MP BJP कार्यसमिति का गठन 11 महीने से अटका: सिंधिया की सूची और हाईकमान की ना में फंसे खंडेलवाल
भाजपा अध्यक्ष बने 11 माह, कमेटी नहीं
हेमंत खंडेलवाल को मध्यप्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बने 11 महीने पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने फरवरी और मार्च में दो बार संकेत दिए थे कि अप्रैल के पहले हफ्ते तक प्रदेश कार्यसमिति घोषित कर दी जाएगी। वहीं, हुआ कुछ नहीं। अब यह मामला नियम बनाम निष्ठा की जंग बन गया है। पार्टी के संगठनात्मक नियम एक तरफ हैं और नेताओं की वफादारी की राजनीति दूसरी तरफ।
सिंधिया की सूची बनी सबसे बड़ी अड़चन
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों की एक लंबी-चौड़ी सूची पार्टी नेतृत्व को थमाई गई है। इनमें वे नेता भी हैं जो पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं या जिन्हें टिकट नहीं मिल सका था।
केंद्रीय नेतृत्व ने कहा है कि 2020 से 2023 के बीच विशेष परिस्थितियों में समर्थकों को कार्यसमिति में शामिल करने की छूट अब नहीं मिलेगी। यह छूट सिंधिया और अन्य दलों से आए नेताओं के समर्थकों को दी गई थी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अब किसी को भी स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा। हाईकमान इस बात पर अड़ा हुआ है कि कार्यसमिति का गठन संगठनात्मक गाइडलाइन के हिसाब से ही होगा।
मई में घोषणा का था दावा
28 अप्रैल को भोपाल में पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान की बैठक में खंडेलवाल ने मंच से कार्यसमिति के गठन का दावा किया था। उन्होंनेबीजेपी संगठन महामंत्री शिवप्रकाश की ओर मुखातिब होकर कहा था कि आपकी अनुमति होगी तो मई में कार्यसमिति की घोषणा कर दी आएगी। साथ ही, ओरछा में पहली बैठक कर ली जाएगी। इसके बाद उन्होंने मीडिया से भी एक-दो दिन में सूची जारी होने का दावा किया था। वहीं, लंबे इंतजार के बाद भी सूची अब तक जारी नहीं हो सकी है।
क्या कहती है भाजपा की गाइडलाइन
भाजपा की संगठनात्मक गाइडलाइन के अनुसार, प्रदेश कार्यसमिति में कुल 157 सदस्य होने चाहिए। इनमें मुख्य कार्यसमिति के अधिकतम 106 सदस्य, स्थायी आमंत्रित सदस्य करीब 25 और विशेष आमंत्रित सदस्य मूल संख्या के 25% यानी 26 शामिल होते हैं। वहीं, सिंधिया समर्थकों की सिफारिशें इतनी ज्यादा हैं कि इन दायरों में समेटना लगभग असंभव हो गया है।
403 सदस्यों वाली जंबो समिति की याद
मार्च 2020 में सिंधिया कांग्रेस के 22 विधायकों और सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्हें समायोजित करने के लिए जून 2021 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के कार्यकाल में 403 सदस्यों की एक विशाल जंबो कार्यसमिति बनाई गई थी। इस समिति में विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या अकेले 218 तक पहुंच गई थी। यह किसी भी सामान्य राजनीतिक संगठन की सीमा से कहीं ज्यादा थी।
संतोष से मिले खंडेलवाल
इस रुकावट को सुलझाने के लिए खंडेलवाल हाल ही में दिल्ली में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से मिले थे। सूत्रों के मुताबिक, संतोष ने उन्हें साफ गाइडलाइन दी है कि कार्यसमिति का गठन संगठनात्मक नियमों का अक्षरशः पालन करते हुए ही हो।
यानी अब खंडेलवाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे सिंधिया खेमे को कैसे संभालें और पार्टी की गाइडलाइन का भी पालन करें। दोनों को एक साथ साधना आसान नहीं दिखता।
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