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Photograph: (thesootr)
NEWS STRIKE (न्यूज स्ट्राइक): राहुल गांधी के मप्र दौरे से बीजेपी में हलचल क्यों मची है। इंदौर के दूषित पानी मामले में राहुल गांधी कल यानी कि शनिवार को इंदौर आने वाले हैं। उनका जो प्लान फाइनल हुआ था प्रशासन ने उसमें से कुछ कार्यक्रमों को मंजूरी नहीं दी है। इसके बावजूद बीजेपी में ऐसी खलबलाहट है कि भागीरथपुरा का नजारा ही बदला हुआ है।
यही हाल कांग्रेस का भी है जो अब तक इस गंभीर मुद्दे में कुछ खास विरोध दर्ज नहीं करवा पाई है। क्या राहुल गांधी का ये दौरा सोई पड़ी कांग्रेस में कुछ जान फूंक सकेगा।
प्यास बुझाने से ज्यादा जान बचाने का डर
इंदौर के भागीरथपुरा के दूषित पानी मामले से आप अनजान नहीं होंगे। शासन और प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही की एक स्याल मिसाल बना है ये केस। जिसमें मौतों की संख्या गिन-गिन कर इंदौर के भागीरथपुरा में रहने वाले लोग थक चुके हैं।
इस घटना पर बहुत सारे सवाल हुए, लेकिन एक सवाल अब तक नहीं हुआ। वो ये कि क्या भागीरथपुरा और उसके समेत इंदौर के पुराने इलाकों में अच्छा जल सप्लाई होने लगा है। क्या भागीरथपुरा के लोग बिना किसी डर के ग्लास भर पानी पी सकते हैं। या फिर पानी का ग्लास मुंह तक आते ही प्यास बुझाने से ज्यादा जान बचाने का डर अब भी सताता है।
अगर जवाब दूसरा है तो प्रशासन और शासन को अब भी शर्म आनी चाहिए कि वो इतने गंभीर मुद्दे के बाद लोगों में ये भरोसा नहीं जता सकी कि अब उनके घरों में पहुंचने वाला पानी किसी भी गंदगी से या संक्रमण से दूर है।
विपक्ष को बनना चाहिए जनता की आवाज
इस गंभीर घटना पर कांग्रेस भी जो करना चाहिए था नहीं कर सकी। आमतौर पर विपक्ष का काम होता है कि वो शासन प्रशासन की लापरवाही को उजागर करे और जनता की आवाज बने। पर, कांग्रेस का कोई जंगी प्रदर्शन या तीखा बयान आपको बहुत सोचने पर भी शायद याद नहीं आएगा।
कांग्रेस ये कह सकती है कि उसने कोशिश बहुत की, लेकिन जनता तक उसकी कोशिशें पहुंची नहीं। पर, सोशल मीडिया के दौर में ऐसी कोशिश का छुपना आसान नहीं है। कांग्रेस अगर इस मुद्दे पर सरकार की जड़ों को हिलाने की कोशिश जी जान से करती तो वो लोगों तक जरूर पहुंचती।
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कांग्रेस को जगाने आ रहे हैं राहुल गांधी!
खैर ये कोई आज की बात नहीं है। कांग्रेस बीते कुछ सालों से इसी तरह उदासीन और सोई पड़ी है। पर, अब सोती हुई कांग्रेस को जगाने खुद राहुल गांधी मध्यप्रदेश आ रहे हैं। 17 जनवरी यानी कल के लिए उनका दौरा कार्यक्रम तय हो चुका है।
पूरा कार्यक्रम फाइनल होने के बाद अंदरूनी सूत्रों से पता चला कि राहुल गांधी के दौरे के लिए प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी दस दिनों से कोशिश कर रहे थे। उनकी इस कोशिश के बीच कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने विरोध प्रदर्शन और जनता की आवाज बनने की कोशिश क्यों नहीं की। ये सवाल कांग्रेस को खुद से पूछना चाहिए।
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सिर्फ 3 घंटे इंदौर में रहने की मोहलत
अब बात करते हैं राहलु गांधी के दौरों की। पटवारी की दस दिन की कोशिश रंग लाई और राहुल गांधी का दौरा कार्यक्रम तय हो गया। राहुल गांधी के दौरे से इतना तो कुछ हद तक तय माना जा सकता है कि इसकी आवाज अब राष्ट्रीय स्तर तक गूंजेगी, लेकिन इसके बाद से बीजेपी की धड़कने भी बढ़ी हुई हैं।
अब विस्तार से आपको बताते हैं कि राहुल गांधी के दौरे के दौरान क्या-क्या होने वाला है। और बीजेपी की फिक्र किस बात से साफ जाहिर हो रही है।
दूषित पानी से 24 मौतें होने के मामले पर राहुल गांधी पीड़ित परिवार से मिलने जाने वाले थे। इसके अलावा हॉस्पिटल में भी जाने का प्लान है। साथ ही वो खुद इंदौर में मीटिंग भी करने वाले थे, लेकिन इंदौर प्रशासन ने उन्हें केवल तीन घंटे इंदौर में रहने की मोहलत दी है। जिसमें वो सिर्फ भागीरथपुरा जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर सकेंगे। साथ ही बॉम्बे हॉस्पिटल भी जाएंगे और दूषित पानी के पीड़ितों से मिलेंगे।
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दौरे से कांग्रेस में दिख रहा उत्साह
राहुल गांधी की एक मीटिंग नगर सरकार के जनप्रतिनिधियों के साथ भी प्रस्तावित थी, लेकिन प्रशासन ने इसकी परमिशन नहीं दी। इस बैठक के लिए अभय प्रशाल और आनंद मोहन माथुर सभागार को चुना गया था। परमिशन न मिलने पर बैठक रद्द कर दी गई है।
राहुल गांधी के दौरे से कांग्रेस में उत्साह दिख रहा है। खुद जीतू पटवारी सारी तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। शोभा ओझा जैसी सीनियर लीडर को पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस ने कुल 13 परिवार चिन्हित किए हैं जो दूषित जल के पीड़ित है। इनमें से करीब पांच से राहुल गांधी की मुलाकात होगी।
कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े खुद पीड़ित परिवारों से पहले ही मुलाकात कर चुके हैं। राहुल गांधी को चूंकि बहुत कम समय मिला है इसलिए कांग्रेस ने स्वागत सत्कार का कोई प्रोग्राम नहीं रखा है। राहुल सीधे बॉम्बे अस्पताल जाएंगे और पीड़ितों से मुलाकात करेंगे।
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कांग्रेस करेगी मनरेगा पर प्रदर्शन
जब राहुल गांधी की पार्षदों के साथ बैठक तय थी तब ये भी तय किया गया था कि जो राहुल गांधी से मुलाकात नहीं कर सकेंगे वो अपने अपने क्षेत्र में ही उपवास पर बैठेंगे। अब जब उस बैठक को ही मंजूरी नहीं मिली है तो उन लोगों को क्या करना है
फिलहाल कांग्रेस ने ये साफ नहीं किया है। राहुल गांधी के दौरे के बाद कांग्रेस सिलसिलेवार तरीके से प्रदर्शन करने वाली है। ये आंदोलन मनरेगा का नाम बदलने पर होगा। 17 से 31 जनवरी 2026 तक कांग्रेस आंदोलन करेगी। इसमें दूषित जल का मुद्दा भी शामिल होगा।
इस आंदोलन में विरोध प्रदर्शन के साथ ही अलग-अलग जिलों में उपवास का प्लान भी शामिल है। साथ ही कांग्रेस अलग-अलग जगहों के वॉटर सैंपल लेकर उनकी जांच भी करवा सकती है।
राहुल गांधी के दौरे से बीजेपी में टेंशन
राहुल गांधी के दौरे का टेंशन बीजेपी में भी दिख रहा है। लाख कोशिशों के बावजूद बीजेपी इस डर से बच नहीं पा रही है। एक डर की वजह ये है कि ये कैलाश विजयवर्गीय का इलाका है। जो वरिष्ठ मंत्री होने के साथ-साथ इंदौर के भी दिग्गज हैं। इसलिए बीजेपी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।
खबर ये है कि उनके समर्थक नेताओं की एक टोली लगातार भागीरथपुरा में नजर बनाकर रख रही है। कुछ भाजपा नेताओं ने जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात भी है कि और ये जताया है कि बीजेपी ही उनके सुख दुख की असली साथी है।
बड़ा सवाल... दौरे को लेकर क्या होगी बीजेपी की स्ट्रेटजी
बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी का नाम तो नहीं लिया पर ये जताने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी कि पीड़ित लोग किसी के भी बहकावे में न आएं। बीजेपी की ये बेचैनी साफ कर रही है कि इस घटना पर डर का माहौल तो पार्टी के भी भीतर है।
राहुल गांधी के महज तीन घंटे के लिए ही इंदौर में होंगे। उससे पहले ये हलचल जता रही है कि सियासी रण में इस बार पानी का मामला आग बनकर बरसेगा। देखना ये है कि राहुल की दौरों की धार कांग्रेस के राजनीतिक तीरों को कितना पैना बना पाती है और बीजेपी उनका तोड़ ढूंढने के लिए क्या सियासी स्ट्रेटजी अपनाती है।
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