भोपाल में बारिश आते ही मच्छरों ने बढ़ाई टेंशन, इन कॉलोनियों में मंडरा रहा खतरा
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल में डेंगू की जांच पिछले साल से 32 फीसदी कम हुई है।
- कम जांच के बाद भी इस साल 44 डेंगू मरीज मिल चुके हैं।
- शहर में डेंगू की संक्रमण दर (पॉजिटिविटी) 50% से ज्यादा बढ़ी है।
- स्वास्थ्य विभाग ने अगले 45 दिनों को सबसे खतरनाक माना है।
- मलेरिया और चिकनगुनिया के मरीजों में इस साल कमी आई है।
भोपाल में डेंगू का बड़ा खतरा
Bhopal Dengue Alert: मध्यप्रदेश के भोपाल में मानसून आते ही डेंगू का डंक तेज हो गया है। इस बार हालात थोड़े अलग और ज्यादा चिंताजनक दिख रहे हैं। शहर में डेंगू के टेस्ट पिछले साल से बहुत कम हुए हैं। फिर भी मरीजों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है।
अस्पतालों में आने वाले मरीजों की रिपोर्ट लगातार पॉजिटिव आ रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट ने अफसरों की नींद उड़ा दी है। कम जांच के बाद भी इतने मरीज मिलना बड़ा संकेत है। इन्फेक्शन की रफ्तार पहले से कहीं ज्यादा तेज हो चुकी है।
पॉजिटिविटी रेट में भारी उछाल
आंकड़ों को देखें तो इस साल स्थिति वाकई गंभीर है। पिछले साल इस अवधि तक चार हजार 16 जांच हुई थीं। इस साल केवल दो हजार 730 लोगों की ही जांच हुई है। यह जांच पिछले साल से 32% कम है।
इसके बाद भी इस साल 44 लोग पॉजिटिव मिले हैं। पिछले साल इसी समय 43 मरीज सामने आए थे। अगर जांच पिछले साल जितनी होती तो मरीज 65 पार होते। यही बात डॉक्टरों को सबसे ज्यादा डरा रही है।
इन्फेक्शन की रेट 50 फीसदी बढ़ी
हेल्थ एक्सपर्ट्स इन्फेक्शन की रेट को लेकर बहुत चिंतित हैं। पिछले साल डेंगू इन्फेक्शन दर 1.07 फीसदी दर्ज थी। इस साल ये रेट बढ़कर 1.61 फीसदी हो गई है। इसका मतलब है कि इन्फेक्शन रेट 50.5% बढ़ गई है।
मरीजों के मिलने की रफ्तार में भारी तेजी आई है। हल्की सी लापरवाही सेहत पर बहुत भारी पड़ सकती है। बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरूरी है। खुद से दवाई लेना इस समय खतरनाक हो सकता है।
अगले 45 दिन सबसे ज्यादा भारी
डॉक्टरों के मुताबिक अगले 45 दिन सबसे ज्यादा सेंसिटिव हैं। जुलाई के दूसरे हफ्ते से अगस्त तक लगातार बारिश होती है। लगातार होने वाली बारिश से जगह-जगह पानी जमा होता है। इसी जमा पानी में एडीज मच्छर तेजी से पनपते हैं।
एडीज मच्छर का जीवन चक्र 7 से 10 दिन का होता है। मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद लक्षण दिखते हैं। जुलाई में फैला संक्रमण अगस्त में मरीजों के रूप में दिखेगा। इसलिए घरों के आसपास पानी जमा न होने दें।
स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन
खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। विभाग की 44 टीमें लगातार फील्ड में काम कर रही हैं। शहर के 85 वार्डों में लगातार सर्वे किया जा रहा है। टीमें घर-घर जाकर मच्छरों का लार्वा नष्ट कर रही हैं।
अब तक 2.16 लाख से अधिक घरों का सर्वे हुआ है। लगभग पांच हजार 259 पानी के कंटेनरों में लार्वा मिला था। इस लार्वा को मौके पर ही केमिकल (डेंगू के बढ़ते मामले) से नष्ट किया गया। वाटर सोर्सेज में 30 हजार गंबूशिया मछलियां छोड़ी गई हैं।
इन कॉलोनियों में सबसे ज्यादा डर
इस साल साकेत नगर डेंगू की बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका बना है। इसके अलावा कई अन्य कॉलोनियों में विशेष निगरानी जारी है। अशोका गार्डन, कोलार और कटारा में विशेष अभियान चल रहा है। अयोध्या नगर और गोविंदपुरा में भी टीमें तैनात हैं।
छोला, करोंद, बैरागढ़ और शाहपुरा में भी फागिंग जारी है। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने लोगों को डेंगू और मलेरिया से बचने कीअपील की है। उन्होंने कूलर और पानी की टंकियों को साफ रखने को कहा है। लापरवाही बरतने पर डेंगू का खतरा बढ़ सकता है।
चिकनगुनिया और मलेरिया में राहत
इस सीजन में राहत की बात सिर्फ एक ही है। मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों में भारी कमी आई है। मलेरिया की इस साल एक लाख 21 हजार 39 जांच की जा चुकी हैं। यह जांच पिछले साल से 58 फीसदी ज्यादा है।
इतनी ज्यादा जांच के बाद भी सिर्फ चार मरीज मिले हैं। पिछले साल इस समय मलेरिया के पांच मरीज मिले थे। चिकनगुनिया की भी इस साल 615 जांच की गई हैं। इस जांच में केवल नौ मरीज ही पॉजिटिव मिले हैं।
पिछले साल इस समय चिकनगुनिया के 48 मरीज थे। इस तरह चिकनगुनिया के मामलों में 81% की गिरावट है। हालांकि डेंगू ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता को दोगुना कर दिया है। सजगता ही इस बीमारी से बचने का एकमात्र उपाय है।
ये खबर हमारे लिए क्यों जरूरी है
यह खबर हमारे लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि ये हमारी सेहत और सुरक्षा से जुड़ी है। भोपाल में इस बार डेंगू का एक खतरनाक और नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। भले ही अस्पतालों में जांच कम हो रही हैं, लेकिन मरीजों के मिलने की रफ्तार यानी पॉजिटिविटी रेट 50% तक बढ़ गई है।
इसका सीधा मतलब है कि समाज में डेंगू का वायरस बहुत तेजी से फैल रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मानसून के दौरान अगले 45 दिन सबसे ज्यादा नाजुक हैं क्योंकि इस समय जमा साफ पानी में एडीज मच्छर तेजी से अंडे देते हैं।
यह खबर हमें अलर्ट करती है कि हम अपने घर, कूलर और पानी की टंकियों को साफ रखें। बुखार आने पर खुद डॉक्टर न बनें, बल्कि तुरंत टेस्ट करवाएं ताकि समय पर इलाज हो सके।
FAQ
- भोपाल में डेंगू फैलने का मुख्य कारण क्या है और अगले 45 दिन क्यों जरूरी हैं?
भोपाल में लगातार बारिश के कारण साफ पानी जमा हो रहा है। इसमें एडीज मच्छर तेजी से पनपते हैं। इनका जीवन चक्र 7 से 10 दिन का होता है। जुलाई का संक्रमण अगस्त में बीमारी बनता है, इसलिए अगले 45 दिन संवेदनशील हैं। - डेंगू मच्छर के काटने के कितने दिन बाद शरीर में लक्षण दिखाई देते हैं?
संक्रमित एडीज मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद मरीज में डेंगू के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसमें तेज बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द शामिल है। लक्षण दिखने पर तुरंत टेस्ट करवाना चाहिए। - भोपाल स्वास्थ्य विभाग डेंगू नियंत्रण के लिए क्या कदम उठा रहा है?
स्वास्थ्य विभाग की 44 टीमें 85 वार्डों में सर्वे कर रही हैं। अब तक 2 लाख से ज्यादा घरों की जांच कर लार्वा नष्ट किया गया है। जल स्रोतों में 30 हजार गंबूशिया मछलियां भी छोड़ी गई हैं।
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