एमपी कैबिनेट: मध्यप्रदेश में सीधे होगी डॉक्टरों की भर्ती, बदले नियुक्ति के नियम
मध्यप्रदेश कैबिनेट ने स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया आसान कर दी है। पहले यह भर्ती सिर्फ लोक सेवा आयोग के जरिए होती थी। इसमें काफी समय लगता था। अब स्वास्थ्य विभाग हर महीने खुद भर्ती कर सकेगा। चुने गए डॉक्टरों को पहली पोस्टिंग पर तीन साल तक रहना होगा।
भोपाल में बुधवार को मोहन यादव कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया गया। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी लंबे समय से बनी हुई थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए भर्ती नियमों में बदलाव किया गया।
पहले कैसे होती थी भर्ती
अब तक स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भर्ती सिर्फ मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (PSC – Public Service Commission) के जरिए होती थी। यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया थी। आयोग को विज्ञापन जारी करने से लेकर परीक्षा और परिणाम तक कई चरण पूरे करने होते थे।
इस पूरी प्रक्रिया में अक्सर महीनों नहीं बल्कि सालों लग जाते थे। नतीजा यह होता था कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के सैकड़ों पद खाली रह जाते थे। मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था। ग्रामीण और छोटे शहरों के अस्पताल सबसे ज्यादा प्रभावित होते थे।
अब क्या बदलाव हुआ है
कैबिनेट ने भर्ती नियमों में संशोधन कर दिया है। अब स्वास्थ्य विभाग खुद सीधे भर्ती कर सकेगा। इसके लिए लोक सेवा आयोग पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। हर महीने ऑनलाइन आवेदन मंगाए जाएंगे।
आवेदन के बाद हर महीने ही इंटरव्यू भी आयोजित होंगे। इससे भर्ती प्रक्रिया में लगने वाला समय बहुत कम हो जाएगा। इच्छुक डॉक्टर बिना लंबा इंतजार किए आवेदन कर सकेंगे। यह प्रक्रिया साल भर लगातार चलती रहेगी, न कि सीमित मौकों पर।
तीन साल की पोस्टिंग अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत चुने गए डॉक्टरों को एक शर्त भी माननी होगी। उन्हें अपनी पहली पोस्टिंग पर कम से कम तीन साल तक काम करना होगा। यह नियम खासतौर पर इसलिए बनाया गया है ताकि दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों को भी विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकें।
अक्सर देखा गया है कि डॉक्टर बड़े शहरों की पोस्टिंग को प्राथमिकता देते हैं। इस शर्त से छोटे जिलों और गांवों के अस्पतालों में भी नियमित रूप से विशेषज्ञ सेवाएं मिल सकेंगी। मरीजों को इलाज के लिए दूर जाने की जरूरत कम होगी।
इस फैसले से किसे फायदा होगा
यह फैसला सीधे तौर पर मेडिकल क्षेत्र के युवा विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए राहत भरा है। उन्हें अब सरकारी नौकरी पाने के लिए सालों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही आम जनता को भी इसका फायदा मिलेगा।
सरकारी अस्पतालों में जब खाली पद जल्दी भरे जाएंगे, तो मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सकेगा। खासकर उन इलाकों में जहां अब तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी रही है। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य विभाग जल्द ही नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सकता है। पहले महीने के आवेदन और इंटरव्यू की तारीखें आधिकारिक रूप से घोषित होने का इंतजार रहेगा। आने वाले महीनों में यह देखा जाएगा कि इस बदलाव से कितने पद वास्तव में भरे जाते हैं।
लोकल कनेक्शन
यह खबर पूरी तरह मध्यप्रदेश से जुड़ी है। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा। खासकर ग्रामीण और छोटे जिलों के अस्पतालों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।
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