शहर से दूरी ने किया हाउसिंग प्रोजेक्ट से मोहभंग, 450 करोड़ का एक्वा पार्क भी खटाई में
News in Short
- आवासीय प्रोजेक्ट में प्लानिंग की कमी से निर्माण एजेंसियों का मोहभंग।
- हाउसिंग बोर्ड की अनदेखी से अटकी झुग्गियों की शिफ्टिंग की योजना।
- शहर से अत्यधिक दूरी की वजह से आवास लेने से दूरी बना रहे लोग।
- भदभदा क्षेत्र में प्रस्ताविक 459 करोड़ के एक्वा पार्क का काम भी अटका।
- केंद्रीय प्रोजेक्ट में भी MPHIDB की प्लानिंग से ठेकेदारों बना रहे दूरी।
News in Detail
घाटे के सौदे करने के महारथी मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अदूरदर्शी निर्णय फिर सवालों में हैं। चार इमली क्षेत्र की झुग्गियों की शिफ्टिंग की प्लानिंग में एमपीएचआईडीबी की चूक ने करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट ही खटाई में डाल दिए हैं। इसकी वजह इन हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए जगह के चयन की शहर से 12 किलोमीटर से अधिक दूरी है।
इनमें से एक प्रोजेक्ट में लोग आवास लेने ही आगे नहीं आए हैं। इस स्थिति को देख निर्माण कंपनियां इन प्रोजेक्ट्स से हाथ खींच रही हैं। उधर यही हालत 450 करोड़ से अधिक लागत वाले एक्वा पार्क के निर्माण की है। हाउसिंग बोर्ड अब तक निर्माण एजेंसी का चयन ही नहीं कर पाया है। दो बार कंपनियों की अरुचि के बाद अब तीसरी बार टेंडर जारी किए जा रहे हैं।
घाटे के पुराने अनुभव से नहीं लिया सबक
मध्यप्रदेश हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्लपमेंट बोर्ड द्वारा झुग्गी बस्तियों की शिफ्टिंग की योजना का काम संभाल रहा है। इसके लिए बोर्ड न चार इमली क्षेत्र के झुग्गीवासियों के लिए दो हाउसिंग प्रोजेक्ट तैयार किए गए हैं। इन हाउसिंग प्रोजेक्ट की प्लानिंग में भी बोर्ड के अधिकारियों द्वारा दूरी की अनदेखी की गई है।
यह पहला मौका नहीं है जबकि एमपीएचआईडीबी को अपने मनमाने फैसलों से नुकसान उठाना पड़ रहा है। पुराने अनुभवों से सबक न लेते हुए बोर्ड द्वारा काला पानी और महाबड़िया गांव में चयन चुनी है। इनकी चार इमली और शहर के अन्य क्षेत्रों से दूरी 12 किलोमीटर से ज्यादा है।
दूरी के आंकलन की अनदेखी पड़ी भारी
शहर के बीचों बीच और पॉश इलाके चार इमली क्षेत्र के झुग्गीवासी अब इतने दूर जाने तैयार नहीं है। हाउसिंग बोर्ड ने इन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करने से पहले न तो सर्वे किया, न ही लोगों से मशविरा किया। अब जबकि एक प्रोजेक्ट में 550 आवास बन चुके हैं तब भी लोग पजेशन लेने आगे नहीं आ रहे हैं।
इस वजह से इस प्रोजेक्ट का काम संभाल रहीं निर्माण एजेंसी ने काम रोक दिया है। वहीं दूसरे प्रोजेक्ट साइट पर दूसरी कंपनी काम ही शुरू नहीं कर रही है। अदूरदर्शी फैसले का नतीजा यह है कि न तो लोग झुग्गी छोड़ रहे हैं और न ही हाउसिंग प्रोजेक्ट में उलझे करोड़ों रुपए की वापसी हो रही है।
खटाई में पड़ा एक्वा पार्क का मेगा प्रोजेक्ट
भोपाल के भदभदा क्षेत्र में केंद्र सरकार की फंडिंग से इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क को मंजूरी मिली है। इसके लिए केंद्र ने 459 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत किया है। इस इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क को तैयार करने के लिए दो साल की समय सीमा तय की गई थी।
यह अब लगभग पूरी हो चुकी है। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए हाउसिंग बोर्ड दो बार टेंडर जारी कर चुका है। टेंडर की शर्तें और मनमाने नियमों के चलते निर्माण एजेंसियों ने तीन बार रुचि ही नहीं दिखाई। जिसके चलते अब हाउसिंग बोर्ड चौथी बार टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहा है।
क्यों अटक रहे MPHIDB के प्रोजेक्ट
मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड की ज्यादातर आवासीय परियोजनाएं शुरूआत से ही विवादों में घिरती रही है। शहर के मध्य शिवाजी नगर क्षेत्र में तुलसी टॉवर ग्रीन का निर्माण तय से दोगुना समय लगने के बाद भी अधूरा है। इस वजह से यहां बुकिंग कराने वाले पजेशन के इंतजार में हैं।
वहीं पांच नंबर मार्केंट से रि-डेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट के लिए बोर्ड दुकान और आवासों की शिफ्टिंग में दो साल पिछड़ चुका है। इस वजह से जिन लोगों की शिफ्टिंग कराई गई उनका किराया चुकाने में बोर्ड को हर माह लाखों खर्च करने पड़ रहे हैं। यही हाल मछली घर और काला पानी क्षेत्र में आवासीय प्रोजेक्ट का है। यहां मकान बनकर तैयार हैं लेकिन लोग इनमें रहने तैयार नहीं हैं।
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