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Photograph: (THESOOTR)
News in Short
कांग्रेस और एआईएमआईएम के चुनावी गठजोड़ की संभावना बढ़ रही है।
बीजेपी ने कांग्रेस और एआईएमआईएम की सांठगांठ का खुलासा किया।
मुस्लिम वोटों का बंटवारा कांग्रेस के लिए चुनावी चुनौती बन सकता है।
कमलनाथ के बयान से मुस्लिम वोटों का कांग्रेस पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस को 22 सीटों पर चुनावी रणनीति मजबूत करनी होगी।
News in Detail
NEWS STRIKE | न्यूज स्ट्राइक: मध्यप्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव कांग्रेस और एआईएमआईएम एक साथ मिलकर लड़ेंगे। ये सुनकर ही कोई भी राजनीतिक जानकार हैरान हो सकता है। पर फिलहाल चौंकिए नहीं क्योंकि हम इनफॉर्मेशन नहीं दे रहे हैं। बल्कि भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
हां ये बात जरूर है कि इसे आप नामुमकिन कहकर टाल नहीं सकते। राहुल गांधी भले ही कांग्रेस को बार-बार धर्म निरपेक्ष पार्टी साबित करने की कोशिश करते रहें, लेकिन कभी उनके विधायक संघ के कार्यक्रम में नजर आते हैं तो कभी ओवैसी की पार्टी के साथ मीटिंग करते हैं।
सोशल मीडिया पर उनकी बैठक से जुड़ा एक लेटर जमकर वायरल हो रहा है। यही वायरल लेटर तो वो धुआं हैं जो अलग-अलग खबरों की आग फैला रहा है।
ओवैसी और बीजेपी के बीच फंसी कांग्रेस
देश के राजनीतिक पटल पर पिछले कुछ सालों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी बहुत तेजी से उभर कर आई है। पहले हैदराबाद तक सीमित एआईएमआईएम पार्टी अब अलग-अलग प्रदेशों में चुनाव लड़ रही है। जीत भी रही है और ओवैसी आला दर्जे के नेशनल लीडर बन गए हैं।
बीजेपी जब हिंदुत्व की बात करती है तो ओवैसी अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों के हक की बात करने लगते हैं। दोनों का स्टेंड क्लियर है। इनके कहीं बीच में खड़ी है कांग्रेस। जो न हिंदुत्व के साथ हैं और न ही अल्पसंख्यकों के और दोनों के ही साथ भी हैं।
यानी वो धर्मनिरपेक्षता के साथ चल रही ऐसी पार्टी बन गई है जो दोनों ही तबकों को बैलेंस करने में जुटी है। पर मतदाता है कि बैलेंस होने को तैयार ही नहीं हो रहा है। हिंदुत्व के वोट बीजेपी के साथ चले जाते हैं और मुस्लिमों के वोट ओवैसी काटकर ले जाते हैं।
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बीजेपी-ओवैसी का काम डराने का: दिग्विजय सिंह
बार-बार राज्यों में विधानसभा चुनाव हार रही कांग्रेस कई बार अपनी हार का ठीकरा ओवैसी के सिर भी फोड़ चुकी है। कांग्रेस के कई नेता बोल चुके हैं कि ओवैसी बीजेपी की बी टीम है। इसी बात को दिग्विजय सिंह ने हाल ही में थोड़े अलग तरीके से दोहराया भी।
बुधवार को वो बीना में थे। वहां दिग्गी राजा ने कहा कि बीजेपी-आरएसएस हिंदुओं को डराती है और ओवैसी मुसलमानों को। BJP कहती है हिंदू खतरे में हैं और ओवैसी कहते हैं मुसलमानों को खतरा है। दोनों मिलकर राजनीति का खेल खेलते हैं। न हिंदुओं को खतरा है, न मुसलमानों को।
दिग्विजय सिंह ने ये भी कहा कि पहले देश का बंटवारा सावरकर और मोहम्मद अली जिन्ना की वजह से हुआ था। अब मोहल्लों का बंटवारा हो रहा है। हिंदी और मुसलमान मोहल्लों में सिमटने पर मजबूर हैं। ये बात देश के लिए खतरनाक है।
एक तरफ दिग्गी राजा बीजेपी और एआईएमआईएम को देश के लिए खतरनाक बता रहे थे और देश को संविधान से चलाने की पैरवी कर रहे थे। तो दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के एक विधायक ओवैसी की पार्टी के सदस्य के साथ बैठक की तैयारी कर रहे थे। इससे जुड़े एक लेटर सोशल मीडिया पर सनसनी फैला रहा है। जिसे शेयर किया है बीजेपी प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने।
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कांग्रेस-AIMIM मिलकर लड़ सकते हैं चुनाव?
एक लेटर मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी शहर के लेटर हेड पर जारी हुआ है। इस लेटर में एक बैठक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करने के लिए कहा गया है। बैठक में शामिल होने वालों के नामों पर गौर करें।
पहला नाम कांग्रेस विधायक आतिफ अकील का है और दूसरा ही नाम एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान का है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के नेता का भी नाम शामिल है, लेकिन असल हाईलाइट शुरुआती दो नाम ही हैं। वैसे तो लेटर में वैन्यू भी लिखा है।
पर आप इन दो नामों के अलावा बैठक से जुड़ी जानकारी पर फोकस कीजिए जिसमें लिखा कि ये बैठक आने वाले चुनाव, संगठनात्मक विस्तार और राजनीतिक प्रगति जैसे मुद्दों पर होगी। इसे पढ़कर सिर्फ बीजेपी नेता ही नहीं कोई भी राजनीतिक जानकार यही सवाल करेगा कि क्या कांग्रेस और एआईएमआईएम एक साथ चुनाव लड़ सकते हैं।
बीजेपी नेता भी यही आशंका जाहिर की है और इसे दोनों पार्टियों के बीच की सांठगांठ का लिखित प्रमाण भी बताया है। आशीष अग्रवाल ने अपने पोस्ट में लिखा है कि कांग्रेस और एआईएमआईएम वैसे तो दूरी का दिखावा करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इस बैठक की जानकारी को उन्होंने मिलीभगत भी करार दिया है।
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मुस्लिम वोटों का बंटवारा, कांग्रेस के लिए चुनौती
अब बात करते हैं कि ये दोनों दल अगर साथ में आए तो क्या वाकई मध्यप्रदेश की सियासी तस्वीर बदल सकती है। कुछ पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स खंगालने पर कमलनाथ के हवाले से एक जानकारी सामने आई। खुद कमलनाथ ने साल 2018 में कहा था कि अगर 90 फीसदी अल्पसंख्यक वोट कांग्रेस के पक्ष में पड़ते हैं तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन सकती है।
बहुत संभव है कि उनका ये बयान हिंदू वोटर्स के बीजेपी में शिफ्ट हो जाने के बाद का होगा। इसी बयान को आधार बना कर बात करें तो क्या दोनों दलों के एक साथ चुनाव लड़ने पर मुस्लिम वोट डिवाइड नहीं होगा। ये तो संभव नहीं कि सारे मुसलमान एक साथ कांग्रेस के साथ चले जाएं या फिर एक साथ एआईएमआईएम का दामन थाम लें। बंटना तो लाजमी है। ऐसे में कांग्रेस को एआईएमआईएम के साथ आने का फायदे से ज्यादा नुकसान ही होगा।
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कांग्रेस के लिए आगे कुआं पीछे खाई की स्थिति
कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश मुस्लिम विकास परिषद के संयोजक मोहम्मद माहिर ने कुछ समय पहले चर्चाओं में ये दावा किया था कि मध्यप्रदेश में सात फीसदी मुसलिम आबादी है। 47 सीटों पर उनकी आबादी 5 से 15 हजार तक है, जबकि 22 सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक वोटर्स निर्णायक भूमिका भी निभाते हैं।
इस लिहाज से देखा जाए तो कांग्रेस को 22 सीटों पर दमदार तरीके से चुनावी तैयारी करनी होगी। इन सीटों पर अगर एआईएमआईएम ने अपने कैंडिडेट अलग से उतारे तो कांग्रेस को नुकसान होना तय है। ऐसे में कांग्रेस के लिए आगे कुआं पीछे खाई वाली सिचुएशन है।
इस बार कांग्रेस का स्टैंड क्या...
कांग्रेस आगे क्या करेगी। ये तो बड़ा सवाल है ही। एक सवाल ये भी है कि हिंदू सम्मेलन में दिखने वाले विधायक से जवाब मांगा जाता है। तो क्या एआईएमआईएम के नेता के साथ बैठक करने वाले विधायक से भी कांग्रेस जवाब मांग पाएगी या अब स्टेंड कुछ अलग होगा।
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