News Strike: चुनाव पास, कांग्रेस की चींटी चाल, संगठन का रोना, कब बदलेगा पार्टी का हाल?
Harish Divekar | Jan 30, 2026, 07:00 IST
Photograph: (thesootr)
कांग्रेस में संगठन सुधार पर मंथन जारी है। राहुल गांधी की रणनीति, कांग्रेस की आंतरिक कलह, और बीजेपी का हमला। कांग्रेस की स्थिति 2028 तक सुधार की राह में है।
News In Short
- कांग्रेस में आंतरिक समस्याएं, संगठन सुधार की आवश्यकता।
- राहुल गांधी की निगरानी रणनीति, सख्त रिव्यू प्रक्रिया।
- बीजेपी का हमला, कांग्रेस की आंतरिक कलह उजागर।
- उमंग सिंगार की स्वीकारोक्ति, संगठन को सुधारने की जरूरत।
- कांग्रेस का होमवर्क अधूरा, 2028 तक सत्ता वापसी मुश्किल।
News In Detail
ये सवाल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कांग्रेस आलाकमान को तो ऐसा कोई तरीका नहीं दिख रहा है। कांग्रेस कितनी हताश या निराश हो सकती है इसका अंदाजा चंद घंटे पहले हुई कांग्रेस की बैठक से लगा सकते हैं। इसमें शिकायतों के वही पुराने पुलिंदे खुले। नाराजगी का दौर भी चला, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं है और कांग्रेस अब तक लीडरशिप पर ही माथापच्ची कर रही है तो संगठन कैसे मजबूत होगा।
कांग्रेस रिव्यू: पुरानी शिकायतें, कोई नया हल नहीं
कॉरपोरेट सेक्टर्स की रिव्यू मीटिंग में तो बॉस नतीजा न मिलने पर अपना साथियों की जमकर क्लास तक लगा देता है। कांग्रेस की मीटिंग में भी ऐसा ही कुछ हुआ। अंतर सिर्फ इतना था कि मीटिंग का बॉस यानी कि आलाकमान सिर्फ पुरानी बातों को याद कर नाराजगी जताते रहे। प्रदेश प्रभारी ने वही पुरानी शिकायत दर्ज करवाई और ताजा फैसलों पर भी नतीजा सिफर ही रहा।
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राहुल गांधी ने जीतू पटवारी से जताई नाराजगी
सूत्रों की माने तो खुद राहुल गांधी जीतू पटवारी से नाराजगी जता चुके हैं। राहुल गांधी की नाराजगी पर विस्तार से बताऊं उससे पहले याद दिला देता हूं शिवराज सरकार में हुआ किसान आंदोलन। जो मंदसौर गोली कांड के नाम से मशहूर हुआ। इस गोलीकांड के पीड़ितों से मिलने के लिए राहुल गांधी छुपते छुपाते मंदसौर आए थे। उन्हें बाइक पर बिठाकर मंदसौर तक लाए थे जीतू पटवारी। प्रशासन को इसकी कानों कान भनक तक नहीं हो सकी थी।
शायद जीतू पटवारी के उसी जुझारूपन से राहुल गांधी इंप्रेस रहे होंगे और उन्हें प्रदेश के लिए मुफीद नेतृत्व समझा होगा, लेकिन अब वो इंप्रेशन बदलने लगा है। जो बैठक में भी साफ नजर आया।
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कांग्रेस की सख्त निगरानी, राहुल की नई रणनीति
मल्लिकार्जुन खरगे ने भी जिलाध्यक्षों की क्लास ली और टीम न बाने पाने के लिए लताड़ा। इन सबका नतीजा ये हुआ कि अब कांग्रेस ने ये फैसला लिया है कि सारे काम केंद्रीय टीम ही करेगी। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने प्रदेश नेतृत्व को साफ कर दिया है कि अब कांग्रेस आलाकमान खुद प्रदेश कांग्रेस के काम पर निगरानी करेंगे। मॉनिटरिंग सख्त होगी और रिव्यू भी ज्यादा हुआ करेंगे।
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बीजेपी का हमला: कांग्रेस आंतरिक कलह का शिकार
उमंग सिंगार के हवाले से छपा है कि उन्होंने मनमुटाव का मुद्दा उठाया। जिस पर जीतू पटवारी ने आश्वासन दिया कि सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। आशीष अग्रवाल ने इस पर कमेंट लिखा है कि कांग्रेस विपक्ष से ज्यादा आंतरिक कलह का संग्रहालय बन चुकी है।
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उमंग सिंघार ने माना, कांग्रेस संगठन को सुधारना जरूरी
उमंग सिंगार ने सच को मान लिया है, लेकिन उन्हें ये भी मानना होगा कि वो अब किसी बड़े नेता के पीछे चलने वाले जूनियर नेता या समर्थित नेता नहीं है। बल्कि खुद भी एक जिम्मेदार पोजीशन में है। बैठक में सिर्फ शिकायत करना उनका काम नहीं है। उन्हें सॉल्यूशन भी देना चाहिए। खुद उमंग सिंगार को ये सवाल अपने आप से पूछना चाहिए कि क्या कांग्रेस के पास संगठन को मजबूत करने का कोई ठोस आइडिया है।
अब चुनाव को सिर्फ दो ही साल दूर मानना चाहिए। क्योंकि चुनावी साल तो तैयारियों में ही बीत जाएगा। तब तक संगठन मजबूत हो जाना चाहिए और कांग्रेस तो अभी इस पर मंथन करने की बात कर रही है।
कांग्रेस का होमवर्क: 2028 तक सत्ता की उम्मीदें धुंधली
लोकसभा के बाद से अब तक जितने विधानसभा चुनाव हुए हैं। उसमें भी कांग्रेस पिछड़ती हुई ही नजर आई है। फिर होमवर्क कहां हो रहा है। ये होमवर्क कर कौन रहा है।
क्या कांग्रेस आलाकमान उस टीचर की तरह हो गए हैं जो बच्चों को होमवर्क न करने पर सख्त सजा देने की धमकी देता है, लेकिन तयशुदा वक्त पर खुद ही होमवर्क का पूछना भूल जाता है। अगर यही रवैया रहा तो कांग्रेस को 2028 तो क्या उसके बाद भी सत्ता में वापसी के सपने देखना भी छोड़ देना चाहिए।
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