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Photograph: (thesootr)
News in short
- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के स्लॉटर हाउस में गोमांस का धंधा चल रहा है।
- वहां भैंस का मांस बताकर 26 टन गोमांस मुंबई भेजा गया, नगर निगम के डॉक्टर ने प्रमाणपत्र दिया।
- हिंदू संगठनों के हंगामे पर फॉरेंसिक जांच से सच्चाई खुली, 160 बछड़े पहुंचाए गए थे।
- पिछले दो सालों में भोपाल-इंदौर समेत कई जिलों से गोमांस तस्करी के मामले पकड़े गए।
- सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद सरकारी संस्था में घपला प्रशासन पर सवाल उठाता है।
News in Detail
NEWS STRIKE | न्यूज स्ट्राइक: मध्यप्रदेश में गोसेवा और गोपालकों के लिए खुद सीएम मोहन यादव कई घोषणाएं कर चुके हैं। उसके बाद भी गोमांस से जुड़ी जो खबरें सामने आती हैं वो चौंकाने वाली होती हैं। बीते दो साल में गोमांस की बिक्री और तस्करी से जुड़ी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
राजधानी भोपाल में ही सीएम हाउस से चंद किमी की दूरी पर गोमांस से जुड़ा गोरखधंधा जोरों पर चल रहा है। सीएम मोहन यादव की गोभक्ति से लेकर आम जनता के हंगामे और गायों के वध से जुड़ी ये ताजा रिपोर्ट आपको हैरान कर देगी।
प्रदेश के मुखिया गो सेवक फिर भी ये खेल
आप अगर गो सेवक हैं या गो पालक हैं तो इस रिपोर्ट को गौर से सुनिए। मध्यप्रदेश गोमांस तस्करी के मामले में एक नई इबारत लिख रहा है, लेकिन ये इबारत सीख लेने वाली नहीं बल्कि शर्म करने वाली है। क्योंकि जिस प्रदेश का मुखिया खुद ही गो सेवक है। उसके राज में गो मांस का ऐसा खेल जारी है ये सुनकर वाकई हैरानी होगी।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम से जाहिर है कि गो सेवा और गो पूजा उनकी परंपराओं में शामिल है। इसकी एक मिसाल ये भी है कि आलीशान सीएम हाउस में भी उन्होंने गाय पाल रखी हैं। सुबह उठकर वो अपने घर में पली गाय का दर्शन करते हैं और रात में सोने से पहले भी गो माता का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते।
ये महज एक परंपरा नहीं है न ही ढिंढोरा पीटने वाली कोई बात है। बल्कि गायों की फिक्र उनके राजनीतिक कामकाज में भी झलकती है। हाईटेक गोशाला से लेकर गो वंश और गोपालकों के लिए कई घोषणाएं भी कर चुके हैं। वो पूरे प्रदेशभर के लिए योजनाएं बनाते रहे और यहां राजधानी में उनकी नाक के नीचे ही गोमांस को लेकर बड़ा घिनौना खेल रच दिया गया।
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भोपाल के बीचोंबीच चल रहा गोमांस का धंधा
गोमांस से जुड़ी एक ताजा रिपोर्ट आपके रोंगटे खड़े कर देगी। आप जानते ही होंगे भोपाल के बीचोंबीच एक बूचड़खाना है। उस रोड से गुजरे तो मांस की बदबू आपको नाक और मुंह ढंकने पर मजबूर कर देगी। आपने कई बार उस रोड से गुजरते हुए अपने किसी जान पहचान वाले को ये जरूर बताया होगा कि ये भोपाल का बूचड़खाना है। जहां बूढ़े मवेशियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाता है। इसी बूचड़खाने में गोमांस से जुड़ा गोरखधंधा चल रहा था।
मुंबई भेजा जा रहा मांस गाय का निकला
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस स्लॉटर हाउस में गायों को मारा गया और उनका मांस, जिसे आम बोलचाल की भाषा में बीफ कहते हैं। उसे मुंबई भेजा गया और अगर रिपोर्ट पूरी तरह सही है तो ये सब नगर निगम प्रशासन की जानकारी में हुआ है।
इस मामले से जुड़ा एक पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। ये सरकारी पत्र 17 दिसबंर 2025 की तारीख का है। जिसमें नगर निगम के पशु चिकित्सक डॉ. बेनीप्रसाद गौर ने ये प्रमाणित किया है कि स्लॉटर हाउस में दो सप्ताह के भीतर ही करीब 85 भैसों को मारा गया है। जिनकी उम्र 15 साल या उससे ज्यादा थी।
इन भैसों के मेटी को फ्रोजन मीट के रूप में मुंबई भेजने की परमिशन दी गई। पत्र के हिसाब से तो सब कुछ ठीक ही नजर आता है, लेकिन असली बात तब खुली जब ये सामने आया कि जो मीट भेजा गया वो भैंस का नहीं गाय का था।
कुछ हिंदू संगठनों को ये शक हुआ कि ट्रक में गोमांस हो सकता है। उनके हंगामे के कारण ट्रक रोका और उसका सैंपल लिया गया। जिसके बाद फोरेंसिंक जांच करवाई गई और उसी जांच में ये खुलासा हुआ कि मांस वाकई में गो मांस ही है।
इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि जो मांस भेजा गया उसका वजन 26 टन है। इतने वजन के लिए कितनी गाय कुर्बान की गई होंगी उसका अंदाजा लगाया जा सकता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा भी किया गया है कि 15 और 16 दिसंबर को दो अलग-अलग गाड़ियों से गाय के करीब 160 बछड़े स्लॉटर हाउस पहुंचे थे।
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बड़ा सवाल... कंटेनर जब्त क्यों नहीं किया
ये घटना कई बड़े सवाल उठा रही है। जिनके निशाने पर सबसे पहले है भोपाल नगर निगम। पहला सवाल यही है कि कौन सी रिपोर्ट गलत है। जो नगर निगम के डॉक्टर ने दी या मांस से जुड़ी फॉरेंसिंक रिपोर्ट। दूसरा सवाल ये है कि जब गोमांस का पता चल गया था फिर पुलिस ने कंटेनर जब्त क्यों नहीं किया। तीसरा सवाल ये है कि क्या नगर निगम के पशु चिकित्सक ने बिना किसी जांच के मांस को भैंस का मांस बता दिया। या फिर सोच समझ कर रिपोर्ट में हेरफेर किया गया।
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सफेदा के नाम से करते हैं गोमांस सप्लाई
गो मांस से जुड़ी ये कोई पहली रिपोर्ट नहीं है। इससे पहले भी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये खुलासा हो चुका है कि भोपाल में ही बीफ खुलेआम बिकता है। जिसे सफेदा के नाम से बेचा और खरीदा जाता है।
सफेदा नाम के मीट को भोपाल से बाहर भी सप्लाई किया जाता है। इसमें स्लॉटर हाउस के कर्मचारी और कुछ बाहरी लोगों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा चुकी हैं।
बीफ की बिक्री और सप्लाई से जुड़ी ये कोई पहली खबर नहीं है। साल 2024 से ऐसे मामले लगातार तूल पकड़ रहे हैं। मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी खबरें आती रही हैं।
जनवरी 2024 में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सीहोर से बीफ से भरे पिकअप और मिनी ट्रक पकड़े जाने की खबर आई थी। जून 2024 में मंदसौर, रतलाम और नीमच में गोमांस से भरे वाहन पकड़े गए।
ये बीफ महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश से लाया या ले जाया जा रहा था। पुलिस ने ये आशंका भी जताई की बीफ की तस्करी के तार इंटरनेशनल लेवल से जुड़े हुए हैं।
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गोमांस के मामले में जीरो टॉलरेंस नीति
साल 2025 में भी ऐसी कई मामले सामने आए। कुछ केसेज में धार्मिक संगठनों का इनवोल्वमेंट भी दिखा। जिसके बाद विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर दोहरी मानसिकता के आरोप भी लगाए। इन मामलों को मद्देनजर रखते हुए मोहन सरकार कई ऐलान कर चुके हैं। जिसमें गोमांस बिक्री खरीदी के मामले में जीरो टॉलरेंस नीति भी शामिल है।
नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के आसपास खास निगरानी रखी जाती है। ताकि गोमांस से जुड़ी कोई घटना सामने न आए। इन सारी कोशिशों के बावजूद एक सरकारी संस्थान का गोमांस से जुड़े गोरखधंधे की आशंका जगाना। क्या इशारा करता है। एक गो सेवक मुख्यमंत्री के राज्य में ऐसी घटनाओं का आना क्या सरकारी मंशा का कमजोर होना नहीं जताता।
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