MP कांग्रेस में जल्द हो सकती है सर्जरी, ओंकार-सिद्धार्थ समेत 12 जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट निकली कमजोर

Aman Vaishnav | Apr 19, 2026, 15:57 IST
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मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी है। AICC की समीक्षा में करीब 12 से 14 जिलाध्यक्षों की परफॉर्मेंस कमजोर मिली है। ओंकार सिंह मरकाम और सिद्धार्थ कुशवाहा जैसे सीनियर नेता भी इस लिस्ट में हैं।

News In Short

  • एमपी कांग्रेस के करीब 12 से 14 जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट कमजोर मिली है।
  • AICC (All India Congress Committee) प्रतिनिधि वामसी रेड्डी ने समीक्षा की है।
  • पूर्व मंत्री ओंकार सिंह मरकाम और विधायक सिद्धार्थ कुशवाहाभी सूची में हैं।
  • दिल्ली से मंजूरी मिलते ही कमजोर जिलाध्यक्षों को हटाया जाएगा।
  • आठ महीने पहले राहुल गांधी के अभियान के तहत ये जिलाध्यक्ष बनाए गए थे।

News In Detail

राहुल का अभियान, अब समीक्षा की बारी

पिछले साल जून 2025 में भोपाल में राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की थी। करीब दो महीनों की लंबी बैठकों और मंथन के बाद जिला अध्यक्षों के नाम तय किए गए थे। लेकिन आठ महीने बाद ही कई जिलाध्यक्षों का काम उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। अब AICC ने यही जांचने की कोशिश की कि किसने क्या किया और किसने सिर्फ कुर्सी संभाली।



कैसे हुई समीक्षा

AICC की तरफ से मध्य प्रदेश भेजे गए वामसी रेड्डी ने जिलाध्यक्षों के काम की गहरी समीक्षा की। यह समीक्षा कई पैमानों पर हुई। जिले से लेकर ब्लॉक, मंडलम, पंचायत और वार्ड समिति का गठन कितना हुआ यह देखा गया। साथ ही जिले में दौरे कितने हुए, AICC और पीसीसी (Pradesh Congress Committee) के कार्यक्रमों पर कितना अमल हुआ यह भी परखा गया।



स्थानीय जन समस्याओं पर धरना-प्रदर्शन कितने हुए और कनेक्ट सेंटर को रिपोर्टिंग कितनी गंभीरता से की गई यह सब रिव्यू का हिस्सा था। इस पूरी जांच में करीब 12 जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट चिंताजनक पाई गई है।



सीनियर नेता भी नहीं बचे

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कमजोर प्रदर्शन वाली सूची में कोई नए या अनजान नेता नहीं हैं। इसमें पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी चेहरे भी शामिल हैं।



पूर्व मंत्री और कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) के सदस्य ओमकार सिंह मरकाम डिंडोरी जिलाध्यक्ष के रूप में अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। सतना विधायक और ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह भी सतना ग्रामीण जिलाध्यक्ष के तौर पर कमजोर पाए गए। मंडला के पूर्व विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले का प्रदर्शन भी संतोषजनक नहीं रहा।



इन 14 जिलाध्यक्षों पर गाज गिर सकती है

रिव्यू में कमजोर पाए गए जिलाध्यक्षों की सूची में डिंडोरी से ओमकार सिंह मरकाम, सतना ग्रामीण से सिद्धार्थ कुशवाहा, मंडला से अशोक मर्सकोले, इंदौर शहर से चिंटू चौकसे, आलीराजपुर से मुकेश पटेल जो पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।



रतलाम शहर से शांतिलाल वर्मा, हरदा से मोहन साईं, मऊगंज से हरिलाल कोल, सिंगरौली से सरस्वती सिंह, ग्वालियर ग्रामीण से प्रभुदयाल जोहारे, अशोकनगर से राजेंद्र कुशवाहा, सतना शहर से आतिफ इकबाल सिद्दीकी, उमरिया से विजय कोल और नर्मदापुरम से गुड्डन पांडे के नाम हैं।



इंदौर में अध्यक्ष से नाराजगी क्यों

इंदौर शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे का नाम सूची में अलग वजह से भी है। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह के इंदौर में एक प्रदर्शन को लेकर चौकसे ने ऐसा बयान दे दिया, जिससे संगठन नाराज हो गया। इसके बाद पार्षदों के वंदे मातरम विवाद पर भी बिना आलाकमान से चर्चा किए बयानबाजी की गई। अब इन दोनों बातों के चलते उनका पद खतरे में माना जा रहा है।



दिल्ली की मंजूरी का इंतजार

अब इन सभी जिलाध्यक्षों की रिव्यू रिपोर्ट AICC यानी राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही कमजोर प्रदर्शन वाले जिलाध्यक्षों को हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। पार्टी का मानना है कि अगले चुनावों से पहले जमीनी संगठन को मजबूत करना जरूरी है।



कमजोर कड़ियों को बदले बिना यह संभव नहीं होगा। यह पूरी कवायद इस बात की भी निशानी है कि राहुल गांधी का संगठन सृजन अभियान सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है। जिन्होंने काम नहीं किया, उनसे जवाब मांगा जा रहा है।



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