मां बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप, कलेक्टर ने बैठाई जांच

Sourabh Bhatnagar | Jul 08, 2026, 12:25 IST
मां बगलामुखी मंदिर में दान की अनियमितता
आगर-मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में दान की अनियमितता सामने आई है। आरोप है कि श्रद्धालुओं का नकद, सोना-चांदी गैर-शासकीय समिति ले रही थी। कलेक्टर ने 3 सदस्यीय जांच दल बनाया है और 7 दिन में रिपोर्ट मांगी है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में दान में बड़ी गड़बड़ी के आरोप हैं।
  • आरोप है कि गैर-शासकीय समिति श्रद्धालुओं का नकद, सोना और चांदी वसूल रही थी।
  • चढ़ावे की रकम निजी बैंक खातों में डाली जाने की शिकायत मिली है।
  • कलेक्टर प्रीति यादव ने 3 सदस्यीय जांच दल गठित किया है।
  • समिति को सिर्फ 7 दिन में पूरी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

आस्था के नाम पर श्रद्धालुओं की जेब पर डाका डालने का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार मामला मध्य प्रदेश का है।



आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर (baglamukhi mandir agar malwa) में दान की भारी अनियमितता उजागर हुई है। आरोप है कि यहां श्रद्धालुओं से मिलने वाला नकद चढ़ावा, सोना और चांदी एक ऐसी समिति वसूल रही थी, जिसका मंदिर के शासकीय प्रबंधन से कोई नाता नहीं है।



यह खुलासा होते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया।



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गैर-शासकीय समिति खोल बैठी समानांतर वसूली तंत्र!

शिकायत के मुताबिक, मंदिर में शासकीय प्रबंधन समिति अलग से काम करती है। लेकिन उसी परिसर में एक और समिति चुपचाप सक्रिय थी, जिसका कोई सरकारी अधिकार ही नहीं था। यह समिति श्रद्धालुओं से नकद, सोना और चांदी के रूप में दान जमा कर रही थी।



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सवाल यह है कि आखिर बिना अनुमति के यह समानांतर वसूली इतने लंबे समय तक कैसे चलती रही। सबसे गंभीर आरोप यह है कि महाभारतकालीन बगलामुखी मंदिर केचढ़ावे की रकम को निजी बैंक खातों में डाला जा रहा था। यानी मंदिर की पवित्र आस्था का पैसा सरकारी खजाने की जगह किसी और की जेब में जाने का शक गहरा गया है।



कलेक्टर ने बनाई जांच टीम

मामला सामने आते ही कलेक्टर आईएएस प्रीति यादवने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने तीन सदस्यीय संयुक्त जांच दल गठित कर दिया है। जांच दल की अगुवाई जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.एस. सोलंकी करेंगे।



जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नगर परिषद नलखेड़ा की मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल को भी टीम में शामिल किया गया है।





सबसे बड़ी बात यह है कि टीम को महज सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। इतनी सख्त समयसीमा से साफ है कि प्रशासन अब इस मामले में लीपापोती बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।



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क्या-क्या खंगालेगी जांच टीम

जांच दल सबसे पहले यह पता लगाएगा कि बगलामुखी माता मंदिरपरिसर में कोई अपंजीकृत समिति समानांतर रूप से दान वसूल तो नहीं रही थी। रसीद पुस्तिकाओं की जांच होगी। बैंक खातों की पूरी पड़ताल की जाएगी। नकद, सोने और चांदी के हिसाब-किताब का बारीकी से सत्यापन होगा।



सबसे अहम बात यह है कि जांच में यह भी देखा जाएगा कि इस पूरे खेल में किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं है। अगर मंदिर (आगर के नलखेड़ा की मां बगलामुखी) प्रबंधन का कोई व्यक्ति भी इसमें शामिल पाया गया, तो उस पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।



निरीक्षण में खुली पोल

दरअसल यह पूरा मामला तब सामने आया जब कलेक्टर प्रीति यादव खुद नलखेड़ा मंदिर के निरीक्षण पर पहुंचीं। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके सामने मौखिक रूप से दान और वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी की शिकायत कर दी।



इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और तुरंत जांच के आदेश जारी हुए। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि लिखित शिकायत किसने और कब दी। यह बात भी संदेह को और गहरा करती है कि कहीं यह मामला पहले से जानबूझकर दबाया तो नहीं जा रहा था।



सोने-चांदी के सौंदर्यीकरण पर भी उठे सवाल

सूत्रों के मुताबिक मंदिर के गर्भगृह में सोने और चांदी से सौंदर्यीकरण का काम भी इसी विवादित समिति के जरिए कराया गया था। इसके लिए भी श्रद्धालुओं से अलग से सोना, चांदी और नकद दान लिया गया था।



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अब सवाल यह उठता है कि इतना बड़ा सौंदर्यीकरण कार्य बिना शासकीय निगरानी के कैसे हो गया। जांच के दौरान इस पूरे फंड के संग्रह और खर्च का हिसाब भी खंगाला जाएगा। अगर इसमें कोई गड़बड़ी मिलती है, तो यह मामला और बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।



अधिकारी बोले, नियम से होगी जांच

जांच दल के सदस्य मनीष सोलंकी ने कहा कि उन्हें समिति में शामिल किए जाने की जानकारी मिल चुकी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नियमानुसार पूरी जांच की जाएगी। लेकिन श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि आखिर इतने लंबे समय तक यह गड़बड़ी कैसे चलती रही। धार्मिक स्थलों पर दान की पारदर्शिता को लेकर अब सवाल और तेज होते जा रहे हैं।



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देशभर में मंदिरों के चढ़ावे पर उठ रहे सवाल

गौरतलब है कि सिर्फ बगलामुखी मंदिर ही नहीं, बल्कि इन दिनों देश के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में शुमार अयोध्या राम मंदिर (ram temple donation) में भी चढ़ावा चोरी का बड़ा मामला सुर्खियों में बना हुआ है। वहां (राम मंदिर चढ़ावा चोरी) भी करोड़ों रुपए के दान में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद एसआईटी जांच कर रही है।



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जांच एजेंसी बैंक अधिकारियों, नकदी गणना में शामिल कर्मियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है। मामला अब जमीन खरीद में हुई गड़बड़ियों तक भी पहुंच गया है।



इससे साफ है कि छोटे हों या बड़े, धार्मिक स्थलों पर दान की सुरक्षा और पारदर्शिता आज देशभर में एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है।



FAQ

  1. सवाल 1: बगलामुखी मंदिर में दान की अनियमितता का आरोप क्या है?
    जवाब: आरोप है कि मंदिर की गैर-शासकीय समिति श्रद्धालुओं से नकद, सोना और चांदी वसूल रही थी। इस चढ़ावे की रकम को निजी बैंक खातों में डाला जाने की शिकायत भी मिली है।
  2. सवाल 2: बगलामुखी मंदिर में दान की जांच समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
    जवाब: जांच दल की अगुवाई जिला पंचायत सीईओ बी.एस. सोलंकी करेंगे। जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नगर परिषद नलखेड़ा की सीएमओ मिनी अग्रवाल सदस्य हैं। टीम को 7 दिन में रिपोर्ट देनी है।
  3. सवाल 3: बगलामुखी मंदिर में दान की जांच में क्या-क्या पता लगाया जाएगा?
    जवाब: जांच दल यह पता लगाएगा कि कोई अपंजीकृत समिति समानांतर रूप से दान ले रही थी या नहीं। रसीद पुस्तिकाओं, बैंक खातों और गर्भगृह सौंदर्यीकरण के फंड की भी जांच होगी।

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