
सोर्स: लोक शिक्षण संचालनालय मप्र