अजय सिंह ने पटवारी लाइनअप पर उठाए सवाल, बोले- 2028 नहीं जीते तो ‘अस्तित्व संकट’ तय
ऐसे समझें पूरा मामला...
- सिवनी दौरे पर बोले पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ‘राहुल’।
- भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की तैयारी पर बहस तेज।
- कार्यकर्ताओं की नई पीढ़ी में बढ़ते मोहभंग पर चिंता जताई।
- जीतू पटवारी की “एकजुट कांग्रेस” लाइन पर अप्रत्यक्ष सवाल।
- संगठनात्मक फैसलों और नियुक्तियों पर पहले भी उठते रहे सवाल।
मध्य प्रदेश कांग्रेस में एकजुटता के दावों के बीच अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आती दिख रही है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ‘राहुल’ ने सिवनी दौरे में जिस अंदाज में पार्टी की कार्यप्रणाली, संगठन की स्थिति और 2028 चुनाव को लेकर चेतावनी दी, उसने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अजय सिंह ने साफ कहा कि 2028 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए “अंतिम मौका” जैसा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पार्टी के वरिष्ठ नेता ही संगठन की दिशा और तैयारी पर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो भाजपा जैसी मजबूत चुनावी मशीनरी का मुकाबला कांग्रेस कैसे करेगी?
कांग्रेस में सब ठीक नहीं?
मध्य प्रदेश कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और अंदरूनी असंतोष की चर्चा में रही है। समय-समय पर कई बड़े नेताओं ने संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अब पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ‘राहुल’ का बयान उसी बहस को फिर तेज करता दिख रहा है।
सिवनी में कार्यकर्ताओं के बीच उन्होंने जिस तरह “अस्तित्व बचाने” वाली भाषा का इस्तेमाल किया, उसे सिर्फ चुनावी बयान नहीं बल्कि संगठन की मौजूदा हालत पर गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
2028 नहीं जीते तो कोई नहीं बचेगा: अजय सिंह
केवलारी विधायक के निवास पर आयोजित बैठक में अजय सिंह ने कहा कि 2028 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए सामान्य राजनीतिक लड़ाई नहीं है।
अजय सिंह ने दो टूक कहा-
“अगर 2028 में कांग्रेस की सरकार नहीं बनी, तो हम राजनीतिक रूप से खत्म हो जाएंगे। यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई है।” उनका यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस लगातार संगठनात्मक कमजोरी और नेतृत्व विवादों से जूझती रही है।
पटवारी की ‘एकजुट कांग्रेस’ लाइन पर सवाल?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार संगठन को एकजुट और सक्रिय बताने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अजय सिंह के बयान ने उन दावों की हवा निकालने का काम किया है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जब वरिष्ठ नेता सार्वजनिक मंच से पार्टी के भविष्य को लेकर इतनी कठोर चेतावनी दें, तो यह केवल कार्यकर्ताओं को संदेश नहीं होता, बल्कि संगठन की अंदरूनी स्थिति का संकेत भी होता है।
नियुक्तियों से लेकर कार्यक्रमों तक उठते रहे सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस में पिछले कुछ वर्षों में कई मुद्दों पर विवाद सामने आते रहे हैं। इनमें शामिल हैं-
- प्रवक्ताओं के चयन को लेकर असहमति।
- जिलाध्यक्ष नियुक्तियों पर नाराजगी।
- कार्यकारिणी गठन में देरी।
- कई समितियों की अधूरी घोषणाएं।
- बड़े कार्यक्रमों में समन्वय की कमी।
- वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और बयानबाजी।
2018 में सत्ता में आने के बाद भी कांग्रेस संगठनात्मक स्थिरता नहीं बना सकी। सरकार गिरने के बाद यह संकट और गहरा दिखाई दिया।
25 साल का सूखा कार्यकर्ताओं को तोड़ रहा
अजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है। इसका असर सीधे कार्यकर्ताओं पर पड़ा है। उन्होंने चिंता जताई कि नई पीढ़ी का एक बड़ा वर्ग राजनीति और संगठन से दूर होता जा रहा है। उनके मुताबिक अब केवल बैठकों और भाषणों से काम नहीं चलेगा। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर जनता के बीच फिर से भरोसा बनाना होगा।
भाजपा के मजबूत संगठन से मुकाबला कैसे?
भाजपा मध्य प्रदेश में बूथ स्तर तक मजबूत संगठन और लगातार चुनावी सक्रियता के लिए जानी जाती है। दूसरी तरफ कांग्रेस अब भी अंदरूनी समीकरण, नेतृत्व संघर्ष और संगठनात्मक असंतुलन से जूझती दिख रही है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि यदि पार्टी अपने भीतर की गुटबाजी और असहमति को नियंत्रित नहीं कर पाती, तो 2028 में भाजपा के खिलाफ मजबूत विकल्प कैसे बन पाएगी?
महाकौशल दौरे में भावनात्मक संदेश भी
अपने महाकौशल दौरे के दौरान अजय सिंह जबलपुर और सिवनी पहुंचे। सिवनी में उन्होंने दिवंगत वरिष्ठ नेता स्वर्गीय हरवंश सिंह के निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान उन्होंने पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से फिर सक्रिय होने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की अपील भी की। अजय सिंह ने 2028 चुनाव को कांग्रेस के लिए “अंतिम मौका” बताया। बोले- सरकार नहीं बनी तो पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा।
ये खबरें भी पढ़ें...
बुंदेली चुगली वीडियो से बवाल, BJP विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह पर अश्लील टिप्पणी का अपराध दर्ज
सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान: एमपी में बनेंगी 2117 किमी ग्रामीण सड़कें, 987 गांवों को मिलेगा लाभ
एमपी में राशन कार्ड और गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए आधार लिंक करना होगा जरूरी, नहीं तो बंद होगा राशन
एमपी के इस जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना में 152 करोड़ की गड़बड़ी