News Strike: क्या मंत्री पद छोड़कर केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे कैलाश विजयवर्गीय?

कैलाश विजयवर्गीय मंत्री पद छोड़कर बड़ी जिम्मेदारी ले सकते हैं। बीजेपी उन्हें संगठन में अहम भूमिका दे सकती है, जो उनके अनुभव के अनुसार होगी।

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Harish Divekar
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Photograph: (thesootr)

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News In Short

कैलाश विजयवर्गीय मंत्री पद छोड़ सकते हैं, नई जिम्मेदारी की संभावना।
नितिन नबीन की टीम में मध्यप्रदेश का वेटेज बढ़ सकता है।
विजयवर्गीय का संगठन में अनुभव, बीजेपी को फायदा देगा।
केंद्रीय टीम में कैलाश विजयवर्गीय की भूमिका अहम हो सकती है।
कई नेता संगठन में जिम्मेदारी पाने के लिए तैयार हैं।

News In Detail

NEWS STRIKE (न्यूज स्ट्राइक): कैलाश विजयवर्गीय मंत्री पद छोड़ेंगे। चौंकिए नहीं हम आपको कोई इनफर्मेशन नहीं दे रहे हैं। हम आपको भविष्य की संभावना बता रहे हैं, लेकिन ये उनके लिए घाटे का सौदा नहीं होगा। बल्कि बीजेपी का ये नेता अपने हालिया पद से ज्यादा बड़े पद और ज्यादा बड़ी भूमिका में नजर आ सकते हैं। क्योंकि पार्टी अब उन्हें ऐसी जिम्मेदारी सौंप सकती है जो उनके तजुर्बे के अनुसार हों। सिर्फ कैलाश विजयवर्गीय ही नहीं प्रदेश के कुछ और नेताओं के दिन भी फिर सकते हैं।

विजयवर्गीय को मिलेगी नई बड़ी जिम्मेदारी!

आप पिछले कई समय से ऐसी खबरें पढ़ या सुन रहे होंगे कि मध्यप्रदेश के मुखिया मोहन यादव और सीनियर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच खटपट जारी है। इस खटपट के बीच खबर आ रही है कि कैलाश विजयवर्गीय एक और बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

हालांकि, वो उस जिम्मेदारी के साथ मंत्री पद पर बने रहेंगे या नहीं। ये नहीं कहा जा सकता। क्योंकि बीजेपी में एक व्यक्ति एक पद का ही सिद्धांत है। तो विजयवर्गीय अगर कोई नई जिम्मेदारी संभालते हैं तो जाहिर सी बात है कि उन्हें अपनी मौजूदा जिम्मेदारी को टाटा-टाटा, बाय-बाय करना होगा। वो जिम्मेदारी क्या होगी वो हो सकती है टीम नितिन नबीन में जगह।

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बीजेपी की नई टीम में मध्यप्रदेश का दबदबा

बीजेपी के नए अध्यक्ष की ताजपोशी होते ही ये अटकलें लगने लगी हैं कि अब उनकी टीम का कौन-कौन हिस्सा होंगे। नितिन नबीन के अनुभव को देखते हुए ये तय बात है कि उन्हें अपने साथ कुछ तजुर्बेकार चेहरों की जरूरत तो होगी ही। ये भी तय माना जा रहा है कि उनकी टीम में मध्यप्रदेश को अच्छा खासा वेटेज मिलेगा। क्योंकि मप्र वो प्रदेश है जिसने बीजेपी को लंबे अरसे से निराश नहीं किया है।

बीजेपी का लॉयल स्टेट होने के साथ-साथ मप्र बीजेपी की ऐसी लैबोरेटरी भी रहा है। जहां किया गया हर प्रयोग बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हुआ है और इस बार तो प्रदेश ने अपनी सारी लोकसभा सीटें भी बीजेपी के ही खाते में डाल दी हैं। ऐसे में नितिन नबीन की टीम में भी मप्र का दबदबा दिख सकता है। इस टीम के लिए सबसे आगे जो नाम बताए जा रहे हैं उन्हीं में से एक कैलाश विजयवर्गीय का भी नाम है।

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बीजेपी के तजुर्बेकार और प्रभावशाली नेता

यूं देखा जाए तो कैलाशजी बीजेपी के तजुर्बेकार नेता तो हैं ही, संगठन को संभालने और मजबूत बनाए रखने की भी कला उनके पास है। मप्र की राजनीति का दमदार चेहरा होने के साथ-साथ वो राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी उपयोगिता बार-बार साबित करते रहे हैं। उन्हें पार्टी ने पश्चिम बंगाल का जिम्मा सौंपा था। जिसके बाद वो एक गैर हिंदीवादी प्रदेश में बीजेपी के नंबर्स बढ़ाने में कामयाब रहे हैं।

इसके अलावा केंद्र में संगठन का जिम्मा संभालने का भी उनके पास अनुभव है। वो जेपी नड्डा की टीम में भी राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं। जिसे देखते हुए कहा जा सकता है कि वो दोबारा इस या ऐसे किसी पद पर नजर आएं तो हैरानी नहीं होगी। इसकी एक और वजह है विजयवर्गीय पार्टी के सीनियर नेताओं में से हैं। जिनकी धमक पूरे देश में बात चाहें उत्तरप्रदेश की हो, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ या किसी और हिंदीभाषी प्रदेश की हो। कैलाश विजयवर्गीय का नाम हर जगह जाना पहचाना है। 

विजयवर्गीय के अनुभव से बीजेपी को फायदा

सीनियर होने के नाते कैलाश विजयवर्गीय दूसरे प्रदेश के नेताओं को भी हैंडल करना खूब जानते हैं। ऐसे में नितिन नबीन की टीम में उनके होने से बीजेपी को ही फायदा होगा। इससे बीजेपी को भी दो फायदे होंगे। एक तो केंद्रीय टीम में उनके जैसा एक्सपीरियंस नेता होगा। दूसरा प्रदेश कैबिनेट में चल रहा कोल्ड वॉर भी काफी हद तक कंट्रोल में आएगा।

यानी बीजेपी के एक फैसले से दो काम आराम से पूरे और चोखे भी होंगे। विजयवर्गीय के संगठन में जाने के बाद पार्टी किसी और नेता को कैबिनेट में मौका दे सकती है। 

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केंद्रीय संगठन के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में

संगठन में जिम्मेदारी पाने इसके अलावा भी बहुत से नेता हैं जिनके नाम की चर्चा तेज है और वे इंतजार कर रहे हैं। अगर नितिन नबीन की टीम में पहले की तरह एमपी से दो महासचिव होते हैं तो कुछ और नामों को केंद्रीय संगठन में जाने का मौका मिल सकता है।

इसके अलावा करीब आधा दर्जन नाम ऐसे हैं जो इस रेस में काफी आगे चल रहे हैं। इनमें एक नाम पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया का है जो एक्टिव राजनीति से बाहर हैं। उन्हें अब तक कोई पद नहीं मिला है।

उनके अलावा कुछ जमीनी चेहरे भी इस टीम का हिस्सा बन सकते हैं। जिसमें रजनीश अग्रवाल, भक्ति शर्मा जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष के पद पर रहे वीडी शर्मा भी फिलहाल सांसद होने के अलावा संगठन के किसी अहम पद पर नहीं हैं। हो सकता है उन्हें भी मौका मिले। 

सुमेर सिंह सोलंकी, गजेंद्र पटेल, कविता पाटीदार ऐसे नाम बताए जा रहे हैं जो केंद्रीय संगठन में खास जगह हासिल कर सकते हैं। ताजा स्थिति की बात करें तो संसदीय बोर्ड में एसी का नेतृत्व कर रहे सत्य नारायण जटिया राष्ट्रीय संगठन में पहले से ही हैं। उनके अलावा लाल सिंह आर्य हैं जो अनुसूचि जाति मोर्चा के अध्यक्ष हैं, ओम प्रकाश धुर्वे भी हैं जो राष्ट्रीय सचिव हैं। यानी तीन लोग एमपी से पहले ही केंद्रीय संगठन का हिस्सा हैं। 

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मध्यप्रदेश के नेताओं को मिल सकता है वेटेज

अगर पिछला रिकॉर्ड देखें तो उससे यही अनुमान लगाया जा सकता है कि नितिन नबीन की टीम में मप्र का दम कम नहीं होगा। हो सकता है कुछ महिलाओं को भी मौका मिले। गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, अजय बिश्नोई, नरोत्तम मिश्रा जैसे कुछ चेहरे भी हैं जो किसी अदद पद की आस में है। क्या नई टीम में इन्हें कोई तवज्जो मिलेगी। ये भी देखना दिलचस्प होगा।

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