सीएम मोहन यादव ने जिसे बताया कांग्रेस का भागा दूल्हा, वह अक्षय बम बीजेपी में आकर भी अधर में
सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के दो बड़े बयानों पर एक साथ रविवार 31 मई को तीखा जवाब दिया था। पटवारी ने उन्हें सतना में मोहन अभिनंदन लाल यादव कहकर संबोधित किया था। इसके बाद, 26 मई को इंदौर में सबसे बड़ा माफिया जैसा शब्द कहा था।
इसका जवाब सीएम ने दिया और कहा कि दो कौड़ी का रद्दी प्रदेश अध्यक्ष नहीं देखा, वो टपोरी है और हम हैं अभिनंदन लाल। वहीं इस दौरान उन्होंने लोकसभा चुनाव और भागे हुए दूल्हे का जिक्र किया था। इसमें उनकी ही पार्टी बीजेपी में शामिल हुए अक्षय कांति बम आज भी अधर में हैं।
भागे हुए दूल्हे पर यह बोले सीएम
सीएम ने इंदौर में बीजेपी प्रशिक्षण शाला कार्यक्रम में कहा कि जो खुद की विधानसभा में 40-40 हजार वोटों से हार जाए, खुद के बूथ पर हार जाए, वह मुकाबला करने की बात करते हैं। ये तो विधानसभा में हुआ और तो और लोकसभा में तो बारात लेकर चली थी, दूल्हा लेकर और दूल्हा भाग गया, बारात खड़ी रह गई। यह कांग्रेस के हाल हैं।
क्या हुआ था लोकसभा चुनाव में
लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने मार्च-अप्रैल 2024 में अक्षय कांति बम को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। उन्होंने नामांकन भी भरा और चुनाव प्रचार भी किया था। जब नाम वापसी का पहला दिन था तब अप्रैल 2024 को वह बीजेपी के विधायक रमेश मेंदोला व अन्य के साथ कलेक्टोरेट पहुंच गए थे। जिला निर्वाचन अधिकारी के सामने आवेदन देकर चुनाव से नाम वापस ले लिया था। इसके बाद, एक गाड़ी में कैलाश विजयवर्गीय, मेंदोला के साथ बैठकर वह बीजेपी दफ्तर पहुंच गए थे। शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में इंदौर में बीजेपी ज्वाइन कर ली।
नाम वापसी को बीजेपी का षड़यंत्र बताया
इस घटना से कुछ दिन पहले जिला कोर्ट ने उन पर हत्या के प्रयास की धारा बढ़ा दी थी। इसके खिलाफ जब वह हाईकोर्ट गए और शपथपत्र दिया तो इसमें लिखा कि यह बीजेपी की चाल थी, ताकि मैं चुनाव से नाम वापस ले लूं। इसमें बीजेपी सफल रही।
जब द सूत्र ने इस शपथपत्र का खुलासा किया तो उन्होंने इसे बदला और बीजेपी की जगह विरोधी शब्द का उपयोग किया गया। उल्लेखनीय है कि यह शपथपत्र उन्होंने बीजेपी में आने के बाद दिया था।
आईडीए बोर्ड में पद पाने में जुटे हैं बम
बम बीजेपी में पूरी तरह से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से ही जुड़े हैं। हाल ही में नई दिल्ली में स्पीकर ओम बिरला के साथ एक कार्यक्रम भी किया। सुप्रीम कोर्ट से हाल ही में उन्हें हत्या के प्रयास की धारा संबंधी केस से मुक्ति मिली है।
अब बताया जाता है कि वह लंबे समय से राजनीतिक पुनर्वास में जुटे हैं और बीजेपी की ओर से निगम, मंडल या कहीं पर पद की उम्मीद पाले हुए हैं। इसमें आईडीए संचालक बोर्ड सदस्य के रूप में भी उनका नाम चल रहा है। हालांकि अभी तक उन्हें पार्टी ने कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी है।
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