MP में आयुष्मान योजना से होगा हार्ट, लिवर और फेफड़ों का इलाज? 10 लाख तक कवर करने की तैयारी
इस प्रस्ताव को तैयार करने के लिए एम्स के डॉक्टरों समेत अन्य विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी ऑर्गन ट्रांसप्लांट में होने वाले खर्च का आकलन करेगी। इसके बाद तय किया जाएगा कि इन महंगे ऑपरेशनों के लिए आयुष्मान योजना के तहत कितनी राशि का पैकेज दिया जा सकता है।
देश में 20 हजार ट्रांसप्लांट, MP की हिस्सेदारी सिर्फ 2%
साल 2025 में देशभर में करीब 20 हजार ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए थे। इनमें मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सिर्फ 2 प्रतिशत रही। वहीं, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच प्रदेश में केवल 13 मृतदेहों से अंगदान दर्ज किए गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे ऑर्गन ट्रांसप्लांट को सरकारी स्वास्थ्य योजना में शामिल करने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मदद मिल सकती है। कई बार इलाज का खर्च बहुत ज्यादा होने के कारण मरीज और उनके परिवार ऑपरेशन कराने में असमर्थ होते हैं। ऐसी स्थिति में सरकारी सहायता मिलने से इलाज का रास्ता आसान हो सकता है।
हार्ट, लिवर और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट पर कितना खर्च आता है?
ऑर्गन ट्रांसप्लांट का खर्च अस्पताल और इलाज की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सरकारी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट पर तीन से पांच लाख 50 हजार रुपए, लिवर ट्रांसप्लांट पर आठ से 12 लाख रुपए, हार्ट ट्रांसप्लांट पर करीब 10 लाख रुपए और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट पर 10 से 15 लाख रुपए खर्च होते हैं।
वहीं, निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च 15 से 20 लाख रुपए, लिवर ट्रांसप्लांट का 30 से 35 लाख रुपए, हार्ट ट्रांसप्लांट का 40 से 50 लाख रुपए और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट का 60 से 70 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि निजी अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराना काफी महंगा हो सकता है। खासकर हार्ट और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट में लाखों रुपए खर्च होते हैं। ऐसे में आयुष्मान योजना में इन इलाजों को शामिल करने से जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक मदद मिल सकती है।
कमेटी तय करेगी इलाज का पैकेज
आयुष्मान भारत योजना मध्य प्रदेश के सीईओ अरविंद शाह के मुताबिक, विशेषज्ञों की कमेटी तीनों तरह के ट्रांसप्लांट में होने वाले खर्च का आकलन करेगी।
इसमें ऑपरेशन, जरूरी जांच, आईसीयू में भर्ती, दवाइयों और ऑपरेशन के बाद मरीज की देखभाल पर होने वाला खर्च शामिल होगा। इसके आधार पर हार्ट, लिवर और फेफड़ों के प्रत्यारोपण के लिए Treatment Package तैयार करने का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
कमेटी यह भी आकलन करेगी कि इन इलाजों के लिए योजना के तहत कितनी राशि तय की जानी चाहिए। फिलहाल यह व्यवस्था तैयारी और विचार के स्तर पर है।
कैंसर के मरीजों को भी पूरे इलाज का लाभ देने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि आयुष्मान योजना में कैंसर के मरीजों के लिए केवल कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का खर्च देना पर्याप्त नहीं है। कैंसर का इलाज कई महीनों तक चल सकता है और इसमें अलग-अलग चरण शामिल होते हैं।
एनएचएम के पूर्व डायरेक्टर डॉ. पंकज शुक्ला के अनुसार, कैंसर के मरीजों को शुरुआती जांच से लेकर इलाज पूरा होने और बाद की देखभाल तक पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
इसमें बीमारी की जांच, सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, जरूरत पड़ने पर टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के साथ मरीज की देखभाल और नियमित जांच भी शामिल होनी चाहिए।
अभी योजना में मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी से जुड़े पैकेज उपलब्ध हैं। लेकिन इलाज के अलग-अलग चरणों में मंजूरी और पैकेज की सीमाओं के कारण पूरे उपचार का खर्च कवर करना जरूरी है।
आयुष्मान योजना में कैंसर के इलाज के लिए कितने पैकेज हैं?
जुलाई 2026 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) में 27 मेडिकल स्पेशियलिटी की 1961 प्रक्रियाएं शामिल हैं।
वहीं, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के HBP 2.2 दस्तावेज में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के 14 पैकेज और 46 प्रक्रियाएं दर्ज हैं। कैंसर के इन पैकेजों में इलाज शुरू करने से पहले प्री-ऑथराइजेशन यानी पूर्व मंजूरी जरूरी है। उपचार के अलग-अलग चरणों के लिए मंजूरी दी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के मरीजों को इलाज के हर जरूरी चरण में पर्याप्त कवरेज मिलना चाहिए, ताकि आर्थिक परेशानी के कारण उपचार बीच में न छूटे।
मेडिकल कॉलेजों में अंगदान के लिए तैयार होंगी विशेषज्ञ टीमें
मध्य प्रदेश में अंगदान को बढ़ावा देने और ट्रांसप्लांट की व्यवस्था मजबूत करने के लिए एम्स भोपाल की ओर से सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस ट्रेनिंग में कई महत्वपूर्ण बातें सिखाई जाएंगी। इनमें ब्रेन डेथ की पुष्टि करना, संभावित अंगदाता की पहचान करना, मृतक के परिजनों को अंगदान के बारे में समझाना, अंगों को सुरक्षित रखना और उन्हें ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचाना शामिल है।
इस संबंध में मैपकास्ट ने एम्स के डॉ. विक्रम वट्टी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
मरीजों को क्या फायदा मिल सकता है?
अगर हार्ट, लिवर और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट को आयुष्मान योजना में शामिल करने का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो पात्र मरीजों को इन महंगे ऑपरेशनों के लिए आर्थिक सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही इलाज की सीमा पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपए करने का प्रस्ताव भी गंभीर बीमारियों के इलाज में मददगार हो सकता है।
हालांकि, अभी इन बदलावों पर विचार किया जा रहा है। मरीजों को मिलने वाली वास्तविक सहायता और इलाज के पैकेज की जानकारी अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।