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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में टैलेंट हंट अभियान शुरू किया, नए नेताओं की तलाश की जा रही है।
- पार्टी ने साहित्यिक और रचनात्मक कामों के लिए भी टैलेंट खोजने की योजना बनाई है।
- कांग्रेस के टैलेंट हंट पर सवाल उठ रहे हैं, क्या यह पार्टी के लिए फायदेमंद होगा?
- मनीष गुप्ता ने नगर निगम के फैसले से नाराज होकर सड़कों पर रोकर प्रदर्शन किया।
- मनीष गुप्ता का प्रदर्शन कांग्रेस की ही नगर सरकार के खिलाफ था, जिससे पार्टी की किरकिरी हुई।
News In Detail
NEWS STRIKE | न्यूज स्ट्राइक: कांग्रेस को मध्यप्रदेश में कैसा नेता चाहिए..अचानक मैं ऐसे सवाल क्यों पूछ रहा हूं। यही सोच रहे हैं आप भी। इन सवालों की वजह है कांग्रेस का एक नया फरमान। कांग्रेस ने नए नेता छांटने के लिए जो आइडिया निकाला है। उसे सुनकर आप भी शायद ऐसे ही सवाल करें। या ये सोचने लग जाएं कि कांग्रेस भी इंडियाज गॉट टैलेंट जैसा कोई रियलिटी शो लेकर आ सकती है। इसी फरमान के बीच एक कांग्रेसी नेता का रोना धोना देख शायद आपको ये भी लग जाए कि कुछ कांग्रेसियों ने तो ऑडिशन देना भी शुरू कर दिया है।
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लीडरशिप बदलने के बाद भी कांग्रेस उदास
कांग्रेस लीडरशिप बदलने के अलावा मध्यप्रदेश में अब तक कुछ खास कर नहीं पाई है। आलाकमान भी बैठक में इस बात को लेकर परेशान हैं कि इतनी कोशिशों के बावजूद यहां पार्टी के हालात बदलने को तैयार नहीं हैं। जीतू पटवारी और उमंग सिंगार जैसे युवा नेताओं के हाथ में कमान सौंपने के बावजूद मध्यप्रदेश में कांग्रेस उदास, थकी हुई और सुनसान सी नजर आती है। कुछ हो हल्ला होता है तो वही पुराने घिसे पिटे प्रदर्शन के अंदाज में। तब थोड़ा एग्रेशन नजर आता है। उसके बाद वही ढाक के तीन पात। ऐसे में कांग्रेस आने वाला चुनाव भी जीत ले तो बड़ी बात है।
कांग्रेस का टैलेंट हंट: एक नया आइडिया
कांग्रेस भी शायद मुफीद नेता तलाश तलाश कर थक चुकी है। इसलिए टीवी पर आने वाले रियलिटी शो की तरह टैलेंट हंट करने का फैसला कर चुकी है। नहीं.. नहीं.. मैं कोई मजाक नहीं कर रहा हूं. ये बिलकुल सच है। कांग्रेस अब टैलेंट हंट करने वाली है। कांग्रेस ने टैलेंट हंट से जुड़ा फरमान जारी करने से पहले एक सख्त फैसला लिया और अचानक अपने मीडिया विभाग के सभी प्रवक्ताओं को काम से मुक्त कर दिया। इसके बाद टैलेंट हंट के आशय वाला एक मजमून भी जारी कर दिया। इस लेटर को गौर से देखिए, खुद कांग्रेस ने इसका विषय बताया है संगठन के लिए प्रतिभा खोज अभियान, जिसके ब्रेकेट में लिखा है टैलेंट सर्च। इस लेटर में दो प्वाइंट्स हैं पहला है संगठन के लिए, जिसके लिए शर्त है कि वो साथी जो खुद चुनावी प्रक्रिया से दूर रह कर पार्टी के संगठन से जुड़े काम को दिल से अंजाम दे सकें।
दूसरे प्वाइंट में हैं साहित्यिक और रचनात्मक कामों के लिए। जिसकी शर्तों में शामिल है गाना गाना, कोई म्यूजिकल इंस्टूमेंट बजाना, लेखना, कविता, मुहावरे, शायरी, नारे बनाने जैसा कोई भी काम आता हो तो कांग्रेस में उसका स्वागत होगा। तो क्या आप कांग्रेस के इस टैलेंट हंट में जाने में इंटरेस्टेड हैं। अगर हां तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए और, अगर नहीं तो कमेंट बॉक्स में कारण भी बताइए।
कांग्रेस बताए टैलेंट मापने का पैमाना क्या?
अब आगे बात करते हैं, पिछले कुछ सालों से देश का माहौल ऐसा है कि कांग्रेस कुछ भी नया करती है उसका माखौल बन ही जाता है। ऐसे में कांग्रेस खुद ही ऐसा फरमान कैसे जारी कर सकती है कि वो टैलेंट सर्च करने वाली है। इस तरह पार्टी को नौटंकीबाज नेता मिलेंगे या फिर काम करने वाले सीरियस नेता मिलेंगे।
इस फरमान में कांग्रेस को ये भी बताना चाहिए था कि किसी भी व्यक्ति का टैलेंट मापने का पैमाना क्या होगा। क्योंकि टैलेंट तो एक ऐसी चीज है जो व्यक्ति दर व्यक्ति बदलता है और उसे पसंद करने के लिए सबके तर्क भी अलग अलग होते हैं। तो क्या कांग्रेस ने ऐसे कोई स्टैंडर्ड भी तय किए हैं जो असली टैलेंट निकलकर उनके पास आ जाए। टीवी पर आने वाले रियलिटी शो तो वैट्स के बेसिस पर टैलेंट का चुनाव कर लेते हैं। लेकिन कांग्रेस ऐसे किसी सिस्टम से तो टैलेंट सर्च नहीं कर सकती न। क्योंकि कांग्रेस को चुनावी जीत चाहिए टीआरपी नहीं।
और इसकी क्या गारंटी है कि जो टैलेंट इस सर्च अभियान के बाद निकलकर सामने आएगा वो वाकई पार्टी के लिए फायदेमंद ही होगा। क्या कांग्रेस के पास असल तरीके से नए नेता तलाशने की कैपेसिटी भी खत्म हो चुकी है।
स्टूडेंट पॉलिटिक्स ने दिए कई लीडर
एक दौर ऐसा भी था जब स्टूडेंट पॉलिटिक्स के जरिए लीडरशिप तैयार होती थी। कांग्रेस में ही खंगाले तो ऐसे कई नाम मिल जाएंगे जिनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ और आगे बेहद सक्सेसफुल भी रहा। क्या नई पीढ़ी में कांग्रेस को वो सियासी टैलेंट नजर नहीं आ रहा। जो जमीनी रूप से मुद्दों की समझ रखते हों और उनके लिए आवाज उठाना भी जानते हों या तैयार रहते हों। या कांग्रेस ये मान चुकी है कि रील युग में रियल वोटर्स को खींचना है तो सोशल मीडिया पर सॉलिड मुद्दों से ज्यादा कुछ इंटरेस्टिंग ही परोसना होगा।
कांग्रेस ने जो भी सोचा हो लेकिन इस फरमान के बीच इत्तेफाकन एक और घटना नजर आई। वैसे तो दोनों का कोई कनेक्शन नहीं है, फिर भी बात टैलेंट हंट की हुई और एक नेताजी का वीडियो वायरल हुआ तो मुझे लगा कि आपको भी उसे देखना जरूर चाहिए।
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बीच सड़क पर मनीष गुप्ता का रोना-धोना
बीच सड़क पर फूट फूट कर रो रहे ये नेता हैं मनीष गुप्ता, जो कांग्रेस के प्रदेश महासचिव भी हैं। नेताजी बीच बाजार अपने साथियों से लिपट कर, दहाड़े मार मार कर खूब रोए। उन्हें देखकर लोग जहां थे वहीं ठिठक कर रह गए। रीवा नगर निगम के एक फैसले ने उन्हें इतना आहत किया कि वो रोते रहे... रोते रहे और कपड़े भी उतारने लगे। इस ड्रामे की वजह क्या थी... हर साल महाशिवरात्रि पर निकलने वाली शिव बारात।
असल में मनीष गुप्ता हर साल महाशिवरात्रि पर ये आयोजन करवाते हैं। इस बार भी प्लान बिलकुल पुख्ता थे, जिसके बैनर पोस्टर भी शहर में चस्पा हो चुके थे। लेकिन नगर निगम ने सारे बैनर पोस्टर हटवा दिए और कहा कि इसकी परमिशन नहीं ली गई है। नगर निगम के रवैये से नाराज नेताजी ने इस तरह रोना गाना किया।
कांग्रेस के अंदरूनी विवाद और नेता की सरेआम किरकिरी
नेताजी की भावनाओं का हम पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन क्या इस तरह रोएंगे गाएंगे और अपना वीडियो वायरल कराएंगे तो कुछ गंभीरता उसमें नजर आएगी। क्या लोग उन्हें ट्रोल नहीं करेंगे या तमाशबीन नहीं कहेंगे। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं, उसकी खास वजह है।
नेताजी जिस नगर निगम के खिलाफ रोना गाना कर रहे हैं, वहां कांग्रेस की ही सरकार है। यानी नेताजी अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में ये भी भूल गए कि वो अपनी ही पार्टी की नगर सरकार के खिलाफ इस तरह तमाशा कर रहे हैं। खबर है कि इस घटना के बाद महापौर ने माफी भी मांग ली। लेकिन तब तक कांग्रेस नेता अपनी ही नगर सरकार की किरकिरी करवा चुके थे।
धार्मिक भावनाओं में बह कर या फिर सुर्खियां बटोरने के लिए नेताजी ने ड्रामा करने का टैलेंट तो खूब दिखाया, लेकिन लेने के देने पड़ गए। इसलिए टैलेंट हंट पर निकली कांग्रेस को भी ठोक बजा कर नया टैलेंट छांटना होगा। क्योंकि टैलेंट अच्छा हुआ और राजनीतिक समझ न हुई, तो इसी तरह फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।
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