मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण को लेकर सतना बना मिसाल, राजधानी का हाल अब भी बेहाल
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के शहरों की हवा में पिछले तीन साल में बड़ा बदलाव आया है।
- सतना में गंभीर प्रदूषण वाले दिन 2023 के 30 से घटकर शून्य हो गए हैं।
- पीथमपुर में हालात बिगड़े, 2025 में 33 दिन हवा बेहद खतरनाक रही।
- भोपाल में सुधार हुआ, लेकिन 2025 में भी 8 दिन गंभीर प्रदूषण दर्ज किया गया।
- यह जानकारी लोकसभा में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी है।
मध्य प्रदेश के शहरों की हवा में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कुछ शहरों की हवा साफ हुई है। वहीं कुछ शहरों में खतरा और बढ़ गया है। संसद में पेश आंकड़े यही कहानी बयां करते हैं। यह आंकड़े 2023 से 2025 के बीच के हैं। इनसे प्रदेश की हवा की असली तस्वीर सामने आई है।
सतना ने कैसे किया सुधार
सतना शहर के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। साल 2023 में यहां 30 दिन हवा गंभीर श्रेणी में रही थी। इसके बाद 2024 में यह आंकड़ा सीधे शून्य पर आ गया। साल 2025 में भी सतना में एक भी दिन गंभीर प्रदूषण दर्ज नहीं हुआ। यानी लगातार दूसरे साल शहर की हवा राहत भरी रही। उपलब्ध आंकड़ों में यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा सुधार माना जा सकता है। इससे साफ है कि शहर में उठाए गए कदमों का असर दिख रहा है।
पीथमपुर बना सबसे प्रदूषित
औद्योगिक शहर पीथमपुर की तस्वीर सतना से एकदम उलट है। यहां 2023 में 19 दिन हवा गंभीर श्रेणी में रही थी। साल 2024 में यह संख्या बढ़कर 31 हो गई। फिर 2025 में यह आंकड़ा 33 दिन तक पहुंच गया।
इसका मतलब है कि साल में लगभग हर 11वें दिन हवा बेहद खतरनाक रही। उपलब्ध शहरों के आंकड़ों में पीथमपुर की स्थिति सबसे खराब है। लगातार तीन साल से यहां प्रदूषण के दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। इससे शहर के लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ रहा है।
भोपाल में राहत, फिर भी खतरा
राजधानी भोपाल की स्थिति में भी बदलाव आया है। साल 2023 में यहां 36 दिन गंभीर प्रदूषण दर्ज हुआ था। अगले साल यानी 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 40 हो गया। लेकिन 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 8 रह गई। यह बड़ा सुधार जरूर है, लेकिन राहत की बात पूरी नहीं है।
राजधानी अब भी गंभीर प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकी है। सागर और रतलाम जैसे शहरों में भी हालात मिलेजुले रहे। सागर में गंभीर दिन 2023 के 8 से बढ़कर 2025 में 16 हो गए। रतलाम में यह आंकड़ा 5 दिन पर स्थिर रहा।
सरकार का एनसीएपी प्लान
यह पूरा डाटा सोमवार को लोकसभा में पेश हुआ। वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सवाल के जवाब में यह जानकारी दी गई। केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सदन को यह आंकड़े बताए। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम यानी एनसीएपी (National Clean Air Programme) असर दिखा रहा है।
इस योजना के तहत देश के 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 130 शहरों को मदद दी गई है। इन शहरों को प्रदूषण कम करने के लिए 16 हजार 423 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि जारी हुई है। यह राशि शहरों के प्रदर्शन के आधार पर दी गई है।
इसका नतीजा है कि 108 शहरों में पीएम-10 (Particulate Matter 10) की मात्रा कम हुई है। इनमें से 72 शहरों में यह कमी 20 प्रतिशत से ज्यादा रही। वहीं 26 शहरों में यह सुधार 40 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज हुआ। साल 2025-26 में 14 शहर तय वायु गुणवत्ता मानक तक पहुंच गए हैं। साल 2017-18 में ऐसे सिर्फ 6 शहर थे।
उद्योगों पर सख्त निगरानी
सरकार ने बताया कि उद्योगों पर पहले से ज्यादा निगरानी रखी जा रही है। वायु प्रदूषण रोकथाम अधिनियम 1981 और जल अधिनियम 1974 के तहत यह काम होता है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और समितियां उद्योगों को अनुमति देती हैं। यही संस्थाएं उद्योगों की निगरानी भी करती हैं। पर्यावरण प्रभाव आकलन यानी ईआईए (Environment Impact Assessment) अधिसूचना 2006 के तहत मंजूरी जरूरी है।
कई उद्योगों को नियमित रूप से अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होती है। सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले 17 उद्योगों में खास सिस्टम लगाया गया है। इसे ओसीईएमएस यानी ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (Online Continuous Emission Monitoring System) कहा जाता है। इससे प्रदूषण के आंकड़े सीधे बोर्ड तक पहुंच जाते हैं। नियम तोड़ने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कार्रवाई होती है।
हरियाली बढ़ाने की योजना
प्रदूषण कम करने के लिए हरियाली बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। सरकार ने 2020-21 से 2026-27 तक की योजना बनाई है। इसके तहत 600 नगर वन और 400 नगर वाटिकाएं बनाई जाएंगी। इसका मकसद शहरों में हरा भरा क्षेत्र बढ़ाना है। इससे जैव विविधता को भी बचाया जा सकेगा। लोगों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
इसके लिए राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि से पैसा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय हरित भारत मिशन के तहत 18 राज्यों को बड़ी मदद मिली है। यहां 1.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वनीकरण होना है। इसके लिए 1,076 करोड़ रुपए से ज्यादा जारी किए गए हैं। वहीं प्रतिपूरक वनीकरण निधि से पिछले पांच साल में 6,769 करोड़ रुपए से ज्यादा राज्यों को मिले हैं।
जलवायु मिशन पर काम जारी
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भी कई योजनाएं चल रही हैं। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना यानी एनएपीसीसी (National Action Plan on Climate Change) के तहत नौ मिशन काम कर रहे हैं। 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी जलवायु योजनाएं बना ली हैं।
इसके अलावा जल जीवन मिशन और अटल भूजल योजना भी चल रही है। जल शक्ति अभियान और सतत कृषि मिशन भी इसी दिशा में काम कर रहे हैं। निकरा यानी एनआईसीआरए (National Innovations in Climate Resilient Agriculture) जैसी योजनाएं भी जारी हैं। सरकार का दावा है कि इन सब कोशिशों से आने वाले सालों में और सुधार दिखेगा।
FAQ
- मध्य प्रदेश में सबसे प्रदूषित शहर कौन सा है?
2025 के आंकड़ों के अनुसार पीथमपुर सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां 33 दिन हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज हुई। यानी साल में लगभग हर 11वें दिन हवा बेहद खतरनाक रही। यह प्रदेश के बाकी शहरों की तुलना में सबसे खराब आंकड़ा है। - सतना में प्रदूषण कैसे कम हुआ?
सतना में 2023 में 30 दिन गंभीर प्रदूषण दर्ज हुआ था। इसके बाद 2024 और 2025 में यह आंकड़ा शून्य हो गया। लगातार दो साल तक शहर में एक भी गंभीर प्रदूषण वाला दिन नहीं आया। यह प्रदेश का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। - एनसीएपी योजना क्या है?
एनसीएपी यानी राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम केंद्र सरकार की योजना है। इसका मकसद देश के प्रदूषित शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारना है। इसके तहत 130 शहरों को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि दी गई है। इससे 108 शहरों में पीएम-10 की मात्रा में कमी आई है।
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