बीच में छोड़ा कोर्स तो फीस वापस, नहीं चलेगी एमपी के कोचिंग सेंटर्स की दादागिरी
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश सरकार कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम लाने जा रही है।
- रजिस्ट्रेशन न कराने वाले संस्थानों पर 25 हजार रुपए जुर्माना लगेगा।
- पढ़ाई बीच में छोड़ने पर शेष फीस 10 दिन के भीतर लौटानी होगी।
- 13 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच 987 छात्रों ने सुसाइड किया है।
- हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दायर है, अगली सुनवाई 19 जून को है।
कोचिंग की मनमानी पर लगेगी लगाम
मध्यप्रदेश में लाखों छात्र हर साल निजी कोचिंग संस्थानों में दाखिला लेते हैं। इन संस्थानों की मनमानी फीस, झूठे विज्ञापन और खराब सुविधाओं की शिकायतें लंबे समय से आती रही हैं। अब राज्य सरकार इस पर लगाम लगाने के लिए कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम (Coaching Institute Regulation Act) लाने की तैयारी में है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। साथ ही, इसे अगले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।
उच्च शिक्षा विभाग के एससीएस अनुपम राजन का कहना है कि सभी संबंधित संस्थाओं के सहयोग से विद्यार्थियों के हित में प्रभावी नियम तैयार किए गए हैं। इससे मानसिक दबाव से उत्पन्न होने वाली गंभीर परिस्थितियों को रोकने में मदद मिल सकेगी।
राजन के मुताबिक, इस कानून के लागू होने पर कोचिंग संस्थान भी निजी स्कूलों, अस्पतालों और कॉलोनाइजर गतिविधियों की तरह एक नियामक ढांचे में आएंगे।
रजिस्ट्रेशन न हो तो जुर्माना
नए कानून के तहत हर कोचिंग सेंटर का पंजीकरण यानी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। जो संस्थान पहले से चल रहे हैं उन्हें भी तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराना होगा। नियमों का पहली बार उल्लंघन करने पर 25 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। दूसरी बार नियम तोड़ने पर जुर्माना एक लाख रुपए तक हो सकता है। लगातार उल्लंघन जारी रहने पर संस्थान का रजिस्ट्रेशन ही रद्द कर दिया जाएगा।
उपभोक्ता जागरूक मंच के अध्यक्ष मुकेश अमोलिया ने इस मामले पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आठवीं से नीचे की कक्षाओं के लिए कोचिंग संस्थान न चलाने का आदेश दिया है। इसके बावजूद गली-गली में बगैर पंजीयन के कोचिंग संस्थान खुले हुए हैं। साथ ही, कोई कार्रवाई नहीं होती। याचिका में बताया गया कि एमपी में करीब 95 फीसद संस्थान बिना पंजीयन के चल रहे हैं। कुछ ने कंपनी एक्ट के तहत पंजीयन करा रखा है, लेकिन शिक्षा के नजरिए से कोई नियमन नहीं है।
फीस और रिफंड के नए नियम
अब तक कई कोचिंग संस्थान एक बार फीस लेने के बाद वापस नहीं करते थे। नए कानून में इस पर सख्त प्रावधान होगा। यदि कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ता है तो शेष अवधि की फीस प्रो-राटा (Pro-Rata: अनुपातिक) आधार पर 10 दिनों के भीतर लौटानी होगी। कोर्स चलने के दौरान फीस नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
इसके अलावा संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर शिक्षकों की योग्यता, कोर्स का विवरण, फीस स्ट्रक्चर, रिफंड पॉलिसी और हॉस्टल की जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी होगा। यानी पारदर्शिता कानूनी बाध्यता बन जाएगी।
झूठे विज्ञापनों पर होगी कार्रवाई
कोचिंग संस्थानों के भ्रामक विज्ञापन अब अपराध की श्रेणी में आएंगे। गारंटीड रैंक या 100 प्रतिशत चयन जैसे दावे करना गैरकानूनी माना जाएगा। किसी सफल छात्र की फोटो या नाम उसकी लिखित सहमति के बिना विज्ञापन में नहीं लगाया जा सकेगा। पढ़ाने वाले शिक्षक का कम से कम स्नातक (Graduate) होना जरूरी है। किसी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को शिक्षक नहीं बनाया जा सकेगा।
16 साल से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग में दाखिला नहीं मिलेगा। छात्र का कम से कम दसवीं कक्षा पास होना अनिवार्य होगा। कक्षाओं के लिए समय सीमा भी तय होगी और एक दिन में अधिकतम पांच घंटे की कोचिंग की सलाह दी गई है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी जोर
नए कानून में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। हर कोचिंग संस्थान को काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता की व्यवस्था करनी होगी। साथ ही छात्रों को वैकल्पिक करियर के बारे में भी जानकारी देना जरूरी होगा। यह प्रावधान इसलिए जोड़ा गया है क्योंकि पढ़ाई के दबाव और परीक्षा में असफलता के चलते छात्र आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार और हाईकोर्ट का दरवाजा
इस कानून की जमीन तैयार करने में न्यायपालिका की बड़ी भूमिका रही है। दिल्ली के राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में 2024 में तीन यूपीएससी (UPSC) अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी। कोटा में छात्रों की आत्महत्याओं का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा था।
इन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त 2024 को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कोचिंग संस्थान डेथ चेंबर बन चुके हैं। साथ ही, ये छात्रों की जान को खतरे में डाल रहे हैं और इनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है।
केंद्र ने राज्यों के लिए एक मॉडल फ्रेमवर्क जारी किया था। मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने अप्रैल 2024 में कॉलेजों को गाइडलाइन मानने के निर्देश दिए, पर असर नहीं दिखा। फिर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को 90 दिन के भीतर नियम लागू करने का सख्त आदेश दिया था।
इसके बाद भी एमपी में नियम नहीं बने तो उपभोक्ता जागरूक मंच ने हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जनहित याचिका दायर की थी। इस पर अगली सुनवाई 19 जून को होगी। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहर तेजी से बड़े कोचिंग हब बन रहे हैं, इसलिए इस कानून की जरूरत और भी बढ़ गई है।
FAQ
- मध्यप्रदेश कोचिंग रेगुलेशन एक्ट में फीस वापसी का क्या नियम है?
नए प्रस्तावित कानून के तहत अगर कोई छात्र कोचिंग बीच में छोड़ता है तो संस्थान को शेष अवधि की फीस 'प्रो-राटा' यानी अनुपातिक आधार पर 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। - MP कोचिंग एक्ट में रजिस्ट्रेशन न कराने पर क्या सजा है?
प्रस्तावित कानून में नियमों का पहली बार उल्लंघन करने पर 25 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। दूसरी बार नियम तोड़ने पर यह जुर्माना 1 लाख रुपए तक हो सकता है। अगर कोई संस्थान लगातार नियमों की अनदेखी करता रहा तो उसका रजिस्ट्रेशन ही रद्द कर दिया जाएगा। - MP में कितने छात्रों ने पढ़ाई के दबाव में आत्महत्या की है?
मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार 13 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच 987 छात्रों ने सुसाइड किया है।
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