दतिया जीत के बाद कांग्रेस का बड़ा रीसेट प्लान! जल्द बदलेगा संगठन का चेहरा

Ramanand Tiwari | Aug 11, 2026, 22:31 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. एमपी कांग्रेस में प्रकोष्ठ और विभाग भंग होने के बाद अब प्रदेश कार्यकारिणी पर नजर है। भोपाल की बैठक में संगठन को नए सिरे से गढ़ने पर मंथन किया गया।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • दतिया जीत के बाद कांग्रेस का बढ़ा आत्मविश्वास।
  • प्रदेश कार्यकारिणी में बड़े बदलाव की तैयारी।
  • 2028 चुनाव के लिए नया संगठन बनाने की कवायद।
  • बैठक में आंदोलन और चुनावी रणनीति पर मंथन।
  • नई टीम में युवा और सक्रिय चेहरों पर नजर।

दतिया उपचुनाव में मिली जीत के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब पार्टी इस जीत को 2028 की बड़ी राजनीतिक तैयारी में बदलने की कोशिश में जुट गई है।



भोपाल में हुई कांग्रेस की अहम बैठक में संगठन को नए सिरे से तैयार करने पर मंथन हुआ। प्रकोष्ठ और विभाग पहले ही भंग किए जा चुके हैं। अब जल्द ही प्रदेश कार्यकारिणी में भी बड़े बदलाव की तैयारी दिखाई दे रही है।



सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस संगठन को पुराने ढांचे से निकालकर चुनावी जरूरत के हिसाब से नए सिरे से तैयार करने पर विचार कर रही है। यानी अगला फोकस सिर्फ आंदोलन नहीं, बल्कि 2028 के लिए मजबूत संगठन खड़ा करना है।



बैठक में असली चर्चा संगठन के रीसेट पर

कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक करीब पांच घंटे चली। बैठक में प्रदेश की राजनीतिक स्थिति के साथ संगठन की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। जनहित के मुद्दों और सरकार के खिलाफ आंदोलनों की रूपरेखा भी बनी।



बैठक का सबसे अहम संकेत संगठन कोच लेकर सामने आया। प्रकोष्ठ और विभागों को भंग करने के बाद अब प्रदेश कार्यकारिणी के पुनर्गठन की तैयारी को आगे बढ़ाने पर मंथन हुआ है। यानी कांग्रेस अब संगठन में सिर्फ छोटी-मोटी मरम्मत के बजाय बड़े स्तर पर बदलाव की दिशा में बढ़ती दिख रही है।



2028 को सामने रखकर नई टीम बनाने की तैयारी

कांग्रेस के भीतर लंबे समय से संगठन में बदलाव की जरूरत को लेकर चर्चा होती रही है। अब पार्टी 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर नई टीम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।



नई कार्यकारिणी में किन चेहरों को जगह मिलेगी, कौन से पुराने पदाधिकारी बाहर होंगे और किन क्षेत्रों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा—इस पर आने वाले दिनों में तस्वीर साफ हो सकती है। यह बदलाव सिर्फ पदों का फेरबदल होगा या कांग्रेस की चुनावी रणनीति का हिस्सा बनेगा, यही सबसे बड़ा सवाल है।



दतिया ने बदला कांग्रेस का मूड

दतिया उपचुनाव की जीत ने कांग्रेस को लंबे समय बाद प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक मनोबल दिया है। पार्टी अब इस जीत को महज एक सीट की जीत के रूप में नहीं देखना चाहती।



कांग्रेस नेतृत्व का संदेश है कि दतिया के नतीजे को जनता के बदलते मूड के संकेत के तौर पर आगे बढ़ाया जाए। यही वजह है कि संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर पार्टी की मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिखाई दे रहा है।



पुरानी कार्यकारिणी पर उठते रहे सवाल

मध्य प्रदेश कांग्रेस में समय-समय पर संगठन की सक्रियता और चुनावी तैयारी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई मौकों पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की नाराजगी भी सामने आती रही है।



अब संगठन के पुनर्गठन के जरिए कांग्रेस इन कमियों को दूर करने की कोशिश कर सकती है, लेकिन नई कार्यकारिणी बनाना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल अलग-अलग गुटों और नेताओं के बीच संतुलन बनाना होगा।



बैठक में सरकार के खिलाफ भी मोर्चा तय

बैठक में किसानों, युवाओं, छात्रों, महिलाओं और ओबीसी से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने पर चर्चा हुई। खाद संकट, रोजगार, शिक्षा, कथित भ्रष्टाचार और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर भी बात हुई।



कांग्रेस छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की मांग को भी आंदोलन का मुद्दा बनाने की तैयारी में है। जरूरत पड़ने पर इन मुद्दों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति भी अपनाई जा सकती है।



कमलनाथ की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा

बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बैठक में मौजूद नहीं रहे। कांग्रेस की मौजूदा राजनीति में दोनों वरिष्ठ नेताओं की अलग-अलग भूमिका को देखते हुए यह गैरमौजूदगी राजनीतिक चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।



हालांकि, सिर्फ किसी बैठक में मौजूदगी या गैरमौजूदगी के आधार पर गुटबाजी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। फिर भी इतना साफ है कि संगठन के नए ढांचे में पुराने और नए नेतृत्व के बीच संतुलन बनाना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती रहने वाला है।



अब असली परीक्षा नई टीम की होगी

कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि नई कार्यकारिणी कब घोषित होगी। सवाल यह है कि क्या नई टीम 2028 तक पार्टी को बूथ और जमीन के स्तर पर मजबूत कर पाएगी?



दतिया ने कांग्रेस को उत्साह दिया है। अब इस उत्साह को संगठन में बदलना पार्टी की अगली चुनौती है। अगर नई कार्यकारिणी में क्षेत्रीय संतुलन, युवा नेतृत्व और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जगह मिलती है, तो कांग्रेस इसे 2028 की तैयारी का मजबूत आधार बना सकती है।



फिलहाल भोपाल की बैठक से इतना संकेत जरूर मिला है कि दतिया के बाद कांग्रेस अब सिर्फ जीत का जश्न नहीं, बल्कि संगठन के अगले बड़े रीसेट की तैयारी कर रही है।



ये खबरें भी पढ़ें...



एमपी में फर्जी मुकदमों के खिलाफ कांग्रेस चलाएगी जेल भरो आंदोलन, लगाए गंभीर आरोप



बिलौआ खदानों पर HC सख्त, कलेक्टर से पूछा- अवैध खनन की जिम्मेदारी किसकी?



मिस्ट्री गर्ल अर्चना तिवारी निकली शादीशुदा, पति संग जाने की HC से मिली अनुमति



मुस्लिम समाज ने धार कलेक्टर से कहा कमाल मौला दरगाह को सरस्वती लोक बनाने की हो रही बात





Tags:
  • कमलनाथ
  • दिग्विजय सिंह
  • विधानसभा चुनाव
  • मध्य प्रदेश कांग्रेस
  • संगठन में बदलाव
  • दतिया उपचुनाव