एमपी के मंत्री-विधायकों की सुविधाओं पर चलेगी कैंची, सरकार ने बनाया खर्च घटाने का प्लान

Sourabh Bhatnagar | Aug 04, 2026, 13:05 IST
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MP सरकार 2027-28 बजट में 74 मद खत्म करेगी। मंत्री-विधायकों के त्योहार अग्रिम, भोजन भत्ता जैसी 15 सुविधाएं बंद होंगी। इससे टैक्सदाताओं का पैसा बचेगा। बजट कोडिंग और खर्च वर्गीकरण में भी बड़ा बदलाव होगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश सरकार 2027-28 के बजट में 74 मद खत्म करने की तैयारी कर रही है।
  • मंत्री और विधायकों को मिलने वाले करीब 15 निजी भत्ते बंद किए जा सकते हैं।
  • त्योहार अग्रिम, भोजन भत्ता, धोबी और नाई खर्च जैसी सुविधाओं को खत्म करने का प्रस्ताव है।
  • एक लाख रुपए तक के खर्च को अब संपत्ति की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।
  • बजट कोडिंग सिस्टम में भी बदलाव किया जाएगा।
  • सरकार का दावा है कि इन बदलावों से खर्च में कमी आएगी और टैक्सदाताओं के पैसे की बचत होगी।

MP बजट 2027-28 में बड़े बदलाव की तैयारी



मध्य प्रदेश सरकार नए बजट में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इससे सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की बचत होने की उम्मीद है। सरकार साल 2027-28 के बजट में 74 मद खत्म करने जा रही है। इनमें मंत्री-विधायकों के कई निजी भत्ते भी शामिल हैं।



मंत्री-विधायकों के भत्ते होंगे खत्म

नई व्यवस्था में मंत्रियों और विधायकों से जुड़े करीब 15 मद हटाए (महंगाई भत्ते) जाएंगे। इनमें त्योहार अग्रिम और भोजन भत्ता जैसी सुविधाएं (विधायकों के वेतन और भत्ते) शामिल हैं। धोबी और नाई के खर्च के लिए भी अलग भत्ता मिलता था। अनाज अग्रिम और अवकाश यात्रा भत्ता भी अब बंद होंगे। प्रतिनियुक्ति भत्ता जैसी प्रशासनिक सुविधा भी खत्म की जा रही है। ये सभी खर्च अब तक सरकारी खजाने से जाते थे। इन्हें बंद करने से जनता के पैसे की सीधी बचत होगी।



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क्यों हो रहा है यह बदलाव

सरकार का मकसद बजट को ज्यादा पारदर्शी और व्यावहारिक बनाना है। वित्तीय प्रबंधन को सरल करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे सरकारी खर्च में फिजूलखर्ची रोकने की कोशिश हो रही है। सरकार मानती है कि पुराने मद अब जरूरी नहीं रह गए हैं। इन्हें हटाने से आम जनता का टैक्स पैसा भी बचेगा।



कैसे बचेगा टैक्सपेयर का पैसा

इन भत्तों पर हर साल सरकारी खजाने से रकम खर्च होती रही है। यह रकम जनता से मिले टैक्स से ही आती है। भत्ते खत्म होने से यह खर्च अब आगे नहीं होगा। इससे बजट का इस्तेमाल जरूरी योजनाओं में हो सकेगा। माना जा रहा है कि इससे वित्तीय अनुशासन भी मजबूत होगा। कुल 74 मद खत्म होने से प्रशासनिक खर्च का बोझ भी घटेगा।



छोटी खरीद पर भी लगेगी लगाम

अब तक एक लाख रुपए तक के खर्च को पूंजीगत व्यय माना जाता था। ऐसे खर्च को सरकारी संपत्ति की श्रेणी में रखा जाता था। नई व्यवस्था में यह नियम खत्म कर दिया गया है। अब एक लाख रुपए तक का खर्च राजस्व व्यय माना जाएगा।



कूलर, पंखे जैसे कम समय चलने वाले सामान अब संपत्ति नहीं गिने जाएंगे। इससे छोटे-छोटे हिस्सों में बड़ी खरीद दिखाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। यानी बजट का दुरुपयोग रोकने में भी मदद मिलेगी। इससे सरकारी खर्च में सटीकता और जवाबदेही दोनों बढ़ेगी।



बजट कोडिंग में भी होगा सुधार

एमपी सरकार एमपी बजट 2027-28में इस्तेमाल होने वाले 52 पुराने कोड भी हटा रही है। पहले कई बजट शीर्षों के अंत में '000' कोड लगता था। अब नई कोडिंग व्यवस्था में आवंटन '001' से शुरू होगा। पुराने '000' कोड सिर्फ पुराने साल के रिकॉर्ड तक सीमित रहेंगे। इससे बजट का हिसाब-किताब ज्यादा साफ और आसान होगा। स्पष्ट कोडिंग से खर्च पर नजर रखना भी आसान हो जाएगा।



पेंशन-डिजिटल की अलग मद

अब बजट शीर्ष चार की जगह पांच अंकों के होंगे। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस (NPS) के लिए अलग शीर्ष तय होगा। एकीकृत पेंशन योजना यानी यूपीएस (UPS) के लिए भी अलग मद बनेगी।



डिजिटल उपकरणों की खरीद के लिए भी नई अलग मद बनाई जाएगी। इससे हर खर्च की सही पहचान करना आसान होगा। साइकिल और टाइपिंग मशीन जैसी पुरानी अप्रासंगिक मदें भी हटाई जाएंगी। इन्हें मिलती-जुलती योजनाओं के साथ मिला दिया जाएगा। इससे बजट का ढांचा भी हल्का और व्यवस्थित बनेगा।



आम जनता के लिए क्या मायने

आम नागरिकों के लिए यह बदलाव सीधे जुड़ा हुआ माना जा रहा है। सरकारी खर्च का बड़ा हिस्सा टैक्सदाताओं की कमाई से ही आता है। भत्तों में कटौती से यह पैसा अब दूसरे जरूरी कामों में लग सकेगा। बजट में पारदर्शिता आने से खर्च का हिसाब समझना भी आसान होगा। इससे आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी बढ़ सकता है।



आगे क्या होगा

यह नई व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट से लागू होगी। इससे पहले सभी विभागों को नई कोडिंग व्यवस्था अपनानी होगी। अधिकारियों को खर्च के वर्गीकरण की नई ट्रेनिंग भी दी जा सकती है। शुरुआती दौर में कुछ तकनीकी दिक्कतें आने की भी आशंका है। लेकिन दीर्घकाल में इससे सरकारी खर्च में अनुशासन बढ़ने की उम्मीद है।



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