एमपी में पानी पर होगी मंत्रियों की परीक्षा, अगले सप्ताह सीएम मोहन यादव लेंगे रिपोर्ट कार्ड

Ramanand Tiwari | Jun 01, 2026, 21:52 IST
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मध्य प्रदेश में बढ़ते पेयजल संकट के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जिलों की स्थिति जानेंगे। अगले सप्ताह वे उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सकते हैं। प्रभारी मंत्रियों को जिलों में दौरा कर लोगों से संवाद करने करने के निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश में बढ़ते पेयजल संकट के बीच सीएम मोहन यादव अब सीधे जिलों की स्थिति का फीडबैक लेने की तैयारी में हैं। अगले सप्ताह मुख्यमंत्री प्रदेशभर की पेयजल व्यवस्था की समीक्षा कर सकते हैं। सरकार ने प्रभारी मंत्रियों को अपने जिलों में जाने का निर्देश दिया। उन्हें लोगों से संवाद करना और समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है। सरकार ने कहा कि गर्मी में पानी की समस्या पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

सीएम करेंगे पेयजल की समीक्षा

प्रदेश में कई जिलों से पेयजल संकट की शिकायतें सामने आने के बाद सरकार ने निगरानी व्यवस्था और सख्त कर दी है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अगले सप्ताह उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सकते हैं। इस दौरान जिलों में पेयजल व्यवस्था, शिकायतों के निराकरण और वैकल्पिक व्यवस्थाओं की स्थिति पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री प्रभारी मंत्रियों से जिलों की जमीनी रिपोर्ट मांग सकते हैं। इसका उद्देश्य वास्तविक स्थिति का आकलन करना है।

प्रभारी मंत्रियों को मैदान में उतरने के संकेत

सरकार चाहती है कि पेयजल संकट की निगरानी केवल अधिकारियों तक सीमित न रहे। प्रभारी मंत्रियों को अपने जिलों में सक्रिय रहने और नियमित दौरे करने कहा गया है। उन्हें लोगों की समस्याएं सुनने और समाधान प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी। सरकारी स्तर पर माना जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से समाधान तेजी से संभव होगा।

जिलों में दो दिन रुककर समझेंगे हालात

मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से मंत्रियों को अपने-अपने जिलों का दौरा करने का सुझाव दिया गया है। दौरों के दौरान उन्हें जिले के दूरस्थ क्षेत्रों तक जाकर पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी। साथ ही शिकायतों की स्थिति और समाधान की प्रगति पर भी नजर रखनी होगी। सरकार का उद्देश्य यह है कि फैसले केवल फाइलों के आधार पर नहीं बल्कि जमीनी वास्तविकता के आधार पर लिए जाएं।

कंट्रोल रूम से होगी रोजाना निगरानी

पेयजल संकट पर नजर रखने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। इन कंट्रोल रूम में दर्ज होने वाली शिकायतों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन भी लगातार समीक्षा बैठकों के जरिए व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

गांवों में चौपाल और रात्रि विश्राम पर जोर

सरकार चाहती है कि पानी की समस्या को केवल प्रशासनिक बैठक तक सीमित न रखा जाए। इसीलिए प्रभारी मंत्रियों को गांवों और कस्बों में रात्रि विश्राम करने तथा चौपाल के माध्यम से सीधे लोगों से संवाद करने की सलाह दी गई है। इस दौरान स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान कराने पर विशेष फोकस रहेगा।

पेयजल के लिए 1,500 करोड़ रुपए जारी

एमपी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए 1,500 करोड़ रुपए जारी किए हैं। पंचायतों को छोटे मरम्मत और मेंटेनेंस कार्यों की सीमित वित्तीय स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य छोटी समस्याओं के समाधान में देरी रोकना है। सरकार मानती है कि स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई से संकटग्रस्त क्षेत्रों को राहत मिलेगी।

इंदौर-उज्जैन समेत कई जिलों से मिल रहा फीडबैक

सरकार को विभिन्न जिलों से पेयजल संकट की जानकारी मिल रही है। इंदौर, उज्जैन और अन्य क्षेत्रों में जलस्तर गिरने और जलापूर्ति प्रभावित होने की शिकायतें आई हैं। ऐसे क्षेत्रों में टैंकरों से वैकल्पिक जल आपूर्ति करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को जरूरतमंद क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने कहा गया है। अगले सप्ताह मुख्यमंत्री मोहन यादव पेयजल व्यवस्था की समीक्षा कर सकते हैं।

जमीनी फीडबैक लिया जाएगा

प्रभारी मंत्रियों को जिलों में सक्रिय निगरानी और दौरे के निर्देश दिए गए हैं। गांवों में चौपाल और रात्रि विश्राम के जरिए जमीनी फीडबैक लिया जा रहा है। सभी जिलों में कंट्रोल रूम बनाकर रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही है। ग्रामीण पेयजल व्यवस्था के लिए 1,500 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों में वैकल्पिक जल आपूर्ति की तैयारी की गई है। गर्मी के बीच पेयजल संकट सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रस्तावित समीक्षा बैठक इसी दिशा में बड़ा कदम है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि जिलों में निगरानी और फील्ड सक्रियता लोगों को कितनी राहत दे पाती है।

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