MP में आयुष्मान अस्पतालों के बदले नियम, आज से बिना NABH सर्टिफिकेट एंट्री बंद!

Amresh Kushwaha | Mar 31, 2026, 10:39 IST
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मध्य प्रदेश में आज, (01 अप्रैल) से आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों के लिए एनबीएचएच सर्टिफिकेट अनिवार्य हो गया है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में बिना सर्टिफिकेट वाले अस्पताल अब इस योजना से बाहर हो जाएंगे।

News In Short

  1. मध्य प्रदेश सरकार ने आयुष्मान योजना में बड़ा बदलाव किया है।
  2. अब निजी अस्पतालों के लिए एनबीएचएच सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा।
  3. फुल एनबीएचएच वाले अस्पतालों को सीधे इंपैनलमेंट मिलेगी।
  4. एंट्री लेवल सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों का निरीक्षण होगा।
  5. यह नियम एक अप्रैल से चार बड़े शहरों में लागू हो गया है।

News In Detail

मध्यप्रदेश सरकार ने आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। यह फैसला राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गया है। यह व्यवस्था एक अप्रैल से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में लागू होगी।



अब जिन अस्पतालों के पास फुल एनबीएचएच (National Board of Hospital and Healthcare Accreditation) सर्टिफिकेट होगा, वे आयुष्मान योजना में सीधे इंपैनल यानी शामिल हो सकेंगे। उन्हें अलग से निरीक्षण की जरूरत नहीं होगी। वहीं, एंट्री लेवल एनबीएचएच सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। उन्हें दो साल के भीतर फुल एनबीएचएच हासिल करना होगा।



एंट्री और फुल एनबीएचएच में अंतर

एंट्री लेवल एनबीएचएच में करीब 50 मानक और 150 ऑब्जेक्टिव एलिमेंट्स होते हैं। यह उन अस्पतालों को दिया जाता है जो गुणवत्ता प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इसकी मान्यता आमतौर पर करीब दो साल के लिए होती है। ऑडिट भी सीमित और बेसिक होता है।



फुल एनबीएचएच बिल्कुल अलग स्तर का होता है। इसमें 100 से ज्यादा मानक और 600 ऑब्जेक्टिव एलिमेंट्स होते हैं। मैनेजमेंट, मरीज सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और क्लिनिकल जांच सब पर व्यापक परीक्षण होता है। यह मान्यता आमतौर पर तीन से चार साल के लिए होती है। इसे हासिल करना काफी मुश्किल और खर्चीला होता है।



क्लेम में भी मिलेगा फायदा

फुल एनबीएचएच सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों को आयुष्मान योजना में 115 प्रतिशत क्लेम दिया जाएगा। यानी सामान्य दर से 15 प्रतिशत ज्यादा भुगतान मिलेगा। इससे इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी, यह सरकार का तर्क है।



वहीं, एंट्री लेवल सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों को आयुष्मान क्लेम में 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। यानी जितना बेहतर सर्टिफिकेट, उतना ज्यादा भुगतान। यह व्यवस्था अस्पतालों को गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है।



नर्सिंग होम एसोसिएशन की मांग पर समझौता

राज्य कार्यकारिणी समिति ने पहले फुल एनबीएचएच को अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा था। वहीं, नर्सिंग होम एसोसिएशन (Nursing Home Association) की मांग पर बीच का रास्ता निकाला गया है। एंट्री लेवल को न्यूनतम शर्त मान लिया गया है। इससे छोटे और मध्यम अस्पतालों को राहत मिली, लेकिन उन्हें दो साल में गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना होगा।



सरकार ने स्पष्ट किया है कि इलाज की गुणवत्ता और मरीज सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। आदेश जल्द जारी किया जाएगा।



चार शहरों में सिर्फ 59 फुल एनबीएचएच

चारों शहरों में कुल 395 आयुष्मान अस्पताल हैं। इनमें से 212 अस्पताल एंट्री लेवल पर हैं और केवल 59 के पास फुल एनबीएचएच सर्टिफिकेट है। बाकी अस्पतालों पर अब खुद को अपग्रेड करने का दबाव बढ़ेगा।



जो अस्पताल तय समय में अपग्रेड नहीं होंगे, उनकी संबद्धता समाप्त की जा सकती है। बिना किसी एनबीएचएच सर्टिफिकेट वाले अस्पताल अब इन शहरों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं कर पाएंगे।



फीडबैक और क्लेम प्रक्रिया होगी आसान

आयुष्मान अस्पतालों के लिए मरीजों का फीडबैक पोर्टल सार्वजनिक होगा। क्लेम प्रक्रिया को फेसलेस बनाया जाएगा। 10 मिनट में मंजूरी का लक्ष्य रखा गया है। तीन महीने में नया सिस्टम विकसित किया जाएगा।



पूर्व मंत्री ने जताई चिंता

कांग्रेस के पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा है कि बड़ी संख्या में अस्पताल बाहर हो तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी और लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बन सकती है। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है।



मध्यप्रदेश आयुष्मान भारत योजना के सीईओ डॉ. योगेश भारसट ने कहा कि आयुष्मान योजना में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यह नियम लिया गया है, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिले और अस्पताल निर्धारित मानकों का पालन करें।



यह खबर क्यों जरूरी है

आयुष्मान भारत योजना देश के करोड़ों गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा की रीढ़ है। मध्य प्रदेश में इस योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए एनबीएचएच सर्टिफिकेट अनिवार्य करना सीधे मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता से जुड़ा है।



भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (Article 21) जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसमें स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल माना गया है। यह नियम उसी दिशा में एक कदम है। साथ ही, डिजिटल नैतिकता के लिहाज से फीडबैक पोर्टल सार्वजनिक करना और क्लेम प्रक्रिया पारदर्शी बनाना जरूरी सुधार है। आम नागरिक को यह जानना जरूरी है कि कौन से अस्पताल अब इस योजना में रहेंगे और कौन से नहीं।



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FAQ

  1. आयुष्मान योजना में एनबीएचएच सर्टिफिकेट क्यों जरूरी हुआ?
    मध्य प्रदेश सरकार ने आयुष्मान योजना में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है। एनबीएचएच सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि अस्पताल में बुनियादी से लेकर उच्च स्तर के गुणवत्ता मानकों का पालन हो रहा है। बिना इस सर्टिफिकेट के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के अस्पताल अब 1 अप्रैल से आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं कर सकेंगे।

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