News Strike : मूसा गैंग के डर से लापता हुए विधायक, द सूत्र ने ढूंढ निकाला, दिलचस्प है पूरा मामला
Harish Divekar | Feb 10, 2026, 07:00 IST
Photograph: (thesootr)
मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल मूसा गैंग से जान के खतरे के कारण गायब हो गए। बीजेपी विधायक की लापता होने की सियासी चर्चा तेज है, 'द सूत्र' ने मामले की पड़ताल की।
News In Short
बीजेपी ने विधायक के लापता होने पर पारदर्शिता नहीं दिखाई।
विधायक का करीबी संतोष तिवारी, मूसा गैंग से जुड़ा हो सकता है।
कांग्रेस ने विधायक की सुरक्षा पर सवाल उठाया।
मूसा गैंग के साथ विधायक के संबंधों पर अब सियासी चर्चा तेज हो रही है।
News In Detail
विधायकजी की इस पूरी ड्रामेबाजी पर 'द सूत्र' ने, हमने जमकर पड़ताल की। पिछले एक डेढ़ साल के सारे घटनाक्रमों का खंगाला। उनकी तह तक गए। तब जाकर असली कहानी सामने आई। ये ड्रामेबाज विधायक हैं मउगंज के विधायक प्रदीप पटेल। जो अब अपनी सरकार के गले में अटका कौर बन गए हैं। जिन्हें न निगला जा सकता है न उगला जा सकता है। असल किरकिरी तो सदन में हो सकती है।
विधायक प्रदीप पटेल को जान का खतरा
कुछ दिन पहले विधायक प्रदीप पटले का एक वीडियो कॉल भी वायरल हुआ। जिसमें उन्होंने अपने घर वालों को हिदायत दी कि चाहे कुछ भी हो जाए वो लोग घर से बाहर न निकलें। घर के दरवाजे अच्छे से बंद करके रखें और तसल्ली होने के बाद ही दरवाजा खोलें।
हम आपको उस बातचीत के कुछ अंश बताते हैं। ये कॉल उन्होंने अपने पोते अर्जुन को किया था-
- पटेल- बेटा कहां पर हो।
अर्जुन- बब्बाजी घर पर। - पटेल- बेटा घर पर ही रहना। जिस भी सामान की जरूरत हो उसे ऑनलाइन बुलवा लेना।
इसके आगे भी विधायकजी अपने पोते को इसी तरह की समझाइश देते हैं। साथ ही जनता से जुड़े कामों को लेकर भी कुछ सलाह देते हैं। - पटेल- बेटा अपने सारे सेवा कार्य जारी रखना। जनता की समस्याएं लेटर पैड पर भेजते रहना। अधिकारियों के साथ जो भी जरूरी मीटिंग हो तुम अटेंड कर लेना। मेरा जाना न के बराबर ही होगा।
- अर्जुन- लोग डरे हुए हैं। कहते हैं कि जब हमारा जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं है तो हम लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे? लोग पूछ रहे हैं आप कहां हैं।
पटेल- मेरे पास भी फोन आ रहे हैं। बहुत सारे मिसकॉल पड़े हैं। तुम्हारा काम है, सबको समझना कोई भी आक्रोशित ना हो। थोड़ा सा देखना कोई भी आए और घंटी बजाए तो दरवाजा नहीं खोलना है।
विधायक पटेल के लापता होने की सियासी चर्चा
विधायक प्रदीप पटेल भी शांति पाने के लिए अवकाश पर हैं। वो जल्द ही अपने विधानसभा क्षेत्र लौटेंगे, लेकिन सांसद के इस बयान से बात बनने की जगह बिगड़ गई। क्योंकि इस पूरी सियासी नौटंकी में कांग्रेस की भी एंट्री हो गई।
कांग्रेस के महासचिव विनोद शर्मा ने कहा कि उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए। जब जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार में सेफ नहीं है तो फिर आम लोग कैसे सेफ हो सकते हैं।
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बीजेपी विधायक की गुमशुदगी पर सवाल
'द सूत्र' ने जरा सा मामले को खंगालना शुरू क्या किया। ये बात खुलकर सामने आ गई। तो बीजेपी ये बात किसी को क्यों नहीं बता रही। आपके मन में भी यही सवाल आ रहा है। ये सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जल्द ही बजट सत्र शुरू होने वाला है। विधायक प्रदीप पटेल इस सत्र में शामिल भी होंगे। तब बीजेपी किसको क्या जवाब देगी।
विधायक के अंडरग्राउंड होने की असली वजह
मामला कुछ दिन या कुछ महीने पुराना कहा जा सकता है। एक जमीन विवाद में विधायकजी दखलंदाजी करने पहुंच गए। उस वक्त कांग्रेस ने भी पटेल की दखलंदाजी पर सवाल उठाया।
हनुमना ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र मिश्रा ने प्रदी पटेल को भूमाफिया तक बता दिया और सवाल उठाया कि जब उस जमीन का मसला हाईकोर्ट में है तो विधायक वहां क्यों गए। इसकी अंदर की खबर ये है कि पुलिस वालों ने खुद विधायक को रोका था कि वो जमीन के लफड़े में न उलझे। पर पटेल माने नहीं। वो जमीन पर ही ध्यान लगाकर बैठ गए। इस दौरान उन पर हमला हुआ।
विधायक का दावा है कि हमले में मूसा गैंग के लोग भी शामिल थे। इस पर मामला ज्यादा बढ़ा तो विधायक को अपना क्षेत्र छोड़ कर नौ दो ग्यारह होना पड़ा, लेकिन कोई वाजिब वजह देना भी जरूर था। सो पटेल ने सारा मामला जड़ दिया मूसा गैंग के सिर पर। पटेल का दावा है कि मूसा गैंग से उन्हें जान का खतरा है। ये डर भी बड़ा मजेदार है।
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अब मूसा गैंग की भी सुनिए कहानी
चलिए अब मूसा गैंग की कहानी भी सुन लीजिए। ये नाम कितना डरावना और खौफनाक लगता है, है ना। मूसा गैंग, जैसे कोई इंटरनेशनल गैंग एमपी में हावी हो चुका हो। विधायक और उनके परिवार ने कुछ मीडिया हाउसेस को दिए इंटरव्यू में कहा है कि मूसा गैंग एक बड़ा गैंग है। जो ड्रग्स जैसे गंभीर अपराध में लिप्त है।
इस गैंग के लोग एमपी से यूपी तक फैले हैं। गैंग के पास पैसों की भी कोई कमी नहीं है। विधायक के परिवार को लगता है कि पटेल ड्रग तस्करी के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं इसलिए मूसा गैंग उनके पीछे पड़ा है।
पर ये मूसा गैंग है क्या और पुलिस से ज्यादा जानकारी इस मामले में विधायक के परिवार के पास क्यों है। इस गैंग से जुड़ा किस्सा भी दिलचस्प है। इसके लिए आपको जनवरी फरवरी 2025 यानी कि पिछले साल का एक घटनाक्रम समझना पड़ेगा। क्योंकि इसी दौरान पहली बार पुलिस की कार्रवाई में मूसा गैंग का नाम सामने आया था।
थानेदार की रिपोर्ट और पुलिस की चुप्पी
उनकी रिपोर्ट के अनुसार रात दस बजे विपिन त्रिपाठी अपने कुछ साथियों के साथ थाने आए। उनके साथियों के नाम आशुतोष तिवारी, संतोष तिवारी, लल्लू पांडेय, अशोक चौरसिया के रूप में दर्ज हैं। इनके साथ करीब चालीस पचास लोग और थे जिन्होंने थाने में घुसकर गाली गलौच की और मारपीट भी करने लगे।
इस घटना के बाद थाना प्रभारी ने अपने सीनियर्स को सारी जानकारी दी और पुलिस बल भी बुलवाया। थाना प्रभारी द्विवेदी ने ऐसा क्यों किया पता नहीं। पर उससे पहले या उसके बाद मध्यप्रदेश पुलिस ने कभी मूसा गैंग का नाम नहीं सुना। इसलिए सबसे पहले थाना प्रभारी को ही लाइन अटैच किया गया। उन पर जांच भी बिठाई गई। उनसे सवाल हुआ कि ये गैंग कौन सी है, कहां से आई है। वो सारी डिटेल दें, लेकिन तत्कालीन टीआई साहब इस संबंध में कोई जवाब नहीं दे पाए। यानी पुलिस खुद नहीं जानती कि मूसा गैंग है भी या नहीं।
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विधायक का करीबी अब मूसा गैंग का सदस्य?
अगर आपने मूसा गैंग के लोगों के नाम ध्यान से सुने हों तो आपने संतोष तिवारी नाम भी सुना ही होगा। तत्कालीन मऊगंज थाना प्रभारी ने संतोष तिवारी का नाम मूसा गैंग के अहम लोगों के नाम के साथ लिखा है। अब वही मऊगंज विधायक का खास आदमी कहा जाता है।
तो, क्या विधायक का खास और वफादार ही मूसा गैंग का सरगना है या गुर्गा है। और, अगर इसका जवाब हां है तो विधायक को उसी से जान का खतरा क्यों है। क्या विधायक ये जानते थे कि तिवारी मूसा गैंग का मैंबर है। अगर इसका भी जवाब हां है तो उसे लेकर सीएम से मिलने क्यों पहुंचे।
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प्रदीप पटेल: बीजेपी के सिरदर्द या चुनौती?
कुल मिलाकर प्रदीप पटेल बीजेपी की ऐसी लाइबिलिटी बन गए हैं, जिन्हें पार्टी न निगल पा रही है और न ही उगल पा रही है। फिलहाल चुनौती विधानसभा सत्र की है। बीजेपी ने अगर अभी ये मुद्दा संभाल लिया तो मूसा गैंग का तोड़ भी निकल ही आएगा और विधायक की क्षेत्र में आसानी से वापसी भी हो ही जाएगी।
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