News Strike: RSS के कार्यक्रम में पहुंचे कांग्रेस विधायक, पार्टी करेगी सख्त कार्रवाई?

कांग्रेस विधायक शाह ने आरएसएस के हिंदू सम्मेलन में भाग लिया, जिससे पार्टी की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस सख्त कार्रवाई पर विचार कर रही है।

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Harish Divekar
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Photograph: (THESOOTR)

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News in Strike

कांग्रेस विधायक ने आरएसएस कार्यक्रम में भाग लिया।
कांग्रेस पार्टी शाह पर सख्त कार्रवाई करने की सोच रही है।
दिग्विजय सिंह ने आरएसएस की तारीफ की थी।
हिंदू सम्मेलन में शामिल होने से पार्टी की किरकिरी हुई।
कांग्रेस को अपने धर्मनिरपेक्षता स्टैंड को स्पष्ट करना होगा।

News in Detail

NEWS STRIKE | न्यूज स्ट्राइक: कांग्रेस नेताओं का क्या आरएसएस की तरफ रुझान बढ़ रहा है या फिर उन्हें लगता है कि क्षेत्र में पॉपुलर बने रहने के लिए आरएसएस के कार्यक्रम ही एकमात्र जरिया बचे हैं। दिग्विजय सिंह, जिन्हें खांटी कांग्रेसी भी कह दें तो भी शायद उन्हें बुरा नहीं लगेगा। वो खुद आरएसएस की तारीफ कर चुके हैं।

अब एक कांग्रेसी विधायक पार्टी लाइन को दरकिनार करते हुए आरएसएस के एक कार्यक्रम में ही शामिल हो गया। इसके बाद उस विधायक पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश हो चुकी है। क्या कांग्रेसियों को ये लगने लगा है कि जीतना है तो हिंदुत्व वाली लाइन पकड़कर चलना ही होगा।

दिग्विजय सिंह ने RSS की तारीफ में किया था ट्वीट

आपको याद होगा कुछ ही दिन पहले दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट किया था। उस ट्वीट में आरएसएस की तारीफ करते हुए लिखा था कि नीचे बैठने वाले को भी पीएम बना दे। ये काम एक मजबूत संगठन ही कर सकता है।

दिग्गी राजा के इस ट्वीट ने जमकर सुर्खियां बटोरी थीं। जिसके बाद ये अटकलें लगी थीं कि राहुल गांधी उनसे नाराज हैं और अब वो राज्यसभा नहीं जा सकेंगे। कुछ दिन बाद दिग्विजय सिंह ने खुद ही ये बयान दिया कि वो राज्यसभा की सीट छोड़ने वाले हैं।

ये फैसला किसी दबाव में लिया गया या किसी राजनीतिक रणनीति का एक हिस्सा है। फिलहाल ये खुलासा नहीं हुआ है। इस बीच टिमरनी के कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ने भी ऐसा कारनामा किया है कि पार्टी की किरकिरी हो गई है।

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अब कांग्रेस विधायक शाह हिंदू सम्मेलन में हुए शामिल

हरदा जिले के रहटगांव में एक हिंदू सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन में अभिजीत शाह भी शामिल होने जा पहुंचे। ये मामला 17 जनवरी का है। उनके इस सम्मेलन में शामिल होने के बाद से पार्टी ने उन्हें आंखें दिखाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के जिला प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने इस मसले पर कहा कि जनता ने उन्हें कांग्रेस के टिकट से चुना है।

हिंदू सम्मेलन में शामिल होना कांग्रेस की घोषित विचारधारा के खिलाफ है। जिसकी वजह से पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल उठ रहे हैं। गार्गव ने यहां तक कहा कि शाह जैसे विधायकों की वजह से दूसरे कांग्रेस नेताओं का मनोबल टूटता है। कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई कमजोर हो जाती है। इस मामले पर शाह से स्पष्टीकरण भी मांग लिया गया है। साथ ही शाह को स्लीपर सेल का तमगा भी दे दिया है।

राहुल गांधी हिंदू सम्मेलन कराने का करते हैं विरोध 

गार्गव की नाराजगी वाजिब भी है। असल में खुद राहुल गांधी हिंदू सम्मेलन कराने जैसी विचारधारा का विरोध करते हैं। वो भारत जोड़ो यात्रा निकालकर धर्म निरपेक्षता के संदेश को लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।

ऐसे में पार्टी के विधायक ही जब ऐसे सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे तो राष्ट्रीय से लेकर रीजनल स्तर तक पार्टी को अपना स्टेंड क्लियर करना मुश्किल होगा। यहां ये भी बता दें कि आरएसएस के कहने पर हर जिला, ब्लॉक स्तर और गांव-गांव में हिंदू सम्मेलन हो रहे हैं। इसका एकमात्र मकसद हिंदुओं को एकजुट और मजबूत करना है।

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विधायक की एक हरकत बहुत से सवाल खड़े करती है

जाहिर है शाह भी ये खूब जानते होंगे कि ये कार्यक्रम आरएसएस की निगहबानी में हो रहे हैं। जिनका कांग्रेस की पार्टी लाइन से दूर दूर तक वास्ता नहीं है। फिर वो हिंदू सम्मेलन में शामिल कैसे हुए।

पहले दिग्विजय सिंह का आरएसएस की तारीफ करना और अब एक कांग्रेस विधायक का हिंदू सम्मेलन में शामिल होना क्या जाहिर करता है। इसे छोटी सी घटना या गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि एक विधायक की एक हरकत बहुत से सवाल खड़े करती है। पहला सवाल तो ये कि सब कुछ जानते बूझते शाह इस सम्मेलन का हिस्सा क्यों बने।

दूसरा सवाल ये कि क्या उन्हें लगता है कि क्षेत्र में दोबारा जीतने के लिए हिंदू सम्मेलन या हिंदू ध्वज को उठाना लाजमी या मजबूरी बन चुका है। क्या शाह को ये अंदाजा नहीं था कि इस सम्मेलन में शरीक होकर वो अपनी पार्टी को ही मुश्किल में डाल सकते हैं या पार्टी का मजाक बना सकते हैं। 

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हिंदुत्व का दामन थामे बिना कांग्रेस की जीत मुश्किल है?

एक सवाल जो कांग्रेस को भी खुद से पूछना जरूरी है। वो ये कि पार्टी के एक विधायक को हिंदू सम्मेलन में जाने की जरूरत ही क्यों पड़ी। कांग्रेस जिस बात को नजरअंदाज करना चाहती क्या वो विधायकों और स्थानीय नेताओं को दिखने लगी है।

क्या वो ये मान चुके हैं कि अब भी हिंदुत्व का दामन नहीं थामा तो आगे जीत मिलना मुश्किल है। अगर ऐसा हो तो कांग्रेस इससे कैसे निपटेगी। क्या कांग्रेस के पास ऐसी कोई काट है जो गली-गली कूचों-कूचों में बार-बार हो रहे धार्मिक सम्मेलनों को पोलिंग बूथ पर खारिज कर सके। 

एक समय कांग्रेस और हिंदू महासभा आ गए थे साथ

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस पूरी तरह से हिंदू धार्मिक संगठनों को खारिज करती हो। एक दौर ऐसा भी रहा है जब विरोधी से लड़ने के लिए कांग्रेस और हिंदू महासभा भी एक साथ आ गए थे, लेकिन ये करीब सौ साल पुरानी बात हो चुकी है।

1915 से 1926 के बीच कई संगठन एकजुट होकर अंग्रेजों का सामना कर रहे थे। तब कांग्रेस और हिंदू महासभा भी एक साथ एक ही मंच पर थे। तब मुस्लिम समर्थन भी उनके साथ हुआ करता था, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के रास्ते अलग हो गए। तब के अलग हुए रास्त अब तक एक नहीं हो सके हैं।

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कांग्रेस के लिए चिंता से ज्यादा आत्मचिंतन जरूरी

अब कांग्रेस के लिए ये चिंता से ज्यादा चिंतन की घड़ी है। क्योंकि आज एक विधायक ने ऐसी हरकत की है। कल को ये गिनती बढ़ भी सकती है। जाहिर सी बात है जब हिंदू एकता जीत की कुंजी हो सकते हैं तो जीत का ख्वाहिशमंद कोई भी नेता उससे ऐतराज क्यों करेगा।

इसलिए शाह पर कड़ी कार्रवाई करने के साथ कांग्रेस को खुद के भीतर झांकना जरूरी हो गया है। ये सवाल भी पूछना जरूरी हो गया है कि इन सम्मेलनों की काट कहां से ढूंढकर ला पाएगी ताकि सत्ता में आने की आशा, गहरी निराशा का शिकार न हो जाए।

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