एमपी में 5 डे वीक की मांग पर अड़े बैंक कर्मचारी, 26 से 30 तक फिर बंद रहेंगे बैंक
मध्य प्रदेश में बैंक कर्मचारियों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। UFBU ने सितंबर में फिर बड़ी हड़ताल का ऐलान किया है। कर्मचारी 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन हड़ताल पर रहेंगे।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। इससे आम जनता को बैंकिंग कामों में भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। हफ्ते में पांच दिन काम करने की मांग मुख्य है।
5 डे वीक वर्किंग यानी हफ्ते में सिर्फ 5 दिन बैंक खोलने की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंककर्मी हड़ताल पर रहेंगे। इससे कई बैंकों में ताले लटक सकते हैं।
यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले की जा रही है। इसमें मध्य प्रदेश के बैंककर्मी भी शामिल होंगे। हड़ताल का सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। इस दौरान बैंक से बड़ी रकम निकालने, चेक जमा करने और चेक क्लियर होने जैसे काम अटक सकते हैं।
हड़ताल से पहले यूनियंस और सरकार के बीच बातचीत भी चल रही है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकल पाया है। यही वजह है कि बैंक यूनियनों ने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।
26 से 30 सितंबर तक फिर बंद रहेंगे बैंक
सितंबर में बैंककर्मियों की यह दूसरी बड़ी हड़ताल होगी। 28 से 30 सितंबर तक फिर हड़ताल रहेगी। इससे पहले 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी है। ऐसे में लगातार 5 दिन तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
कब-कब रहेगा बैंक बंद
आसान भाषा में समझें तो बैंक बंद रहने का पहला असर 11 सितंबर से शुरू होगा। इस दिन बैंककर्मी हड़ताल पर रहेंगे। इसके अगले दो दिन यानी 12 और 13 सितंबर को सामान्य छुट्टी रहेगी। इस तरह लगातार 3 दिन बैंकिंग सेवाएं बंद रहेंगी।
20 सितंबर को रविवार पड़ रहा है। इसके बाद महीने का दूसरा बड़ा असर आएगा। 26 और 27 सितंबर को शनिवार-रविवार की छुट्टी रहेगी। ठीक इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक फिर हड़ताल रहेगी। यानी लगातार 5 दिन बैंक बंद रहेंगे।
इस दौरान कैश जमा और निकासी प्रभावित हो सकती है। चेक क्लियरेंस, KYC (Know Your Customer) और लॉकर सेवाएं भी बाधित रहेंगी। ग्राहकों को जरूरी काम पहले निपटा लेने की सलाह दी गई है।
क्यों हो रही है हड़ताल
बैंक कर्मचारी लंबे समय से कई मांगें उठा रहे हैं। इनमें सबसे अहम मांग 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की है। दूसरी बड़ी मांग एक विवादित प्रोत्साहन योजना को वापस लेने की है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU – United Forum of Bank Unions) इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। यूनियन पहले भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर चुकी है। 27 अगस्त को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन हुआ था।
5-डे वीक की मांग
फिलहाल बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है। बाकी शनिवार को बैंक खुले रहते हैं। यूनियनों की मांग है कि हर शनिवार को छुट्टी घोषित की जाए।
इसके बदले यूनियनों ने एक प्रस्ताव भी दिया है। सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना काम का समय 40 मिनट बढ़ाया जाए। इस तरह हफ्ते के कुल काम के घंटे लगभग बराबर रहेंगे।
दो मुख्य मांगें
यूनियन की पहली मांग 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की है। दूसरी मांग स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI (Performance Linked Incentive) योजना वापस लेने की है।
यूनियनों का कहना है कि यह योजना कर्मचारियों में भेदभाव पैदा करती है। इसे लेकर बैंक अधिकारियों और यूनियनों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है।
यूनियन का बयान
यूनियंस के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने इस मुद्दे पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग पूरी तरह जायज है। उनके मुताबिक सरकार इस मांग को अनावश्यक रूप से टाल रही है।
शर्मा ने बताया कि PLI का मुद्दा सुलह प्रक्रिया के सामने पहले से लंबित है। इसके बावजूद सरकार ने बैंकों को यह योजना लागू करने के लिए बाध्य किया है। उन्होंने इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण फैसला बताया।
अन्य पेंडिंग मांगें
यूनियंस के मुताबिक सिर्फ यही दो मांगें नहीं हैं। पेंशन अपडेशन और पेंशनभोगियों के एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा जैसे मुद्दे भी लंबित हैं।
NPS (New Pension Scheme) को OPS (Old Pension Scheme) में बदलने की मांग भी पूरी नहीं हुई है। सभी पेंशनभोगियों के लिए समान DA (Dearness Allowance) योजना लागू करने की मांग भी बाकी है।
इसके अलावा क्लर्क, सब-स्टाफ और आर्म्ड गार्ड्स की भर्ती की मांग भी लंबित है। ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत सीमा बढ़ाने का मुद्दा भी अब तक अनसुलझा है।
PLI योजना पर विवाद
यूनियंस का आरोप है कि नई PLI योजना कर्मचारियों को बांटने का काम कर रही है। इसके जरिए अधिकारियों के एक छोटे वर्ग को ज्यादा प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
यूनियंस का कहना है कि सरकार व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन नीति को आगे बढ़ा रही है। यूनियनों को डर है कि इससे सामूहिक कामकाज की भावना कमजोर होगी।
आगे क्या होगा
सरकार और बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच बुधवार को नई दिल्ली में बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में मांगों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
अगर बातचीत सकारात्मक नहीं रहती है तो यूनियन आगे भी हड़ताल जारी रखने का फैसला ले सकती हैं। यूनियंस पहले ही आने वाले महीनों में और हड़तालों का आह्वान कर चुकी हैं।
अगर आपका भी बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है तो इन तारीखों को ध्यान में रखें। समय रहते काम निपटाने से परेशानी से बचा जा सकता है।
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