अभियानों की भरमार, संगठन अधर में! भाजपा में नियुक्तियों पर कब लगेगी मुहर?

Ramanand Tiwari | Jun 22, 2026, 20:57 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. भाजपा में श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पर अभियान तेज। संगठनात्मक नियुक्तियां लंबित। कार्यकर्ता नाराज। चुनाव से पहले फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • भाजपा में बड़े अभियानों की तैयारी तेज।
  • संगठनात्मक नियुक्तियां अब तक लंबित।
  • कार्यकर्ताओं में नाराजगी और असंतोष बढ़ा।
  • वरिष्ठ नेताओं में सहमति नहीं बन पा रही।
  • चुनाव से पहले संगठनात्मक मजबूती पर सवाल।

एमपी बीजेपी एक बार फिर बड़े वैचारिक और राजनीतिक अभियानों की तैयारी में जुट गई है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष पर 23 जून से 6 जुलाई तक प्रदेशभर में कार्यक्रमों की लंबी श्रृंखला शुरू होने जा रही है।



सवाल यह है कि क्या बीजेपी संगठन का पूरा ध्यान सिर्फ आयोजनों तक सीमित होकर रह गया है, जबकि कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक फैसले महीनों से लंबित पड़े हैं?



बड़े-बड़े आयोजन, लेकिन संगठन में बढ़ती बेचैनी

भाजपा लगातार नए कार्यक्रमों और अभियानों का ऐलान कर रही है। बूथ स्तर से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक गतिविधियों का कैलेंडर तैयार हो रहा है। इसके बावजूद जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच एक अलग तरह की नाराजगी और निराशा दिखाई दे रही है।



कारण यह है कि संगठन से जुड़े कई अहम निर्णय अब तक फाइलों से बाहर नहीं निकल पाए हैं। मंडल और निगम-मंडलों में नियुक्तियों का इंतजार लंबा होता जा रहा है, जबकि प्रदेश कार्यसमिति के विस्तार को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।



कार्यकर्ताओं का सवाल: मेहनत करने वालों की बारी कब?

संगठन के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता अब भी इंतजार कर रहे हैं। दूसरी तरफ प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से मजबूत नेताओं को लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और पद मिलते दिखाई दे रहे हैं।



ऐसे में जमीनी स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर संगठन उन कार्यकर्ताओं को कब याद करेगा, जिन्होंने चुनावों और आंदोलनों में पार्टी के लिए लगातार काम किया।



क्या दिग्गजों की खींचतान बन रही देरी की वजह?

भाजपा के अंदरूनी गलियारों में चर्चा है कि कई नियुक्तियां और संगठनात्मक फैसले वरिष्ठ नेताओं के बीच सहमति नहीं बनने के कारण अटके हुए हैं।



हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं है, लेकिन लंबे समय से लंबित फैसले कई तरह के सवाल जरूर खड़े कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सब कुछ सामान्य होता तो संगठनात्मक नियुक्तियां इतनी देर तक लंबित नहीं रहतीं।



चुनाव करीब, लेकिन संगठनात्मक तस्वीर धुंधली

प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में अब लगभग दो साल का समय बचा है। ऐसे समय में आमतौर पर राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा करने पर जोर देते हैं।



लेकिन भाजपा में अभी भी कई महत्वपूर्ण पदों पर तस्वीर साफ नहीं है। इससे न केवल कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बन रही है, बल्कि संगठनात्मक ऊर्जा पर भी असर पड़ सकता है।



कार्यक्रमों से ज्यादा फैसलों का इंतजार

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मरण पखवाड़े के तहत व्याख्यान, सम्मेलन, पौधरोपण और विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। लेकिन पार्टी के भीतर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की नजर इन कार्यक्रमों से ज्यादा उन फैसलों पर टिकी है, जिनका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है।



अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा नेतृत्व लंबित नियुक्तियों, कार्यसमिति विस्तार और अन्य संगठनात्मक निर्णयों पर आखिर कब अंतिम मुहर लगाएगा? क्योंकि कार्यकर्ताओं को अब सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि संगठन में अपनी भूमिका और सम्मान का भी इंतजार है।



मुख्य तथ्य...

  • 23 जून से 6 जुलाई तक भाजपा का बड़ा अभियान शुरू।
  • डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मरण पखवाड़े का आयोजन।
  • मंडल और निगम-मंडलों में नियुक्तियां अब भी लंबित।
  • प्रदेश कार्यसमिति विस्तार पर भी फैसला बाकी।
  • जमीनी कार्यकर्ताओं में बढ़ रही नाराजगी।
  • संगठन के भीतर देरी को लेकर सवाल तेज।
  • चुनाव से पहले संगठनात्मक मजबूती पर उठ रहे प्रश्न।

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