एमपी कांग्रेस का टैलेंट हंट सवालों में: 850 आवेदन, आधे ही पहुंचे इंटरव्यू में, चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
मध्यप्रदेश कांग्रेस का प्रवक्ता चयन टैलेंट हंट विवादों में घिरता दिख रहा है। प्रदेशभर से करीब 850 आवेदन आए, लेकिन बिना किसी स्क्रीनिंग के सभी को इंटरव्यू के लिए बुला लिया गया। हैरानी की बात यह रही कि आधे से भी कम लोग इंटरव्यू देने पहुंचे। ऐसे में चयन प्रक्रिया, नेतृत्व की रणनीति और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, कांग्रेस ने प्रवक्ता, रिसर्च और राइटिंग स्पेशलिस्ट चुनने के लिए ऑनलाइन आवेदन मंगाए थे। लेकिन किसी भी आवेदन को खारिज नहीं किया गया। यानी जिसने भी आवेदन किया, उसे सीधे इंटरव्यू का मौका मिल गया। यही फैसला अब सबसे बड़ी चूक माना जा रहा है।
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सबसे बड़ा सवाल: बिना जांच कैसे भरोसा?
क्या सभी 850 आवेदक पूरी तरह योग्य थे?
क्या किसी का बैकग्राउंड चेक किया गया?
अगर कोई आपराधिक या संदिग्ध व्यक्ति शामिल हो तो?
क्या दूसरे दलों के लोग भी इस प्रक्रिया में घुस सकते हैं?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब प्रदेश नेतृत्व के पास नहीं दिख रहा।
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इंटरव्यू में ही दिखी बड़ी कमी
ग्वालियर, भोपाल, सागर और नर्मदापुरम संभाग में इंटरव्यू हुए, लेकिन कहीं भी पूरी उपस्थिति नहीं रही। भोपाल में 180 आवेदन आए, लेकिन करीब 70 लोग पहुंचे। सागर और नर्मदापुरम में मिलाकर करीब 80-90 लोग पहुंचे। कुल मिलाकर आधे से भी कम उम्मीदवार इंटरव्यू में शामिल हुए। ऐसे में 850 में से 200 लोगों का चयन कैसे होगा, यह एक बड़ी चुनौती बन गई है।
इंटरव्यू का स्तर भी सवालों में
इंटरव्यू के दौरान कई उम्मीदवार बुनियादी राजनीतिक सवालों का जवाब नहीं दे पाए। एक उम्मीदवार से पूछा गया कि केजरीवाल से जुड़ा मुद्दा किसने उठाया, लेकिन वह जवाब नहीं दे सका। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सही प्रतिभाओं तक यह प्रक्रिया पहुंच पा रही है?
भाई-भतीजावाद के आरोप भी लगे
भोपाल में इंटरव्यू के दौरान कुछ उम्मीदवारों ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाए कि पहले से तय लोगों को प्राथमिकता दी गई। रिश्तेदारों और सिफारिश वाले उम्मीदवार आगे रहे, जबकि बाकी को घंटों इंतजार करवाया गया। कुछ उम्मीदवारों ने इसे "सिर्फ खानापूर्ति" तक बता दिया।
रणनीति पर भी उठे बड़े सवाल
अगर चयनित लोग बीच में पार्टी छोड़ दें तो?
क्या कोई विरोधी दल का व्यक्ति अंदर घुस सकता है?
क्या विचारधारा से अनजान लोगों को प्रवक्ता बनाया जाएगा?
इन सवालों पर भी कांग्रेस नेतृत्व की तैयारी साफ नजर नहीं आई।
यह कार्यक्रम पहले ही देरी और प्लानिंग को लेकर चर्चा में रहा है। अब इंटरव्यू प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल इसे फिर विवादों में ला रहे हैं।
आगे की चुनौती क्या है?
करीब 850 में से सिर्फ 200 के आसपास चयन होना है। इसमें 20 प्रदेश प्रवक्ता और बाकी जिलों के लिए चयन होना है। अलग-अलग बैकग्राउंड (डॉक्टर, इंजीनियर, वकील) के लोगों में से सही चेहरे चुनना कांग्रेस के लिए आसान नहीं दिख रहा है।
कांग्रेस का पक्ष
हालांकि प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री संजय कामले का कहना है, इंटरव्यू अच्छी तरह से चल रहे हैं। लोगों में उत्साह है। कई प्रतिभाएं सामने आई हैं। चयन के बाद बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी किया जा सकता है।