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News in Short
- मध्यप्रदेश के सरकारी दफ्तरों से फाइलों के गायब होने के मामले बढ़े।
- अधिकारियों और कर्मचारियों के गठजोड़ के कारण घपले और भ्रष्टाचार छिपाए जा रहे हैं।
- भोपाल के हुजूर तहसील और जबलपुर में लोकायुक्त की फाइलें गायब हुईं।
- ग्वालियर में निविदा नस्तियां गायब होने का मामला सामने आया।
- उच्च न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
News in Detail
BHOPAL. मध्य प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में इन दिनों एक बड़ा खेल चल रहा है, जहां फाइलें गायब हो रही हैं। अधिकारियों की निगरानी के बावजूद स्टोर और रिकॉर्ड रूम से फाइलों का गायब होना अब आम बात बन गई है। सरकारी जमीन, नामांतरण, टेंडर और खरीदी से लेकर कई महत्वपूर्ण फाइलें अचानक गायब हो जाती हैं। इस खेल के पीछे अधिकारियों और कर्मचारियों के गठजोड़ की आशंका जताई जा रही है। कुछ दिन पहले राजधानी भोपाल के हुजूर तहसील से 53 नामांतरण की फाइलें गायब हो गईं। इसी तरह, जबलपुर में लोकायुक्त पुलिस की जांच कर रही एक फाइल भी गुम हो गई।
दफ्तरों में फाइल गायब होने के बढ़ते मामले
सरकारी दफ्तरों में यह स्थिति गंभीर होती जा रही है। अधिकारी और कर्मचारी, ठेकेदार और बिचौलियों के गठजोड़ में इस तरह के मामलों का हो रहा है। एक बार फिर से विभागीय स्तर पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। हाल ही में जबलपुर में लोकायुक्त प्रकरण की मूल फाइल गायब हुई थी। इस मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया और पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
हुजूर तहसील में नामांतरण की फाइलें गायब
भोपाल जिले के हुजूर तहसील से 53 नामांतरण की फाइलों के गायब होने का मामला सामने आया। नायब तहसीलदार के रीडर पर यह आरोप है कि उसने इन फाइलों को गायब कर दिया। शिकायत में आरोप है कि रीडर ने प्रत्येक फाइल के लिए पांच हजार रुपये की मांग की थी। हालांकि कलेक्टर ने जांच शुरू की है, लेकिन इससे पहले कई शिकायतें सामने आ चुकी थीं, जिन पर कार्रवाई नहीं हुई थी।
ग्वालियर में निविदा नस्तियां गायब
ग्वालियर में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री कार्यालय से 118 निविदा नस्तियां गायब हो गई थीं। इन फाइलों में कई विवादित मामले शामिल थे, जैसे बिना स्वीकृति के मरम्मत कार्यों के भुगतान। यह मामले दबाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन जांच शुरू होते ही अधिकारियों और ठेकेदारों का गठजोड़ सामने आया। इस जांच के दौरान सीई सूर्यवंशी का तबादला भी कर दिया गया था।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से गायब फाइल
भोपाल में बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी से कई महत्वपूर्ण फाइलें गायब हो गईं, जिनमें सेमिनारों और कार्यशालाओं के खर्चों के दस्तावेज शामिल थे। इन फाइलों का गायब होना विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा विभाग में हड़कंप का कारण बना। इस मामले में यह भी आशंका जताई जा रही है कि फाइलें जानबूझकर गायब की गईं, ताकि वसूली से बचा जा सके।
सीएमएचओ कार्यालय में दस्तावेज चोरी
ग्वालियर स्थित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय से भी दस्तावेज चोरी होने का मामला सामने आया। चोरों ने कुष्ठ रोग विभाग का दरवाजा तोड़कर अंधत्व निवारण शाखा तक दस्तावेजों को चुराया। इस मामले से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की चुप्पी इस बात की ओर इशारा करती है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
क्यों गायब हो रही हैं फाइलें ?
फाइलों का गायब होना अब कोई साधारण घटना नहीं रह गई है। इस स्थिति से साफ जाहिर होता है कि कहीं ना कहीं एक बड़ा खेल चल रहा है, जहां घपले और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए फाइलों का गायब किया जा रहा है। विभागों के कर्मचारियों और ठेकेदारों का गठजोड़ इसे और भी जटिल बना देता है। इन घटनाओं के बढ़ने से सरकारी दफ्तरों पर सवाल उठने लगे हैं।
क्या होनी चाहिए कार्रवाई ?
इन मामलों में सख्त विभागीय कार्रवाई की आवश्यकता है। न्यायालय ने भी इस पर सख्त कदम उठाने की सलाह दी है। उच्च न्यायालय ने जबलपुर लोकायुक्त प्रकरण की फाइल गायब होने के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने का भी निर्देश दिया है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में सरकारी दफ्तरों से फाइलों का गायब होना गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। यह घटनाएं भ्रष्टाचार और घपलों को छिपाने की साजिश की ओर इशारा करती हैं। इन मामलों में जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई और सुधार की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे मामले सामने न आएं।
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