उधार लेकर कर्ज चुका रही एमपी सरकार, CAG रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
Sanjay Dhiman | Jul 23, 2026, 17:03 IST
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कैग रिपोर्ट में खुलासा, मध्य प्रदेश सरकार अपनी 30% कमाई पुराना कर्ज चुकाने में खर्च कर रही है। दस साल में राज्य का कर्ज तीन गुना से ज्यादा बढ़ा है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में कैग की रिपोर्ट पेश हुई है। इसमें राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता जताई गई है। एमपी सरकार नया उधार लेकर पुराना कर्ज चुका रही है। साल 2024-25 में कुल उधार का 29.43 फीसदी हिस्सा पुराने कर्ज में गया। इससे विकास कार्यों के लिए पैसा कम बचा है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, यानी कैग (CAG – Comptroller and Auditor General of India), ने यह रिपोर्ट राज्य वित्त पर तैयार की है। यह रिपोर्ट बुधवार को विधानसभा में रखी गई। इसमें साल 2024-25 के आंकड़े शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने उधार का बड़ा हिस्सा पुराना कर्ज चुकाने में लगाया। यह हिस्सा 29.43 फीसदी रहा। पिछले 10 साल का औसत भी करीब इतना ही है, यानी 29.30 फीसदी। इससे साफ है कि यह कोई एक साल की बात नहीं है।
लगातार यही रफ्तार बनी हुई है। नए उधार से पुराना कर्ज चुकाया जा रहा है। इससे पूंजीगत यानी विकास कार्यों वाले खर्च के लिए पैसा कम बचता है। सड़क, बिजली और अन्य जरूरी काम इससे प्रभावित हो सकते हैं।
कैग रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। पिछले तीन वर्षों में राज्य का कर्ज अर्थव्यवस्था से ज्यादा तेजी से बढ़ा। अगर आर्थिक विकास दर तेजी से नहीं बढ़ी तो संकट और बढ़ेगा।
उधारी लेने की रफ्तार कम नहीं की गई तो स्थिति बेहद विकट हो जाएगी। राज्य का प्राथमिक घाटा लगातार बना हुआ है और स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। सरकार को ब्याज चुकाने के लिए भी नया कर्ज उठाना पड़ रहा है। प्राथमिक घाटे में कमी नहीं आई तो कर्ज का जाल गहराता चला जाएगा।
पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति डराने वाली लगती है। वर्ष 2015-16 में राज्य का आंतरिक ऋण केवल 83,718 करोड़ रुपए ही था। अब यह बढ़कर 3 लाख 33 हजार 216 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
वर्ष 2024-25 में केवल ब्याज के भुगतान पर 21,466 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। राज्य की कुल बकाया देयता में लगातार तेज बढ़ोतरी देखी गई है। वर्ष 2023-24 में यह 12.28 फीसदी थी जो अब 14.60 फीसदी हो गई। सकल राज्य घरेलू उत्पाद की तुलना में कर्ज का बोझ काफी अधिक बढ़ा है।
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वर्ष 2024-25 में राज्य का राजकोषीय घाटा बढ़कर 4.28 फीसदी हो गया। तय लक्ष्य 4.12 फीसदी था लेकिन सब्सिडी दोगुनी होने से घाटा बढ़ा। राज्य की अपनी राजस्व वृद्धि भी इस दौरान काफी धीमी पड़ गई है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि नीतियां तुरंत बदलनी होंगी। फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर राजस्व बढ़ाने के कड़े उपाय करने होंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भावी पीढ़ियों पर कर्ज का बड़ा बोझ पड़ेगा। मध्य प्रदेश के वित्तीय स्थायित्व को बचाने के लिए कड़े ठोस कदम जरूरी हैं।
कैग ने साफ कहा है कि प्राथमिक घाटा कम करना जरूरी है। इससे ही राज्य की वित्तीय सेहत सुधर सकती है। साथ ही आर्थिक विकास दर बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा।
अगर उधार लेने की रफ्तार कम नहीं हुई, तो आने वाले सालों में स्थिति और मुश्किल हो सकती है। राज्य सरकार के सामने अब संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। विकास और कर्ज प्रबंधन, दोनों साथ चलाना जरूरी होगा।
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भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, यानी कैग (CAG – Comptroller and Auditor General of India), ने यह रिपोर्ट राज्य वित्त पर तैयार की है। यह रिपोर्ट बुधवार को विधानसभा में रखी गई। इसमें साल 2024-25 के आंकड़े शामिल हैं।
कैग रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ
लगातार यही रफ्तार बनी हुई है। नए उधार से पुराना कर्ज चुकाया जा रहा है। इससे पूंजीगत यानी विकास कार्यों वाले खर्च के लिए पैसा कम बचता है। सड़क, बिजली और अन्य जरूरी काम इससे प्रभावित हो सकते हैं।
आर्थिक संतुलन बिगड़ने का पूरा खतरा
उधारी लेने की रफ्तार कम नहीं की गई तो स्थिति बेहद विकट हो जाएगी। राज्य का प्राथमिक घाटा लगातार बना हुआ है और स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। सरकार को ब्याज चुकाने के लिए भी नया कर्ज उठाना पड़ रहा है। प्राथमिक घाटे में कमी नहीं आई तो कर्ज का जाल गहराता चला जाएगा।
10 साल में 298 फीसदी तक बढ़ा राज्य का ऋण
वर्ष 2024-25 में केवल ब्याज के भुगतान पर 21,466 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। राज्य की कुल बकाया देयता में लगातार तेज बढ़ोतरी देखी गई है। वर्ष 2023-24 में यह 12.28 फीसदी थी जो अब 14.60 फीसदी हो गई। सकल राज्य घरेलू उत्पाद की तुलना में कर्ज का बोझ काफी अधिक बढ़ा है।
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पिछले 5 वर्षों में कर्ज चुकाने का ब्योरा (आंकड़े करोड़ में)
- 2020-21: 65,170 करोड़ रुपए (19.58% उधारी)
- 2021-22: 4,684 करोड़ रुपए (32.76% उधारी)
- 2022-23: 58,867 करोड़ रुपए (37.38% उधारी)
- 2023-24: 65,180 करोड़ रुपए (33.19% उधारी)
- 2024-25: 89,797 करोड़ रुपए (29.43% उधारी)
राजस्व घाटा और आर्थिक नीतियों पर उठते गंभीर सवाल
आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि नीतियां तुरंत बदलनी होंगी। फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर राजस्व बढ़ाने के कड़े उपाय करने होंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भावी पीढ़ियों पर कर्ज का बड़ा बोझ पड़ेगा। मध्य प्रदेश के वित्तीय स्थायित्व को बचाने के लिए कड़े ठोस कदम जरूरी हैं।
आगे क्या करना होगा
अगर उधार लेने की रफ्तार कम नहीं हुई, तो आने वाले सालों में स्थिति और मुश्किल हो सकती है। राज्य सरकार के सामने अब संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। विकास और कर्ज प्रबंधन, दोनों साथ चलाना जरूरी होगा।
FAQ
- कैग रिपोर्ट के अनुसार एमपी सरकार कर्ज संकट का सामना क्यों कर रही है?
एमपी सरकार कर्ज संकट का सामना इसलिए कर रही है क्योंकि उधारी का 30 फीसदी हिस्सा पुराना कर्ज और ब्याज चुकाने में ही चला जाता है। - कैग रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के आंतरिक ऋण के बारे में क्या खुलासा हुआ है?
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 सालों में राज्य का आंतरिक ऋण 298 फीसदी बढ़कर 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। - 2024-25 में ब्याज भुगतान में कितना खर्च हुआ?
इस साल ब्याज चुकाने में 21,466 करोड़ रुपए खर्च हुए। यह रकम भी नए उधार से ली गई। इससे सरकार पर देनदारी लगातार बढ़ रही है।
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