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Photograph: (the sootr)
News in Short
- बीजेपी निगम मंडल की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रही है।
- गोपाल भार्गव, अजय विश्नोई जैसे दिग्गज नेताओं को इस बार मौका नहीं मिलने की संभावना है।
- पार्टी युवा और तजुर्बेकार चेहरों को निगम मंडल में जगह दे रही है।
- बीजेपी कांग्रेस की सीटों पर अपने नेताओं को नियुक्त कर दबदबा बनाने की योजना बना रही है।
- निगम मंडल की नियुक्ति से पार्टी के चुनावी समीकरण मजबूत होने की उम्मीद है।
News In Detail
गोपाल भार्गव, अजय विश्नोई, भूपेंद्र सिंह जैसे कई नेताओं को एक बार और निराशा हाथ लगने वाली है। पिछले कुछ दिनों से लगातार ये खबरें तेज हैं कि मध्यप्रदेश में निगम मंडलों में नियुक्ति जल्द होने वाली है। शायद होली से पहले या होली के कुछ दिन बाद हो ही जाए।
ये अंदाजा तो सभी लगा रहे हैं पर, मैं आपको सिर्फ निगम मंडल की नियुक्ति का समय ही नहीं बताउंगा। ये भी बताउंगा कि इस बार निगम मंडल में किसे मौका मिल सकता है और किसे नहीं। क्योंकि बीजेपी ने इस बार लाभ के पदों पर नियुक्ति का पूरा फॉर्मेट ही बदल दिया है।
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निगम मंडल में नियुक्ति के लिए भेजी लिस्ट
बीजेपी में हर काम बहुत ठोक बजाकर होता है और थ्रू प्रोपर चैनल होता है। यानी जब नई टीम बनती है तो उससे पहले आला स्तर पर नेताओं का चुनाव होना है। लंबे समय से बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष और अध्यक्षों का चुनाव नहीं हो पा रहा था। इस वजह से मध्यप्रदेश में निगम मंडलों की नियुक्ति भी अटकी हुई थी। अब मप्र को नए प्रदेशाध्यक्ष मिल चुके हैं और नितिन नबीन नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं। जिसके बाद बाकी कामों में तेजी आने लगी है। पिछले कई समय से निगम मंडल की नियुक्ति अधर में थी, उसका भी काम शुरू हो चुका है। अंदर की खबर ये है कि मध्यप्रदेश बीजेपी ने निगम मंडल में नियुक्ति के लिए लिस्ट भेज दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि होली से पहले ही या उसके चंद रोज बाद ही इस लिस्ट का ऐलान हो जाएगा।
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मंत्री न सही मंत्री दर्जे के पद की आस-
थोड़ा इंतजार इसलिए कि बीजेपी एक एक नाम पर सोच समझकर फैसला लेती है। हर फैसले के पीछे ये भी जरूर चेक करती है कि उससे पार्टी को कितना वेटेज मिलेगा। इसलिए ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि हेमंत खंडेलवाल की भेजी लिस्ट पर जमकर मंथन हो ही रहा होगा। इस खबर के बाद से उन नेताओं में फिर से उम्मीद की किरण जाग गई होगी जो इन नियुक्तियों के इंतजार में थे। इस आस के साथ कि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह न सही मंत्री दर्जे के बराबर का कोई पद ही मिल जाएगा।
ये फेहरिस्त काफी लंबी भी है जिसमें गोपाल भार्गव, अजय विश्नोई, भूपेंद्र सिंह, अऱविंद सिंह भदौरिया, जयंत मलैया जैसे कई नाम हैं। इसके अलावा बहुत से सिंधिया समर्थक ऐसे हैं जो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। जिसमें मुन्नालाल गोयल, इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया, बृजेंद्र सिंह यादव जैसे नाम शामिल हैं। इसके बाद बात करते हैं उन नेताओं की जो कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए लेकिन उन्हें अब तक कुछ हासिल नहीं हुआ है। उन्हें भी किसी न किसी लाभ की उम्मीद जरूर होगी। जैसे राम निवास रावत, कमलेश शाह, जिन्होंने सबसे पहले कमलनाथ के गढ़ को कमजोर करने का काम किया था।
कई पूर्व मंत्री और सीनियर विधायक कतार में
लगातार विधायक बन रहे कुछ नेता भी जीत का सिला हासिल करना चाहते हैं। इस लिस्ट में भी हम जयंत मलैया, गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह सरीखे नेताओं को रख ही सकते हैं। इसके अलावा ब्रजेंद्र प्रताप सिंह भी हैं जो पांच बार के विधायक हैं, दो बार मंत्री रह चुके हैं। हरिशंकर खटीक भी पूर्व मंत्री हैं, चार बार के विधायक हैं और बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष के तौर पर संगठन में सक्रिय हैं। अर्चना चिटनिस को भी नहीं भुलाया जा सकता, जो पहले कैबिनेट में अहम पद संभाल चुकी हैं।
बहुत सारे दिल टूटने वाले हैं
ऐसे बहुत सारे नेता हैं, जो इन पदों पर नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, जिसकी वजह से संगठन पर भी दबाव बना हुआ था. लेकिन सबकी उम्मीद पूरी होगी ये कहना मुश्किल है। बल्कि बीजेपी जिस फॉर्मूले के साथ नई नियुक्तियां कर सकती है। उसे देखकर लगता है कि बहुत सारे दिल टूटने वाले हैं।
असल में बीजेपी को इन नियुक्तियों के जरिए बहुत सारे समीकरण भी साधने हैं, जिसमें क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक समीकरण शामिल हैं। इसलिए पार्टी ने तय किया है कि किसी पुराने नेता के दबाव में आकर या दिग्गजों के प्रेशर में आकर कोई फैसला नहीं होगा। जो जिस काबिल होगा उसको उसके अनुसार नियुक्ति मिल जाएगी। बीजेपी निगम मंडलों में नियुक्ति को चुनावी एजेंडे की तरह देख रही है। इसलिए इससे जुड़ा एक एक फैसला चुनावी ही होगा।
सारी जमावट चुनाव के लिए
बीजेपी का मकसद है कि वो निगम मंडल के जरिए युवा और तजुर्बेकार दोनों तरह की लीडरशिप को आगे बढ़ा सके। ऐसे चेहरों को जगह दे सके जो क्षेत्रीय और जातीय समीकरण पर खरे उतरे। राजनीतिक लिहाज से देखें तो चुनाव भी अब बहुत दूर नहीं है। सारी जमावट चुनाव को ध्यान में रखते हुई ही होगी। इसलिए बीजेपी सिर्फ ओब्लाइज करने के लिए या फिर पुराने नेताओं के रिहेब्लिटेशन के लिए ये लिस्ट जारी नहीं करेगी।
विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना तय!
बीजेपी का विजन एकदम साफ है और फॉर्मूला बिलकुल फिक्स। इस बार निगम मंडलों में ऐसे नेताओं को मौका देगी जो किसी पद पर न हो। यानी कि मौजूदा विधायकों को निगम मंडल में पद मिलना मुश्किल है। भले ही वो खुद को मंत्री दर्जे का कितना भी बड़ा दावेदार क्यों न समझते हों। इसलिए मैंने चंद विधायकों के नाम गिनाए, जिनकी उम्मीद एक बार फिर धराशाई हो सकती है। ऐसे नेता भी कोई उम्मीद न रखें, जिन्हें अगले विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना अभी से तय माना जा सकता है।
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बीजेपी चुनावी जमावट के मूड में
और, बीजेपी का जो सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक कह सकते हैं, वो है कांग्रेस की सीटों को टारगेट करना। तकरीबन 30 से 35 निगम मंडल सहित प्राधिकरणों के पद भरने के लिए ऐसा नेताओं को चुना जाएगा जो कांग्रेस की सीटों पर एक्टिव है। पिछले विधानसभा चुनाव में जहां जहां कांग्रेस जीती और तमाम ताकत झाेंक देने के बाद भी बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा।
अब उन सीटों के चेहरों को निगम मंडल में जगह दी जाएगी, ताकि उस सीट पर बीजेपी का दबदबा बन सके। कुछ मिलाकर बीजेपी चुनावी जमावट के मूड में आ चुकी है। इसलिए सारे फैसले जीत से जोड़कर ही लिए जाएंगे। एक और बड़ा फैसला ये है कि बीजेपी कुछ चरणों में लिस्ट जारी नहीं करेगी। बल्कि एक झटके में सारे निगम मंडलों की लिस्ट जारी हो सकती है। ताकी शिकवे शिकायतों की कोई जगह ही न बचे। हम ये भी कह सकते हैं कि निगम मंडल की लिस्ट जारी होने के साथ ही बीजेपी की चुनाव रणनीति की झलक भी देखने को मिल ही जाएगी।
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