भवन विकास निगम में करोड़ों के टेंडर में झोल, खास ठेकेदार के लिए नियम नहीं, आंखें बंद!

Ramanand Tiwari | Apr 24, 2026, 11:47 IST
mp building development corporation
MPBDC एक बार फिर टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवालों में है। भोपाल में करीब ₹30 करोड़ के कन्या शिक्षा परिसर निर्माण टेंडर में टेक्निकल बिड में अधूरे दस्तावेज वाले ठेकेदारों को भी क्वालीफाई कर दिया गया है।

मध्य प्रदेश भवन विकास निगम (MPBDC) के जिम्मेदार अधिकारियों, ईएनसी अजय श्रीवास्तव और जीएम (टेक्निकल) रामबाबू तिवारी पर जब सवाल उठे, तो उन्होंने अपनी गलती छिपाने के लिए टेंडर खुलने के बाद दस्तावेजों की कमी पूरी करवा दी।



बता दें कि टेंडर के बाद किसी भी दस्तावेज में बदलाव या कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। मतलब, जो डॉक्यूमेंट्स ई-टेंडर में अपलोड किए गए थे, उसी के आधार पर यह तय होता है कि ठेकेदार क्वालीफाई करेंगे या नहीं।



क्या है मामला

बीडीसी ने भोपाल में कन्या शिक्षा परिसर बनाने के लिए करीब 30 करोड़ का टेंडर निकाला था। इसमें 11 ठेकेदार शामिल हुए थे।



इस टेंडर में एक शपथ पत्र का प्रोफार्मा दिया गया था। इसमें बोल्ड अक्षरों में लिखा था कि ठेकेदार शपथ पत्र को नोटरी के डिस्पैच नंबर के साथ ही देंगे, ऐसा न करने पर टेंडर निरस्त किया जा सकता है। फिर भी 11 में से 4 ठेकेदारों ने शपथ पत्र नोटरी से डिस्पैच करवाकर नहीं दिए।



सूत्र बताते हैं कि टेंडर (ई टेंडर) खुलने के समय कमेटी के कुछ सदस्यों ने डिस्पैच नंबर न होने के कारण इन चारों ठेकेदारों को डिसक्वालीफाई करने की बात कही थी।



इसके बाद कमेटी के चेयरमैन श्रीवास्तव ने इनमें से एक ठेकेदार को बीडीसी एमडी का करीबी बताकर कहा कि इसे डिस्क्वालीफाई नहीं कर सकते।



इसके बाद कमेटी ने रास्ता निकाला कि इन सबसे डिस्पैच नंबर का क्लीयरिफिकेशन लेकर और क्वालीफाई कर देते हैं। ऐसे में बीडीसी के एमडी के चहेते ठेकेदार को क्वालीफाई करने के फेर में बाकी 3 ठेकेदार भी क्वालीफाई किए गए।



अब एक लाइन से बचने का प्रयास

गलत तरीके से टेंडर में 4 ठेकेदारों को क्वालीफाई करने का मामला चर्चा में आया है। कमेटी के अधिकारियों ने शपथ पत्र के प्रोफार्मा में बोल्ड शब्दों में लिखी शर्त का दूसरा मतलब निकालने का प्रयास किया है।



ये है वो शर्त


English Clause:


"Please ensure that the Notary Dispatch No. is included on the affidavit, otherwise it may be liable for disqualification."



हिंदी में अर्थ:


"कृपया सुनिश्चित करें कि शपथ पत्र पर नोटरी प्रेषण संख्या अंकित हो, अन्यथा इसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।"



03fbace5-906


44267b1f-153


अब कमेटी के अधिकारी कह रहे हैं कि इसमें लिखा है कि डिस्पैच नंबर न होने पर ठेकेदार को अयोग्य घोषित किया जा सकता है, ये नहीं लिखा कि किया जाएगा। इसलिए कमेटी ने तय किया कि क्लियरिफिकेशन लेकर क्वालीफाई किया जाए।



वहीं जब उनसे ये सवाल पूछा गया कि जब डिस्पैच नंबर इतना महत्वपूर्ण नहीं था तो टेंडर के साथ दिए गए गौड़ प्रोफार्मा में इसे बोल्ड क्यों किया गया, तो इस पर कोई सटीक जवाब नहीं दे पाए।



क्यों जरूरी है डिस्पैच नंबर

डिस्पैच नंबर जरूरी है क्योंकि कई बार यह सामने आया है कि ठेकेदार टेंडर पाने के लिए फर्जी शपथ पत्र लगा देते हैं और गलत जानकारी देते हैं। ऐसे में विभाग ने फैसला किया है कि सिर्फ वही ठेकेदार योग्य माने जाएंगे, जिन्होंने शपथ पत्र को नोटरी से डिस्पैच करवाकर लाया हो। इस तरीके से अगर कोई गलत जानकारी देता है, तो नोटरी करने वाला वकील भी जिम्मेदार होगा।



क्या बोले जिम्मेदार

ईएनसी अजय श्रीवास्तव और टेंडर कमेटी के चेयरमैन का कहना है कि मैं छुट्टी पर हूं, कमेटी निर्णय लेती है। मेरा रोल बाद में आता है। बता दें कि दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं।



जीएम (टेक्निकल) रामबाबू तिवारी ने कहा कि शपथ पत्र के प्रोफार्मा में “liable” लिखा है, मतलब निरस्त करना जरूरी नहीं। उन्होंने बताया कि जिनके डिस्पैच नंबर नहीं थे, उनसे बाद में मंगवा लिए।



जब तिवारी से पूछा गया कि क्या ऐसा नियम है?



तो वे जवाब बदलते रहे....पहले कहा: हमने मंगवाए हैं। फिर कहा: वेंडर ने खुद दे दिए हैं।



यहीं से प्रक्रिया पर शक और गहरा हो जाता है कि क्या निगम द्वारा नियमानुसार टेंडर खोले जा रहे हैं या नहीं।



c73da71f-0ef


53df06d3-6d7


इन चार ठेकेदारों ने नहीं दिए डिस्पैच

  • हरगोविंद गुप्ता
  • एनवी गुप्ता
  • राजीव गुप्ता
  • सहिता कंस्ट्रक्शन कंपनी

आगे क्या?

अब फाइनल बिड खुलनी है। नजर इस बात पर है कि क्या पूरे टेंडर को निरस्त किया जाएगा? या इसी प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा?



ये खबरें भी पढ़ें...

ESB में फर्जी डिग्री वाले हो रहे चयनित, नगर निगमों में फर्जी नियुक्ति



MP मेडिकल यूनिवर्सिटी में बिना टेंडर 2.86 करोड़ का भुगतान, ऑडिट रिपोर्ट से खुली पोल



अब शराब टेंडर में भाग ले सकेगी सोम डिस्टलरी, हाईकोर्ट से फौरी राहत; लाइसेंस पर अब भी संकट



टेंडर पाने की जिद में तड़पती सोम डिस्टिलरीज, कोर्ट से मिल रहे एक के बाद एक झटके, अब डिविजनल बेंच में टिकी नजर



Tags:
  • ई टेंडर
  • मध्य प्रदेश भवन विकास निगम