वल्लभ भवन में टाइम की सख्ती: कर्मचारियों की अटेंडेंस पर सीएम-सीएस की नजर, क्या बदलेगा सिस्टम?

Ramanand Tiwari | Feb 26, 2026, 11:37 IST
mp cm mohan yadav vallabh bhawan attendance drive administrative reforms
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन भले ही आज भोपाल से बाहर दौरे पर हैं। वहीं, उनकी नजरें राजधानी के सबसे अहम दफ्तरों पर टिकी हैं।

BHOPAL. सीएम मोहन यादव ने कार्यालयों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक अधिकारियों-कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति की जांच के निर्देश दिए हैं।



यह निर्देश वल्लभ भवन, विंध्याचल और सतपुड़ा कार्यालयों के लिए जारी किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग को स्पष्ट कहा गया है कि आने-जाने का समय और अनधिकृत अनुपस्थिति की पूरी रिपोर्ट तैयार की जाए।



क्या हैं मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश?

  • सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उपस्थिति की निगरानी की जाए।
  • आने और जाने के समय का रिकॉर्ड बताया जाए।
  • अनधिकृत अनुपस्थित कर्मचारियों की अलग सूची बनाई जाए।
  • सामान्य प्रशासन विभाग की विशेष टीमें तीनों भवनों में तैनात रहें।
  • वरिष्ठ अधिकारियों को भी जांच की सूचना दे दी गई है।

यह कदम प्रशासनिक अनुशासन को सख्त करने की दिशा में शुरुआती संकेत माना जा रहा है।



आखिर क्यों पड़ी इस कार्रवाई की जरूरत?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वल्लभ भवन के कई अधिकारी और कर्मचारी अक्सर देर से दफ्तर पहुंचते हैं। इतना ही नहीं, दोपहर के लंच ब्रेक में तय समय से ज्यादा बाहर रहने की शिकायतें भी आम हैं।



विंध्याचल के बाहर होटलों और आसपास के इलाकों में कर्मचारियों की मौजूदगी की चर्चा लंबे समय से होती रही है। ऐसे में सवाल उठता रहा कि क्या राजधानी का प्रशासनिक ढांचा समय अनुशासन को लेकर ढीला पड़ गया है?



सिस्टम पर असर: क्या एक दिन की कार्रवाई काफी है?

यह पहल सकारात्मक संकेत देती है कि शीर्ष नेतृत्व प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को लेकर गंभीर है। कम से कम शुरुआत तो हुई है। वहीं बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ एक दिन की छापामार कार्रवाई से हालात बदलेंगे? यदि यह अभियान नियमित और निरंतर नहीं हुआ, तो असर सीमित रह सकता है।



प्रशासनिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अनुशासन की संस्कृति रोजमर्रा की निगरानी से बनती है, न कि प्रतीकात्मक कार्रवाई से।



जवाबदेही की ओर कदम

  • कर्मचारियों में समयपालन को लेकर संदेश जाएगा।
  • जनता के कामकाज की गति सुधर सकती है।
  • शीर्ष स्तर से स्पष्ट संकेत- लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
  • प्रशासनिक सुधार की दिशा में शुरुआत।
  • यह पहल सरकारी दफ्तरों की कार्यसंस्कृति को मजबूत कर सकती है। यदि इसे अभियान की तरह चलाया जाए।

क्या यह सिर्फ संदेश भर है?

एक दिन की जांच से स्थायी बदलना मुश्किल है। यदि कार्रवाई के बाद फॉलो-अप नहीं हुआ, तो प्रभाव घट सकता है। सिस्टम में मौजूद ढिलाई पर सुधार की जरूरत है।



कई कर्मचारियों का मानना है कि पारदर्शी बायोमेट्रिक मॉनिटरिंग और नियमित ऑडिट जैसे स्थायी उपाय ज्यादा कारगर होंगे।



आगे क्यों है बड़ी जरूरत?

भोपाल के ये तीनों भवन राज्य प्रशासन का केंद्र हैं। यहां से पूरे प्रदेश के फैसले और फाइलें संचालित होती हैं। यदि यहीं समय अनुशासन कमजोर रहेगा, तो नीचे तक गलत संदेश जाएगा।



इसलिए जरूरी है कि समय पालन सिर्फ आदेश न रहे, बल्कि आदत बने। प्रशासन की विश्वसनीयता और जनता का भरोसा इसी से जुड़ा है।



शुरुआत हुई है, परिणाम भविष्य बताएगा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह पहल एक सख्त संदेश जरूर देती है कि सरकार कामकाज की संस्कृति में सुधार चाहती है। अब नजर इस बात पर है कि यह छापामार जांच एक दिन की कार्रवाई बनकर रह जाती है या फिर नियमित अनुशासन अभियान में बदलती है। क्योंकि बदलाव आदेश से नहीं, निरंतरता से आता है।



ये खबर भी पढ़िए...



अब आग पर सख्ती की तैयारी: एमपी में 3 माह में आएगा नया फायर सेफ्टी कानून



निगम मंडल में नियुक्ति के जरिए बीजेपी का इलेक्शन प्लान तैयार, इन दिग्गजों को नहीं मिलेगा मौका?



मध्यप्रदेश में भर्ती सिस्टम पर CAG की कड़ी टिप्पणी : 44 में से 16 परीक्षाएं अटकी, हजारों पद खाली



MP News: एमपी के सरकारी दफ्तरों में चल रहा बड़ा खेल, क्यों गायब हो रही फाइल



Tags:
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
  • MP News
  • मध्यप्रदेश
  • सीएम मोहन यादव
  • वल्लभ भवन