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Photograph: (thesootr)
जो तुम को हो पसंद वही बात कहेंगे...
तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे।
NEWS STRIKE (न्यूज स्ट्राइक) : मक्खन पॉलिश करते हुए किसी का दिल जीतना हो तो ये गाना क्या खूब जंचता है... है न, लेकिन मध्यप्रदेश के एक मंत्री ने बटरिंग के मामले में इस गाने के भाव को भी मात दे दी है। ये मंत्री कभी पब्लिक टॉयलेट की सफाई करते हैं कभी चप्पल उतारने का प्रण लेते हैं।
ये सुनकर आप समझ गए होंगे कि हम किस मंत्री की बात कर रहे हैं। ये मंत्री हैं प्रद्युम्न सिंह तोमर। जिनके ताजा कारनामा ऐसा है जिसे देखकर उनके आका गदगद हो गए होंगे। अगर मोगेम्बो होते तो शायद मन ही मन ये भी कह देते कि मोगेम्बो खुश हुआ। पर आकाओं की बात छोड़िए और आप तय कीजिए कि मंत्रीजी के इस कारनामे पर आपकी क्या राय है...
पार्टी विद डिफरेंस में एक डिफरेंट काइंड के मंत्री
ये हैं प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर। तोमर सीना ठोक कर ये कहने में कभी गुरेज नहीं करते वो कि ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक हैं। जैसे ये कहना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। उनकी वफादारी का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि वो सिंधिया के इशारे पर कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आ गए और पार्टी विद डिफरेंस में एक डिफरेंट काइंड के मंत्री बने हुए हैं। जिनके लिए पार्टी से पहले सिंधिया ही आते हैं।
शायद उनकी इसी वफादारी को देखते हुए उन्हें शिवपुरी का प्रभारी मंत्री भी बना दिया गया। ये भी याद दिला ही देते हैं कि सिंधिया गुना शिवपुरी के ही सांसद हैं। उनके लिए भी इससे बेहतर क्या हो सकता है कि उनका सबसे विश्वासपात्र नेता ही उनकी लोकसभा में आने वाले जिले को संभाले। हर जानकारी फर्स्ट हैंड मिलती रहेगी और मंत्रीजी उनका हरकारा बनकर उनकी जय जयकार करवाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
प्रद्युम्न सिंह तोमर भी उनकी उम्मीदों पर खरे ही उतरते हैं। इतना खरे कि ये भी भूल जाते हैं कि प्रदेश के किसी भी हिस्से में विकास की बात होगी तो पहले सीएम मोहन यादव का नाम आना चाहिए। पर वो तो ठहरे सिंधिया भक्त। जो दिन रात उनके नाम की माला जपते हैं और जपवाते भी हैं। उनके ताजा वीडियो... जो उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर, अपने ऑफिशियल हैंडल से पोस्ट किए हैं। वो सब इस बात के गवाह भी हैं।
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दल के साथ निकल पड़े शिवपुरी का दौरा करने
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ये वीडियो मंत्रीजी ने हाल ही में अपलोड किए हैं। ठंडी हवा के आगोश में लिपटी सर्द रातों में मंत्रीजी अपने एक छोटे से दल के साथ निकल पड़े शिवपुरी का दौरा करने। ठंड का आलम क्या है ये आप मंत्रीजी के लिबास से ही जान सकते हैं जो खुद जैकेट और टोपी पहने हैं। इस सर्द रात में वो रजाई या कंबल में दुबके लोगों के घर का दरवाजा खटखटाते हैं तो कभी किसी दुकान पर पहुंच जाते हैं।
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माननीय सिंधियाजी ने भी आपको राम-राम बोली है
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इस वीडियो में मंत्रीजी एक घर का दरवाजा खटखटाते हैं। सामने एक माताजी खड़ी दिख रही हैं। बातचीत क्या हुई वो तो आपने थोड़ी बहुत सुनी ही होगी। मंत्रीजी बड़े अदब से लाइट और पानी के बारे में पूछते हैं और आखिरी में याद दिला देते हैं कि माननीय सिंधियाजी ने भी आपको राम-राम बोली है। कोशिश पूरी है कि हर सुविधा का क्रेडिट अपने आका की झोली में डाल सकें।
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दुकान वाले से भी बिजली पानी का हाल पूछा
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एक वीडियो में मंत्रीजी आपको दुकान पर जाते नजर आएंगे। दुकान वाले से भी बिजली पानी का हाल पूछा। कोई शिकायत दिखी तो झट से उसे सुलझाने का आश्वासन भी दे डाला। ये भी जता दिया कि आपकी फिक्र करके ही रात को यहां तक चल कर आए हैं।
इसके बाद लंबा पॉज भी लिया। शायद मंत्रीजी को बदले में तारीफ सुनने की उम्मीद रही होगी। पर भोला मतदाता। उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा सो वो आगे बढ़ गए। इतने पर ही बस नहीं हुआ है।
क्या पहले से पता था कि मंत्रीजी का रात का दौरा...!
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तोमर ने एक वीडियो और पोस्ट की है। इस वीडियो में वो एक और शख्स से बात करते दिख रहे हैं। इसे शायद पहले से ही पता था कि मंत्रीजी का रात में अचानक दौरा करने का मन बन सकता है। कहीं इसलिए ही तो ये रात में घर से बाहर खड़ा उनका इंतजार करता मिल गया।
बाकी वीडियोज की तरह मंत्रीजी ने उससे भी सारे हालात जाने। लाइट से लेकर स्ट्रीट लाइट तक पर सवाल किए और फिर क्लियरिटी के लिए ये भी पूछ लिया कि आप संतुष्ट हो या नहीं। बाकी बातचीत में फिर से उसे याद दिला दिया कि वो रात में चलकर उनके पास आए हैं और फिर सबसे जरूरी बात कैसे भूल जाते... माननीय सिंधियाजी ने भी चिंता की है।
सीएम का नाम लेना भी जरूरी समझा...
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अपने साथ आए सभी लोगों का परिचय भी दिया। फिर याद आया कि सीएम का नाम लेना भी तो जरूरी है। इसलिए चलते-चलते उनका भी नाम कोट कर दिया।
पुरानी कहानियों की तरह बस मंत्री जी ने भेष ही नहीं बदला
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मंत्रीजी ने अपने इस अंदाज से प्राचीन काल की याद दिला दी। किस्से कहानियों में आपने भी अक्सर सुना होगा कि एक राजा था। जो अपने प्रजा के भले बुरे की फिक्र में डूबा रहता था। प्रजाजनों का हाल जानने के लिए रात में भेष बदलकर निकल पड़ता था।
मंत्रीजी भी उसी राजा से मोटिवेट नजर आते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने खुद भेष नहीं बदला। वैसे वो राजा भी नहीं है। महाराजा के दरबार के एक अदद दरबारी हैं। जो महाराज की शान में सलाम फरमाते फरमाते ये भूल गया कि अब दौर लोकतंत्र का है। इसलिए लोकतंत्र ने जिसे मुखिया माना है। पहले नाम तो उसी का आना चाहिए। पर मंत्रीजी कुछ जगहों पर तो प्रदेश के लोकतांत्रिक मुखिया का नाम ही लेना भूल गए। जहां लिया वहां भी किसी पासिंग रिफ्रेंस की तरह।
हो सकता है सरकार इससे खुश हो जाए, शाबाशी भी दे, लेकिन पब्लिक का क्या। जो सच बोलने में जरा भी देर नहीं करती। इन वीडियोज पर जो कमेंट आ रहे हैं। वो इसके गवाह हैं कि सब कुछ उतना भी फील गुड नहीं है। जितना मंत्रीजी फील करवाने में जुटे हैं।
सिंधिया के लिए कसम खाने से भी नहीं चूकते...
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ये वही मंत्री हैं जो सिंधिया के लिए चप्पलों का त्याग भी कर चुके हैं। इन्होंने कसम खाई थी कि जब तक सिंधिया चुनाव जीत नहीं जाते तब तक नंगे पैर रहेंगे। जीत के बाद खुद महाराजा साहब ने सार्वजनिक मंच से उन पर मेहरबानी की थी और उन्हें चप्पल पहनवाई थी। उस नजारे को भी इमोशनल बनाने की भरपूर कोशिश हुई थी।
खैर सोशल मीडिया पर पब्लिक तो यही याद दिलवा रही है कि मंत्रीजी ग्वालियर की भी सुध ले लीजिए। इन वीडियोज को देखकर मंत्रीजी के बारे में आपकी क्या राय है। शेयर जरूर कीजिएगा।
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